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भारत में फंसा अफगानिस्तान का मार्शल आर्ट फाइटर, तालिबान के राज में नहीं लौटना चाहता वापस

अफगानिस्तान के युवा मिक्स्ड मार्शल आर्ट फाइटर अहमद नजीर.

अफगानिस्तान के युवा मिक्स्ड मार्शल आर्ट फाइटर अहमद नजीर.

Taliban in Afghanistan: अफगानिस्तान के बिगड़े हालात और तालिबान के कब्जे के बाद सबसे ज़्यादा नुकसान वहां के प्रतिभाशाली युवा पीढ़ी को उठाना पड़ रहा है.

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नई दिल्ली. अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां के खराब हालात और हवाई सेवा बाधित होने की वजह से कई लोग अलग-अलग देशों में फंस गए है. अफगानिस्तान के युवा मिक्स्ड मार्शल आर्ट फाइटर (MIXED MARTIAL ART) अहमद नज़ीर भी उन्हीं में से एक हैं. जो पिछले महीने अपनी बाउट खेलने भारत आये थे, लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद अब वापस नहीं जाना चाहते.

अहमद नज़ीर ने न्यूज़18इंडिया से बातचीत में बताया कि ‘हम एक महीने पहले भारत आये थे. भारत के खिलाफ हमारी फाइट थी. हमने इंडिया के नंबर एक फाइटर को हराकर भारत की बेल्ट जीती. मेरे हाथ में भी फ्रेक्चर आ गया था. हमारी फाइट खत्म हो गई, जिसके बाद हम वापस अफगानिस्तान जाना चाहते थे, लेकिन फ्लाइट बंद होने और अफगानिस्तान के हालात खराब होने की वजह से भारत में ही फंस गए.’

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नज़ीर ने आगे बताया कि ‘मेरा परिवार अफगानिस्तान में ही हैं. मेरा भाई, मां और दो बहनें यहां भारत में हैं. मेरा बड़ा भाई और पिता अफगानिस्तान में फंस गए हैं. तालिबान के कब्जे के बाद अब हम अफगानिस्तान वापस नहीं जाना चाहते. हम यूरोप, ऑस्ट्रेलिया या अमेरिका जाना चाहते हैं. जहां MMA फाइटर को बहुत सपोर्ट मिलता है.’

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अहमद नज़ीर और उनके भाई दोनों MMA फाइटर हैं. ये दोनों 18 जुलाई को भारत आये थे. अपनी बाउट खेलने के बाद इन्हें वापस अफगानिस्तान जाना था, लेकिन 15 अगस्त को तालिबान के कब्जे बाद ये भारत में फंस गए. नज़ीर आज यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फ़ॉर रिफ्यूजी(UNHCR) के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन में शामिल हुए जहां दो दिनों से अफगानी शरणार्थी प्रदर्शन कर रहे हैं.

अफगानिस्तान के बिगड़े हालात और तालिबान के कब्जे के बाद सबसे ज़्यादा नुकसान वहां के प्रतिभाशाली युवा पीढ़ी को उठाना पड़ रहा है. जो या तो वहां से निकलना चाहते हैं या तालिबान के रहते वहां लौटना ही नहीं चाहते. अहमद नज़ीर भी उन्हीं में से एक हैं. हालांकि तालिबान दावा कर रहा है कि वो महिलाओं, युवाओं और अफगानी जनता के अधिकारों की रक्षा करेगा, लेकिन वहां लोग तालिबान पर भरोसा करने के लिए तैयार नहीं हैं.

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