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32 साल बाद बीजेपी पानीपत में खिला सकी थी कमल, रहा है ‘पंजे’ का कब्जा

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Updated: October 18, 2019, 6:13 PM IST
32 साल बाद बीजेपी पानीपत में खिला सकी थी कमल, रहा है ‘पंजे’ का कब्जा
तीन दशक के बाद बीजेपी पानीपत की लड़ाई जीतने में कामयाब हो सकी थी

तीन दशक के बाद बीजेपी पानीपत की लड़ाई जीतने में कामयाब हो सकी थी. बीजपी की रोहिता रेवड़ी ने ये सीट कांग्रेस के वीरेंद्र कुमार शाह को हराकर जीती थी.

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  • Last Updated: October 18, 2019, 6:13 PM IST
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पानीपत. हरियाणा के करनाल लोकसभा क्षेत्र तहत पानीपत जिले की पानीपत सिटी की विधानसभा सीट आती है. 2014 में तीन दशक के बाद बीजेपी पानीपत की लड़ाई जीतने में कामयाब हो सकी थी. बीजपी की रोहिता रेवड़ी ने ये सीट कांग्रेस के वीरेंद्र कुमार शाह को हराकर जीती थी. पानीपत सिटी में 32 साल बाद कमल खिला था. देखना यह है कि क्या इस बार भी बीजेपी यहां भगवा फहरा पाती है.


पानीपत में 1952 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत से खाता खोला था. कांग्रेस के कृष्ण गोपाल दत्त ने जनसंघ के कुंदनलाल को हराया था. लेकिन 10 साल बाद राजनीतिक हालात बदले और जनसंघ ने पानीपत की सीट पर वापसी की. जनसंघ के फतेह चंद विधायक बने. इसके बाद फतेह चंद 1967 और 1968 में हुए विधानसभा चुनाव में जीते. लेकिन लगातार चौथी जीत पर कांग्रेस ने विराम लगाया और कांग्रेस के हुकूमत रे शाह ने फतेहचंद को 1972 में परास्त किया. लेकिन इसके बाद फिर फतेह चंद ने 1977 में वापसी की और फिर 1982 का भी विधानसभा चुनाव जीते. दोनों ही बार उन्होंने कांग्रेस के कस्तूरी लाल आहूजा को हराया. 

पानीपत की सीट से दो बार कांग्रेस के टिकट पर हारने के बाद कस्तूरी लाल आहूजा 1987 में निर्दलीय खड़े हुए और लगातार तीसरी बार कांग्रेस के हुकुमत राय शाह के बेटे बलबीर पाल शाह से चुनाव हार गए. इस जीत ने बलबीर पाल शाह के राजनीतिक कद को बढ़ा दिया. क्योंकि वो चौधरी देवीलाल की आंधी में चुनाव जीते. ईनाम स्वरूप उन्हें हरियाणा प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया. 

लेकिन 1996 में बलबीर पाल शाह निर्दलीय उम्मीदवार ओम प्रकाश जैन से चुनाव हार गए. खास बात ये है कि पांच साल पहले बलबीर पाल ने साल 1991 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ओम प्रकाश जैन को हराया था. बलबीर पाल इसके बाद 2000, 2005 और 2009 में पानीपत सिटी से विधायक रहे. लेकिन साल 2014 में उनकी जगह उनके छोटे भाई वीरेंद्र बुल्ले शाह को टिकट दिया गया जो कि रोहिता रेवड़ी से चुनाव हार गए.

साल 2013 में पानीपत से पांच बार विधायक रहे बलबीर पाल शाह ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. उनके राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के साथ मतभेद की चर्चाएं सुर्खियां बन रही थीं.

दिल्ली से 90 किमी दूरी पर मौजूद पानीपत हरियाणा का ऐतिहासिक शहर है. 1526, 1556 और 1761 में यहां पानीपत की पहली, दूसरी और तीसर लड़ाई हो चुकी है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक महाभारत काल में पांडवों ने पांडुप्रसथ नाम से पानीपत शहर की स्थापना की थी. 
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First published: October 18, 2019, 6:07 PM IST
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