असम के बाद महाराष्ट्र में भी NRC की तैयारी में सरकार, डिटेंशन सेंटर के लिए मांगी जमीन: रिपोर्ट

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Updated: September 9, 2019, 9:55 AM IST
असम के बाद महाराष्ट्र में भी NRC की तैयारी में सरकार, डिटेंशन सेंटर के लिए मांगी जमीन: रिपोर्ट
गृह मंत्रालय के आदेश पर एनआरसी विवादों के निपटारे के लिए 400 ट्रिब्युनल का गठन किया गया है.

महाराष्ट्र सरकार के गृह मंत्रालय ने नवी मुंबई प्लानिंग अथॉरिटी से हिरासत केंद्र बनाने के लिए जमीन देने को कहा है. इससे ये अनुमान लगाया जा रहा है कि असम के बाद अब सरकार महाराष्ट्र में भी ऐसे लोगों का पता लगाएगी और उन्हें हिरासत केंद्र में रखा जाएगा.

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मुंबई. असम (Assam) में 31 अगस्त को जारी हुई नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़ंस (National Register of Citizens) यानी फाइनल एनआरसी के बाद अब खबर है कि महाराष्ट्र सरकार भा राज्य में असल नागरिकों की पहचान में जुटी है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य का गृह मंत्रालय अवैध नागरिकों के लिए हिरासत केंद्र बनाने की तैयारी में है.

NDTV की खबर के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार के गृह मंत्रालय ने नवी मुंबई प्लानिंग अथॉरिटी से हिरासत केंद्र बनाने के लिए जमीन देने को कहा है. सरकार के इस कदम से अनुमान लगाया जा रहा है कि असम के बाद अब सरकार महाराष्ट्र में भी ऐसे लोगों का पता लगाएगी और उन्हें हिरासत केंद्र में रखा जाएगा.

खबर के मुताबिक, महाराष्ट्र सिटी एंड इंडस्ट्री डेवलपमेंट कॉरपोरेशन विभाग को महाराष्ट्र सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से एक चिट्ठी लिखी गई है. इसमें नेरुल में दो से तीन एकड़ जमीन देने की बात कही गई है. नेरुल मुंबई से केवल 20 किलोमीटर की दूरी पर है.


NRC के लिए कितने लोगों ने किया था अप्लाई?

बता दें कि असम की एनआरसी लिस्ट में शामिल होने के लिए 3,30,27,661 लोगों ने अप्लाई किया था. इनमें से 3,11,21,004 लोगों को शामिल किया गया है, जबकि 19,06,657 लोगों का नाम इसमें नहीं आया है. इनमें वो लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने इसके लिए दावा पेश नहीं किया था.

19 लाख लोगों के पास क्या है ऑप्शन?
जिन 19 लाख से ज्यादा लोगों को एनआरसी से बाहर किया गया है उनके लिए ये चिंता की बात तो है, लेकिन यह आखिरी फैसला नहीं है. इन लोगों के पास इसके खिलाफ अपील करने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं. ऐसे लोग सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट से लेकर फॉरेनर्स ट्रिब्युनल में एनआरसी में जगह न मिलने को लेकर अपील कर सकते हैं. इतना ही नहीं सभी कानूनी विकल्प आज़माने की प्रक्रिया में सरकार उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी.
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असम की बीजेपी सरकार ने साफ कहा है कि जिन लोगों का नाम एनआरसी की लिस्ट में है, उन्हें तबतक बाहर नहीं किया जाएगा जबतक कि विदेशी ट्रिब्यूनल उन्हें अवैध आप्रवासी घोषित नहीं कर देते हैं. असम के सीएम सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि जिनका नाम लिस्ट में नहीं है, राज्य सरकार ऐसे लोगों को सभी जरूरी मदद मुहैया कराएगी.


सरकार ने बनाई 400 ट्रिब्यूनल
गृह मंत्रालय के आदेश पर एनआरसी विवादों के निपटारे के लिए 400 ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है. जिन लोगों का एनआरसी लिस्ट में नाम नहीं है वह शेड्यूल ऑफ सिटिज़नशिप के सेक्शन 8 के मुताबिक अपील कर सकेंगे. इसकी समयसीमा पहले 60 दिन की थी, जिसे बढ़ाकर 120 दिन कर दिया गया है. अब इसकी आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2019 हो गई है यानि लिस्ट में नाम न होने की स्थिति में 31 दिसंबर से पहले आवेदन करना होगा.

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First published: September 9, 2019, 8:30 AM IST
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