अफगानिस्तान में शांति के लिए आतंकियों के पनाहगाह को तुरंत खत्म करना होगा, भारत ने UNSC में कहा

एस जयशंकर ने कहा कि इस मुल्क में टिकाऊ शांति के लिए देश के अंदर और आसपास के क्षेत्र में शांति की जरूरत है. (ANI Twitter/22 June 2021)

UNSC Meeting Afghanistan Peace: भारत, अफगानिस्तान की शांति एवं स्थिरता में महत्वपूर्ण साझेदार है. भारत ने वहां विकास कार्यो में करीब 3 अरब डॉलर निवेश किया है.

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    संयुक्त राष्ट्र. भारत ने मंगलवार को कहा कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए आतंकवादियों की सुरक्षित पनाहगाह को तत्काल नष्ट करना चाहिए और उनकी आपूर्ति श्रृंखला बाधित की जानी चाहिए. साथ ही उसने आतंकवाद के सभी रूपों तथा सीमा पार आतंकवाद समेत उसकी सभी अभिव्यक्तियों के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं किये जाने की नीति अपनाने का आह्वान किया.


    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा के दौरान कहा कि हिंसा में तत्काल कमी और असैन्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत अफगानिस्तान में स्थायी और व्यापक संघर्ष विराम चाहता है. उन्होंने पाकिस्तान के एक स्पष्ट संदर्भ में कहा, ‘अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए आतंकियों के सुरक्षित पनाहगाह को तत्काल नष्ट करना चाहिए और उनकी आपूर्ति श्रृंखला बाधित की जानी चाहिए. आतंकवाद के सभी रूपों तथा सीमा पार आतंकवाद समेत उसकी सभी अभिव्यक्तियों के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं किए जाने की नीति की आवश्यकता है.’


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    उन्होंने कहा, ‘यह सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का उपयोग आतंकवादी समूहों द्वारा किसी अन्य देश को धमकाने या हमला करने के लिए नहीं किया जाए. आतंकवादी संगठनों को साजो-सामान और आर्थिक मदद पहुंचाने वालों को निश्चित रूप से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.’ उन्होंने कहा कि अंतर-अफगान वार्ता से अफगानिस्तान में हिंसा में कोई कमी नहीं आई है.


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    जयशंकर ने कहा, ‘इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से, यह परिषद हिंसा में तत्काल कमी सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी और व्यापक संघर्ष विराम और नागरिकों के जीवन की सुरक्षा के लिए दबाव डाले.’ उन्होंने कहा कि भारत अफगान सरकार और तालिबान के बीच वार्ता में तेजी लाने के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता रहा है.


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    जयशंकर ने कहा कि यदि शांति प्रक्रिया को सफल होना है, तो यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वार्ता करने वाले पक्ष अच्छी भावना के साथ इसमें शामिल रहें और इसका सैन्य समाधान खोजने का रास्ता बनाए और राजनीतिक समाधान तक पहुंचने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हों. उन्होंने कहा, ‘भारत वास्तविक राजनीतिक समाधान और अफगानिस्तान में एक व्यापक एवं स्थायी संघर्ष विराम की तरफ बढ़ाए गए किसी भी कदम का स्वागत करता है. हम संयुक्त राष्ट्र के लिए अग्रणी भूमिका का समर्थन करते हैं, क्योंकि इससे स्थायी और टिकाऊ समाधान निकालने में मदद मिलेगी.’ उन्होंने कहा, ‘मैं एक समावेशी, अफगान-नेतृत्व वाली, अफगान-स्वामित्व वाली और अफगान-नियंत्रित शांति प्रक्रिया के लिए अपना समर्थन दोहराना चाहता हूं.’


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    गौरतलब है कि तालिबान और अफगानिस्तान 19 वर्षो के गृह युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत कर रहे हैं जिसमें हजारों की संख्या में लोग मारे गए. भारत, अफगानिस्तान की शांति एवं स्थिरता में महतवपूर्ण साझेदार है. भारत ने वहां विकास कार्यो में करीब 3 अरब डॉलर निवेश किया है. भारत अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता का अहम हितधारक है तथा राष्ट्रीय शांति व ऐसी सुलह प्रक्रिया का समर्थन करता है, जो अफगान नेतृत्व वाली, अफगानों के स्वामित्व वाली और अफगान नियंत्रित हो.




    वहीं, 11 सितंबर तक करीब 2300 से 3500 अमेरिकी सैनिक और सहयोगी नाटो के 7000 सैनिक अफगानिस्तान से वापस जाने की तैयारी कर रहे हैं. अमेरिका और तालिबान ने युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में शांति और अमेरिकी सैनिकों की वापसी का रास्ता साफ करने के लिए कई दौर की बातचीत के बाद 29 फरवरी 2020 में दोहा में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किये थे.


    (इनपुट भाषा से भी)

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