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33 हजार सैंपल में से 11 हजार फेल, जनता को मिला जहरीला दूध और सरकार को जुर्माने का पैसा

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: March 9, 2020, 1:50 PM IST
33 हजार सैंपल में से 11 हजार फेल, जनता को मिला जहरीला दूध और सरकार को जुर्माने का पैसा
मिलावटी दूध का कारोबार बढ़ रहा है

पिछले तीन साल में 11 हजार से अधिक सैंपल फेल, करीब 2 हजार लोगों पर मिलावट का दोष साबित हुआ, राज्य सरकारों ने जनता को ‘जहर’ पिलाने वालों को सिर्फ जुर्माना लगाकर छोड़ दिया

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नई  दिल्ली. क्या आपको पता है कि जो दूध आप स्वस्थ रहने के लिए पी रहे हैं दरअसल वह आपकी सेहत को खराब कर सकता है. पिछले तीन साल में करीब 33 हजार सैंपल लिए गए जिनमें 11 हजार से ज्यादा या तो फेल हो गए या फिर गलत ब्रांड के पाए गए थे. ज्यादातर राज्यों में मिलावटी दूध (Adulterated Milk) धड़ल्ले से बिक रहा है. होली और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान इसमें और इससे बने प्रोडक्ट्स में मिलावट और बढ़ जाती है. ऐसे में आप इसे लेकर सावधानी बरतें. राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार को मिलावटी दूध को लेकर जो रिपोर्ट भेजी है वो चौंकाने वाली है. करीब 2 हजार लोगों पर मिलावट का दोष साबित हुआ लेकिन जनता को ‘जहर’ पिलाने वाले इन गुनहगारों को सिर्फ जुर्माना लगाकर छोड़ने की नीति से मिलावट पर अब तक लगाम नहीं लग सकी है.

जनता के खानपान को लेकर लापरवाही का यह हाल तब है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत के लिए एक एडवायजरी जारी कर कहा है कि अगर दूध और दूध से बने प्रोडक्ट में मिलावट पर लगाम नहीं लगाई गई तो साल 2025 तक देश की करीब 87 फीसदी आबादी कैंसर की चपेट में हो सकती है.

फिजिशियन डॉ. सुरेंद्र दत्ता कहते हैं कि कारोबारी पैसे के लिए यूरिया, डिटरजेंट, रिफाइन मिलाकर दूध बना रहे हैं, जिससे पेट की बीमारियों, किडनी, लीवर खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. कैंसर होने की संभावना बढ़ती है. अगर आप भैंस या गाय का सामने निकाला गया दूध नहीं पी रहे हैं तो मत पीजिए यही आपकी सेहत के लिए बेहतर होगा. मिलावटी दूध का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव बच्चों पर देखने को मिल रहा है.



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यूरिया, डिटरजेंट और रिफाइन आदि से नकली दूध तैयार किया जा रहा है




डॉ. दत्ता कहते हैं कि डब्ल्यूएचओ की चेतावनी के बाद भी भारत में मिलावटखोरों को सजा नहीं दी जाती. क्या जुर्माना लगाने से किसी की खराब हुई सेहत ठीक हो सकती है? यदि नहीं तो जुर्माना लगाकर मिलावटखोरों को छोड़ने की नीति कब बंद होगी? हमारी सरकारों की प्राथमिकता में मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान कभी था ही नहीं. न तो समाज में इसके प्रति जागरूकता है.

साल दर साल बढ़ता मिलावट का खेल

(यह आंकड़ा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने लोकसभा में दिया है)

 

>>2016-17: राज्यों ने 7717 सैंपल लिए, जिसमें से 2307 मिलावटी और गलत ब्रांड के पाए गए. 540 पर दोष साबित हुआ था. सरकार ने 2.17 करोड़ रुपये जुर्माना लगाकर अपना काम पूरा समझ लिया.

>>2017-18: राज्यों ने 11,998 सैंपल लिए, इसमें 4150 में मिलावट मिली और गलत ब्रांड के पाए गए. 1006 मामलों पर दोष साबित हुआ. सरकार ने 3.04 करोड़ रुपये जुर्माना लगा दिया.

>>2018-19: इस साल 13,067 सैंपल लिए गए. जिसमें से 4637 मिलावटी और गलत ब्रांड के पाए गए. 409 पर दोष साबित हुआ. जनता ने मिलावटी दूध हजम किया और सरकार ने 2.99 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला.

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First published: March 9, 2020, 12:07 PM IST
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