Pulwama Attack: एडीडास का जैकेट, गर्लफ्रेंड और टूटे फोन से हुआ था पुलवामा हमले की साजिश का खुलासा

14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ जवानों की जान चली गई थी.

पुलवामा हमले (Pulwama Attack) की पूरी साजिश के खुलासे का श्रेय एक तस्‍वीर को जाता है, जिसमें इस हमले के मास्टरमाइंड मसूद अजहर (Masood Azhar) का भतीजा उमर फारूक एक कश्मीरी लड़की के साथ दिख रहा था.

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    नई दिल्‍ली. 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ (CRPF) के 40 जवानों की जान लेने वाले पुलवामा हमले (Pulwama Attack) को 6 महीने बीत चुके थे. इस पूरे मामले की जांच कर रहे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के जम्‍मू-कश्‍मीर के प्रमुख राकेश बलवाल को आतंकी हमले (Terrorist Attack) के साजिशकर्ताओं से जुड़ा अब तक किसी भी तरह का कोई सुराग नहीं मिला था. खुफिया एजेंसियों को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि इस हमले का मास्टरमाइंड मसूद अजहर का भतीजा उमर फारूक कश्मीर में घुस गया है या वह पुलवामा हमले के ठीक एक महीने बाद हुई मुठभेड़ में मारा गया है. तो ऐसा क्‍या हुआ कि एनआईए ने दो और दो पांच कर इस पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया.

    इस पूरे मामले में दिलचस्प बात यह रही कि उमर फारूक को दो चीजों से बेहद लगाव था. उनमें से एक था स्पोर्ट्सवियर और दूसरा था कश्मीरी महिला से प्‍यार. इस पूरे मामले के खुलासे का श्रेय एक तस्‍वीर को जाता है, जिसका जिक्र लेखक और पत्रकार राहुल पंडिता ने अपनी नई किताब में किया है. इस किताब में राहुल पंडिता ने एनआईए और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जांच अधिकारियों का साक्षात्कार का जिक्र करते हुए इस पूरी साजिश के पर्दाफाश होने की कहानी बुनी है.

    बलवाल ने पंडिता को बताता था कि वह मार्च में मारे गए दो आतंकवादियों की एक तस्वीर को काफी समय पर देख रहे थे. इस तस्‍वीर में एक आतंकी एडिडास का कपड़ा पहना हुआ अच्‍छे से तैयार दिख रहा था, जो कोई साधारण आदमी नहीं लग रहा था. पुलिस ने उन्‍हें बताया कि युवक का नाम इदरीस भाई है. बलवाल को आतंकियों के पास से दो फोन मिले थे, जिसमें एक आईफोन और एक सैमसंग एस-9 प्लस था. ये दोनों ही फोन पुलिस को बहुत क्षतिग्रस्त हालत में मिले थे और पूरी तरह से बेकार हो चुके थे.

    यह मानते हुए कि फोन में कुछ महत्वपूर्ण सुराग हो सकते हैं, बलवाल ने कश्मीर आईजी की विदाई के अवसर पर अपील की कि फोन भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) को भेजे जाएं. एक हफ्ते बाद बलवाल का सीईआरटी-इन के विशेषज्ञ का फोन आया कि सर, हमारे हाथ एक जैकपॉट लगा है. जैकपॉट ये था कि 100 जीबी डेटा में तीन लोगों की एक सेल्फी शामिल थी, जिनमें से एक को बलवाल ने उस व्यक्ति के रूप में पहचाना, जिसके बारे में उसे बताया गया था कि वह इदरीस भाई था और दूसरा पुलवामा बॉम्‍बर आदिल डार था. एक और फोटो में इदरीस भाई के फोन में एनआईए जांचकर्ताओं ने अमेजॉन से आया हुआ एक पैकेज देखा. उन्होंने कंपनी को कंसाइनमेंट नंबर भेजा, जो यह कहते हुए वापस आ गया कि यह एक वैज-उल-इस्लाम को भेजा गया था, जिसने पिछले कुछ लेनदेन में एल्यूमीनियम पाउडर, बैटरी, चार्जर, चाकू और 13 जूते मंगाए गए थे.

    किताब में ऐसी जानकारी दी गई है कि उमर को मसूद अजहर के भाई रऊफ असगर जो जैश का ऑपरेशनल हेड था, ने पुलवामा हमले के बाद उसका फोन नष्ट करने के लिए कहा था. लेकिन ऐसा करने के बजाय, उसने अपने चाचा को एक और टूटे हुए फोन की तस्वीर भेजी ताकि उसे लगे कि उसने आदेशों का पालन कर दिया गया है. पंडिता का कहना है कि अगर उमर ने वह गलती नहीं की होती तो पुलवामा हमले का खुलासा करना आसान नहीं होता. जिससे ये कभी न पता चल पाता कि पुलवामा हमले में मसूद अजहर और उसके भाइयों का हाथ है.

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    लेकिन उमर ने उसका फोन क्यों नहीं तोड़ा? इसकी वजह थी कश्मीर की रहने वाली 22 साल की इंशा जान. उमर इस फोन के जरिए इंशा से बात करता था और अक्सर उनके घर पर रहता था क्योंकि इंशा के पिता जैश की मदद करते. फोन पर उसकी फोटो भी थी, जिसमें वह पिस्टल और असॉल्ट राइफल के साथ पोज दे रही थी. इंशा को ये नई पता था कि उमर, जिसको किताब में लवर 'द लवर बॉय फ्राम बहावलपुर बताया गया है, उसके कई कश्मीरी महिलाओं के साथ संबंध थे, जिसमें उसकी खुद की चचेरी बहन भी शामिल थी.

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    फोन से जुड़ी जानकारी मिलने के बावजूद बलवाल को इदरीस भाई और उमर के बीच संबंध के बारे में जानकारी हासिल करना बाकी था. इस कनेक्‍शन को भी एक प्रेम प्रसंग ने ही तोड़ा. पिछले साल फरवरी में एनआईए ने आतंकियों को पनाह देने वाले शाकिर बशीर को पकड़ लिया था और डार को हमले की जगह पर ले गया था. पूछताछ में, बलवाल ने महसूस किया कि बशीर इसमें पैसे या रोमांच के लिए नहीं था, बल्कि वह जैश के लिए ही समर्पित था. जांच अधिकारियों ने उन्हें इदरीस भाई और इंशा जान की एक साथ तस्वीरें दिखाईं. एनआईए मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि उन्हें इस बात पर पूरा भरोसा नहीं था कि जिस व्यक्ति का वह सम्मान करते हैं, वह अपनी पत्नी के अलावा अन्य महिलाओं के साथ भी संबंध में था.

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    इन तस्‍वीरों को देखने के बाद बशीर को लगा कि उसके साथ विश्‍वासघात हुआ है. इसके बाद बशीर ने इस पूरे हमले के बारे में जांच अधिकारियों को बताना शुरू कर दिया. उसने बताया कि इदरीस भाई वास्तव में उमर फारूक है और वह मसूद अजहर का भतीजा है और IC-814 विमान के अपहर्ताओं में से एक का बेटा है. उन्होंने ही पुलवामा की योजना बनाई थी. एनआईए को इस बारे में जानकारी हासिल करना ही जरूरी था कि इदरीस भाई कोई और नहीं बल्कि जैश कमांडर उमर फारूक था, जिसने हमले की योजना बनाई थी.

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