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थरूर ने Facebook को तलब करने की घोषणा की, स्पीकर बोले-नियमों का रखें ख्याल

इस संदर्भ में स्पीकर ने स्थायी समिति के अध्यक्षों को एक पत्र लिखा है (फाइल फोटो)

इस संदर्भ में स्पीकर ने स्थायी समिति के अध्यक्षों को एक पत्र लिखा है (फाइल फोटो)

फेसबुक के मामले में चल रही बहस शांत नहीं हो रही है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Congress MP Shashi Tharoor) ने कहा था कि संसदीय पैनल सितंबर में फेसबुक (Facebook) को तलब करेगा. इस पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla)ने पत्र लिखकर कहा है कि न्यायालय के समक्ष लंबित (Sub-judice) किसी भी मामले पर चर्चा करने से बचने की सलाह दी गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 25, 2020, 10:22 PM IST
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(पायल मेहता)

नई दिल्ली. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Prakash Birla) ने सभी विभाग संबंधित स्थायी समितियों के अध्यक्षों (chairpersons of all the Department Related Standing Committees) को एक पत्र लिखा है, जिसमें अध्यक्षों को अपनी-अपनी समितियों में न्यायालय के समक्ष लंबित (Sub-judice) किसी भी मामले पर चर्चा करने से बचने की सलाह दी गई है. पत्र में बिड़ला ने समिति के अध्यक्षों (chairpersons) से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि उनकी ब्रीफिंग से प्राप्त निष्कर्षों और रिपोर्टों को गोपनीय (confidential) रखा जाए और उन विवरणों की कोई भी जानकारी मीडिया (media) में लीक न हो.

पत्र में कहा गया है कि यह विवेकाधिकार (discretion) अध्यक्ष के पास है कि किस विषय को चुना जायेगा और किस पर चर्चा कराई जायेगी. यह सारी बातें कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Congress MP Shashi Tharoor) की ओर से इस बात की सार्वजनिक रूप से घोषणा (public announcement) करने के बाद आई हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय पैनल सितंबर में फेसबुक (Facebook) को तलब करेगा.



थरूर और निशिकांत दुबे ने एक-दूसरे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा था
नियम 270 का हवाला देते हुए पत्र में कहा गया है, "एक समिति के पास व्यक्तियों, कागजात और रिकॉर्ड को तलब करने की शक्ति होगी: बशर्ते कि यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या किसी व्यक्ति का प्रमाण या दस्तावेज़ का सामने रखना समिति के उद्देश्यों के लिए प्रासंगिक है, तो यह प्रश्न अध्यक्ष को भेजा जाएगा. जिसका (अध्यक्ष का) निर्णय अंतिम होगा. इसके अलावा सरकार इस आधार पर एक दस्तावेज को पेश करने से इनकार कर सकती है कि इसका खुलासा राज्य की सुरक्षा या हित के लिए प्रतिकूल होगा."

यह थरूर और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच इस मुद्दे पर बहस हो चुकी है. दोनों ने बिरला को एक दूसरे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस सौंपा है.

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स्पीकर को लिखे एक अन्य पत्र में, दुबे ने सूचना प्रौद्योगिकी में संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए किसी अन्य सदस्य को (थरूर की जगह) चुनने के लिए नियम 258 (3) और कार्यवाही के संचालन के संबंध में नियम 283 का हवाला दिया था. इसमें कहा गया था, "ऐसा इसलिए है कि अध्यक्ष समय-समय पर एक समिति के अध्यक्ष को वे निर्देश जारी कर सकते हैं, जिन्हें वे अध्यक्ष अपनी प्रक्रिया और काम के संगठन को नियमित करने के लिए जरूरी मानते हैं."
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