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आंध्र की तीन राजधानियों का फॉर्मूला अटकने से भड़के सीएम जगनमोहन रेड्डी, विधान परिषद खत्म करने पर लगाई मुहर

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Updated: January 27, 2020, 11:44 AM IST
आंध्र की तीन राजधानियों का फॉर्मूला अटकने से भड़के सीएम जगनमोहन रेड्डी, विधान परिषद खत्म करने पर लगाई मुहर
मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी

आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियों का फॉर्मूला विधान परिषद में अटकने के बाद सीएम जगनमोहन ने पिछले हफ्ते विधानसभा में कहा था कि विधान परिषद (Legislative Council) होना अनिवार्य नहीं है. यह हमारा ही बनाया हुआ है और केवल हमारी सुविधा के लिए है.

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  • Last Updated: January 27, 2020, 11:44 AM IST
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अमरावती. आंध्र प्रदेश में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी (Chief Minister Y S JaganMohan Reddy ) की कैबिनेट ने विधान परिषद को खत्म करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. सोमवार को कैबिनेट की बैठक में ये अहम फैसला लिया गया. आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियों का फॉर्मूला विधान परिषद में अटकने के बाद ये फैसला लिया गया है.

क्या है झगड़े की जड़?
बता दें कि तीन राजधानी के फॉर्मूले को लेकर पिछले कुछ समय से सीएम जगनमोहन रेड्डी और विपक्ष के नेता एन चंद्रबाबू नायडू के बीच खींचतान चल रही थी. नायडू चाहते थे कि अमरावती में एक बड़ी सी राजधानी बने. लेकिन जगनमोहन का तर्क है कि एक शहर में विकास के नाम पर इतना पैसा लगाना सही फैसला नहीं होगा. वो चाहते हैं कि तीन राजधानी बनाकर तीन अलग-अलग शहरों में विकास के काम किए जाएं.

इस तरह लिया फैसला

पिछले साल मई में सत्ता में आते ही YSR कांग्रेस ने ऐलान किया था कि राज्य की राजधानी सिर्फ अमरावती नहीं होगी बल्कि तीन अलग-अलग शहरों को राजधानी बनाया जाएगा. ऐसा करने के लिए पिछले हफ्ते विधानसभा में दो अलग-अलग बिल लाए गए. एक बिल तीन राजधानी बनाने के लिए जबकि दूसरा अमरावती को सिर्फ राजधानी बनाने वाले कानून के हटाने के लिए. विधानसभा में ये बिल तो पास हो गया लेकिन ऊपरी सदन में ये अटक गया. बाद में इस बिल को सलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया. लेकिन नाराज रेड्डी ने विधान परिषद को ही खत्म करने का फैसला ले लिया.

रेड्डी का बड़ा फैसला
पिछले हफ्ते रेड्डी ने इस बात के संकेत दिए थे कि अब उनके पास सिर्फ एक ही रास्ता है कि वो विधान परिषद को ही खत्म कर दें. बता दें कि तेलंगाना के साथ-साथ सिर्फ महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में विधान परिषद है. अब रेड्डी के इस पैसले के बाद तेलंगाना में भी ये समाप्त हो जाएगा.क्या है रेड्डी का तर्क
सीएम जगनमोहन ने पिछले हफ्ते विधानसभा में कहा था कि विधान परिषद (Legislative Council) होना अनिवार्य नहीं है. यह हमारा ही बनाया हुआ है और केवल हमारी सुविधा के लिए है. उन्होंने ये भी कहा था कि विधान परिषद राज्य सरकार पर आर्थिक रूप से बोझ भी बन गई है. उन्होंने कहा कि हम विधान परिषद पर हर साल 60 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं. इसकी क्या जरूरत है?

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First published: January 27, 2020, 11:01 AM IST
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