जम्मू-कश्मीर में 600 KM लंबा राजमार्ग बनाने की योजना बना रहा प्रशासन

जम्मू-कश्मीर में 600 KM लंबा राजमार्ग बनाने की योजना बना रहा प्रशासन
जम्मू-कश्मीर में 600 किमी का हाईवे बनवाने की योजना (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा, 'हम 600 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं जो केरन, गुरेज और माछल जैसे आकर्षक पर्यटन स्थलों को जोड़ेगी.

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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) प्रशासन सीमा से लगे इलाके में 600 किलोमीटर लंबे राजमार्ग का निर्माण करने की योजना बना रही है, जो घाटी के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा. जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने यह जानकारी दी. आठ हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह राजमार्ग गुलमर्ग को लद्दाख के करगिल और द्रास से जोड़ेगा.

सुब्रमण्यम ने  कहा, 'हम 600 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं जो केरन, गुरेज और माछल जैसे आकर्षक पर्यटन स्थलों को जोड़ेगी. यह रोड घाटी के ऐसे पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा, जहां पर्यटक नहीं पहुंच पाते हैं. इससे पर्यटकों को वहां पहुंचने में मदद मिलेगी.' मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क पर 12-13 प्रमुख सुरंग होगीं और इससे यह अग्रिम स्थलों तक पहुंच बनाने में आसानी होगी. उन्होंने कहा, 'यह सभी पर्यटन स्थल गुलमर्ग की तरह पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बनेंगे.'

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में हो रहा बदलाव- विदेश मंत्री



बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने केंद्र द्वारा जम्मू-कश्मीर (Jammu kashmir) के विशेष दर्जे को समाप्त करने के निर्णय की पहली वर्षगांठ के अवसर पर बुधवार को कहा था कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बदलाव का दौर जारी है. जयशंकर ने ट्वीट करके क्षेत्र में हो रहे बदलाव को रेखांकित किया. उन्होंने इस बदलाव के तहत प्रगतिशील कानून लागू किए जाने, सामाजिक न्याय सुनिश्चित किए जाने, कमजोर वर्ग के लोगों का सशक्तिकरण एवं समर्थन तथा विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाये जाने का जिक्र किया.
विदेश मंत्री ने शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने तथा महिला अधिकारों को सुनिश्चित करने सहित अन्य कदमों के बारे में भी बताया . उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बदलाव का दौर जारी है.' गौरतलब है कि पिछले वर्ष पांच अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का निर्णय लिया था . इसके बाद से पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने का विफल प्रयास कर रहा है .
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