कोविशील्ड पर अदार पूनावाला बोले- जनवरी तक उपलब्‍ध होंगी 10 करोड़ डोज, सरकार को 250 रुपये में देंगे'

सीरम इंस्‍टीट्यूट के सीईओ हैं अदार पूनावाला.

सीरम इंस्‍टीट्यूट के सीईओ हैं अदार पूनावाला.

Coronavirus Vaccine: अदार पूनावाला का कहना है कि इस वैक्‍सीन की एक डोज अगर फार्मेसी से खरीदी गई तो वो 1000 रुपये की पड़ेगी, लेकिन सरकार पूरी सप्‍लाई का 90 फीसदी 250 रुपये प्रति डोज खरीदेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 24, 2020, 10:30 PM IST
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नई दिल्‍ली. ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस के मरीज़ों पर (Coronavirus Vaccine) कोविशील्‍ड (covishield) वैक्‍सीन के काफी कारगर होने का दावा किया है. उनका कहना है कि कोविशील्‍ड कोरोना वायरस के खिलाफ करीब 70 फीसदी प्रभावी है. अब इस वैक्‍सीन को लेकर सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया के अदार पूनावाला (Adar Poonawalla) ने प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि जनवरी तक इस वैक्‍सीन की 10 करोड़ डोज उपलब्‍ध करा दी जाएंगी. इसके साथ ही फरवरी के अंत तक लाखों और डोज उपलब्‍ध कराने की योजना है.

अदार पूनावाला ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि इस वैक्‍सीन की एक डोज अगर फार्मेसी से खरीदी गई तो वो 1000 रुपये की पड़ेगी, लेकिन सरकार पूरी सप्‍लाई का 90 फीसदी 250 रुपये प्रति डोज खरीदेगी. पूनावाला की कंपनी ने वैक्सीन का बड़े पैमाने पर निर्माण करने के लिए सरकार के साथ समझौता किया है. उनका दावा है कि पहले ही वैक्‍सीन की करीब 4 करोड़ डोज का उत्पादन किया जा चुका था.

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पूनावाला ने कहा, 'भारत में यह वैक्‍सीन उपलब्‍ध होने में करीब 2 से 3 महीने का समय लगेगा. लेकिन जनवरी तक हमारे पास कम से कम करीब 10 करोड़ डोज उपलब्ध हो जाएंगी. वहीं सरकार द्वारा जुलाई तक 30 से 40 करोड़ डोज उपलब्‍ध कराने का लक्ष्‍य है. हम इसकी एमआरपी 1000 रुपये तय कर रहे हैं. प्राइवेट बाजार के लिए यह लगभग 500 या 600 रुपये की होगी. सरकार के लिए यह 250 रुपये या इससे भी कम हो सकती है.'
एस्ट्राजेनेका कंपनी ने एक बयान में बताया कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित किए गए कोविड-19 के टीके की पहली खुराक व्यवस्था में 90 फीसद असर नजर आया. इसे आधी खुराक और एक महीने बाद पूरी खुराक के तौर दी गई थी. दूसरी खुराक व्यवस्था में इसका असर 62 फीसद रहा. इसमें भी दो पूर्ण खुराक एक महीने के अंतराल पर दी गई.

इस दवा कंपनी ने कहा कि एक स्वतंत्र डाटा सेफ्टी मोनिटरिंग बोर्ड ने तय किया कि यह विश्लेषण उसके प्राथमिक लक्ष्य को पूरा करता है और दर्शाता है कि टीके की दो खुराक लेने पर कोविड-19 से सुरक्षा प्रदान करता है. उसने कहा कि इस टीके से संबंधित कोई सुरक्षा चिंता सामने नही आई तथा एजेडडी 1222 नामक इस दवा से दोनों ही खुराक व्यवस्था में कोई मुश्किल पैदा नहीं हुई.

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के टीके के (परीक्षण) नतीजे फाइजर और मॉडर्ना के टीकों से तुलना की गयी जो हाल ही में क्रमश: 95 और 94.5 फीसद प्रभावी नजर आये हैं. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय का टीका अपेक्षाकृत सस्ता है और उसका भंडारण आसान है. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने इसका स्वागत कर रहा है. यह भारतीय दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका के कोविड-19 टीके का भारत में क्लीनिकल परीक्षण कर रही है.




एसआईआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अडार पूनावाला ने ट्वीट किया, 'मैं यह सुनकर खुश हूं कि कोविड-19 के टीके के सिलसिले में सस्ता, बुनियादी ढांचा की दृष्टि से प्रबंध योग्य और शीघ्र उपलब्ध कराये जा सकने वाला कोवाशील्ड एक प्रकार की खुराब व्यवस्था में 90 फीसद और अन्य खुराक व्यवस्थ में 62 फीसद सुरक्षा प्रदान करेगी.'

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