अदार पूनावाला बोले- एक दिन में बना देंगे इतनी वैक्सीन, पूरी दुनिया के पारसी हो जाएंगे सुरक्षित

अदार पूनावाला बोले- एक दिन में बना देंगे इतनी वैक्सीन, पूरी दुनिया के पारसी हो जाएंगे सुरक्षित
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला (फाइल फोटो)

अदार पूणावाला (Adar Poonawalla) ने ट्वीट किया, 'हां, हम समुदाय के लिए पर्याप्त से अधिक रखेंगे. वह एक दिन में इतनी वैक्सीन बना देंगे कि पूरी दुनिया में रहने वाले पारसी समुदाय के लोग सुरक्षित हो जाएंगे.

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नई दिल्ली. देश में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्लिटी के साथ कोरोना वैक्सीन बनाने में जुटी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) के सीईओ अदार पूनावाला (Adar Poonawalla) का एक बयान सामने आया है. पूनावाला ने कहा कि वह एक दिन में ही इतनी वैक्सीन (Vaccine) बना देंगे कि पूरी दुनिया में रहने वाले पारसी समुदाय (Parsi community) के लोग सुरक्षित हो जाएंगे.

दरअसल, अदार पूनावाला (Adar Poonawalla) का यह बयान स्वदेश फाउंडेशन के संस्थापक रोनी स्क्रूवाला के सवाल के जवाब में आया है. स्क्रूवाला ने मजाकिया अंदाज में अदार पूनावाला एक सवाल पूछा था. उन्होंने कहा, 'क्या आप कोरोना वायरस से बचाव के लिए पारसी समुदाय के लिए कुछ स्पेशल वैक्सीन कोटा रिजर्व रख रहे हो? स्क्रूवाला के इस सवाल का पूनावाल ने बड़े फनी अंदाज में जवाब दिया.

पुणावाला ने दिया दिलचस्प जवाब



अदार पूणावाला (Adar Poonawalla) ने ट्वीट किया, 'हां, हम समुदाय के लिए पर्याप्त से अधिक रखेंगे. वह एक दिन में इतनी वैक्सीन बना देंगे कि पूरी दुनिया में रहने वाले पारसी समुदाय के लोग सुरक्षित हो जाएंगे. पूनावाला की इस चिंता को पारसी समुदाय के लोग काफी प्रशंसा कर रहे हैं. बता दें कि स्क्रूवाला और पूनावाला दोनों ही पारसी समुदाय से आते हैं.



एसआईआई ने तीसरे फेज के ट्रायल की मांगी अनुमति
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने टीके के मनुष्य पर क्लीनिकल ट्रायल के दूसरे और तीसरे चरण के लिए भारत के औषध महानियंत्रक (DCGI) से अनुमति मांगी है. उच्च पदस्थ सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि पुणे स्थित दवा कंपनी एसआईआई ने शुक्रवार को डीसीजीआई को आवेदन दिया है और ‘कोविडशील्ड’ नामक टीके के परीक्षण के लिए अनुमति मांगी है. एक सूत्र ने कहा, ‘‘आवेदन के मुताबिक, वह स्वस्थ भारतीय वयस्कों में ‘कोविडशील्ड’ की सुरक्षा और प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित होने का पता लगाने के लिए बिना क्रम के (रैंडमाइज्ड) नियंत्रित अध्ययन करेगी जो ऑब्जर्वर-ब्लाइंड होगा यानी जिस पर परीक्षण हो रहा है और जो कर रहा है, दोनों को नहीं पता होगा कि क्या दवा दी जा रही है. कंपनी ने कहा कि अध्ययन में 18 साल से अधिक उम्र के करीब 1600 प्रतिभागियों को शामिल किया जाएगा.’ सूत्र ने कहा कि ब्रिटेन में पांच परीक्षण स्थलों पर टीके के पहले दो चरण के परीक्षण के परिणाम दिखाते हैं कि इसका स्वीकार्य स्तर का सुरक्षा प्रोफाइल है.
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