एक दिन के लिए भी बनाए जा सकते हैं अतिरिक्त जज- सुप्रीम कोर्ट में सरकार की दलील

पिछले साल राजस्थान हाई कोर्ट में दो अतिरिक्त जज जस्टिस वीरेन्द्र कुमार माथुर और जस्टिस राम चन्द्र झाला की नियुक्ती दो साल से कम समय के लिए हुई थी.

Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: February 12, 2018, 2:07 PM IST
एक दिन के लिए भी बनाए जा सकते हैं अतिरिक्त जज- सुप्रीम कोर्ट में सरकार की दलील
पिछले साल राजस्थान हाई कोर्ट में दो अतिरिक्त जज जस्टिस वीरेन्द्र कुमार माथुर और जस्टिस राम चन्द्र झाला की नियुक्ती दो साल से कम समय के लिए हुई थी.
Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: February 12, 2018, 2:07 PM IST
देश भर के हाईकोर्ट में इन दिनों जजों की भारी कमी है, लेकिन इसके बावजूद पिछले साल राजस्थान हाईकोर्ट में दो अतिरिक्त जज नियुक्त किए गए. ज़ाहिर है सरकार के इस फैसले पर सवाल उठने लगे. लिहाजा एक वकील ने इस नियुक्ती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी. हालांकि केंद्र सरकार ने कोर्ट में दलील देते हुए अपने इस फैसले को सही ठहराया है.

आमतौर पर हाईकोर्ट में अतिरिक्त जजों की नियुक्ती दो साल से कम के लिए नहीं होती है, लेकिन केंद्र सरकार ने अपनी दलील में कहा कि अतिरिक्त जज की नियुक्ती एक दिन के लिए भी की जा सकती है. सरकार ने हलफनामे में दलील दी कि “अनुच्छेद 224 के मुताबिक अतिरिक्त जज ज़्यादा से ज़्यादा दो साल के बनाए जा सकते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हमेशा दो साल के लिए ही नियुक्ती हो. ये उससे कम समय के लिए भी हो सकते हैं''

क्या था पूरा मामला?
पिछले साल राजस्थान हाई होर्ट में दो अतिरिक्त जज जस्टिस वीरेन्द्र कुमार माथुर और जस्टिस राम चन्द्र झाला की नियुक्ती दो साल से कम समय के लिए हुई थी. जस्टिस माथुर सिर्फ 1 साल और 3 महीने के लिए अतिरिक्त जज बने थे, जबकि जस्टिस झाला की नियुक्ती 1 साल 1 महीना और 17 दिनों के लिए हुई थी.

PIL में क्या सवाल उठाए गए ?
सुनील समदरिया नाम के एक वकील ने नियुक्ती के खिलाफ जनहित याचिका दायर की. उन्होंने इस नियुक्ती पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ये दोनों अतिरिक्त जज अपना टर्म पूरा नहीं कर सकते तो इन्हें ये ज़िम्मेदारी क्यों दी गई? सुनील समदरिया ने PIL में दलील दी कि पिछले 10 साल से हाई कोर्ट में भारी संख्या में केस फंसे हैं ऐसे में इनते कम समय के लिए दो जजों की नियुक्ती संविधान के खिलाफ हैं. समदरिया ने तुरंत इन्हें हटाने की मांग की. उन्होंने दायर याचिका में कहा था कि जस्टिस माथुर और जस्टिस झाला पहले ही रिटायर्ड हो चुके हैं ऐसे में ये दोनों इस पद के लिए फिट नहीं थे.

सरकार की दलील
Loading...

सरकार ने कहा कि दो अतिरिक्त जजों के पद की वैकेंसी साल 2014 में खाली हुई थी और उस वक्त ये दोनों सेवा में थे. इसलिए इनकी नियुक्ती पर कोई सवाल नहीं उठने चाहिए.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 12, 2018, 12:06 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...