असम के बाद बंगाल में भी कांग्रेस को सताने लगी चिंता, अपने प्रत्याशियों को बचाने की बना रही प्लानिंग

असम में टूट से बचाने के लिए कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को जयपुर के फेयर माउंट होटल में ठहरा दिया है. (फाइल फोटो :PTI)

असम में टूट से बचाने के लिए कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को जयपुर के फेयर माउंट होटल में ठहरा दिया है. (फाइल फोटो :PTI)

Assembly Elections: असम वाला प्रयोग पश्चिम बंगाल में भी दोहराना कांग्रेस (Congress) के लिए इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि बंगाल में जिस तरह से बीजेपी मजबूती से ममता बनर्जी के खिलाफ लड़ रही है. अगर दोनों में से किसी को बहुमत ना मिला तो कांग्रेस के जीतने वाले प्रत्याशियों के टूट का खतरा बढ़ जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 10, 2021, 1:30 PM IST
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नई दिल्ली. कहते हैं दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है. इन दिनों कांग्रेस की हालत भी कुछ वैसी ही है. कई राज्यों में बनी बनाई सरकार गिर जाने या फिर पार्टी के विधायकों के टूट कर दूसरे दल की सरकार बना देने के धक्के से बचने के लिए कांग्रेस इस बार काफी पहले ही अलर्ट मोड पर आ गई है. पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे भले ही 2 मई को आने वाले हैं, लेकिन कांग्रेस ने तैयारी अभी से शुरू कर दी है. अपने संभावित विधायकों के टूटने का खतरा कांग्रेस के ऊपर कुछ इस तरह हावी है कि उसने नतीजा आने से पहले ही अपने जीत सकने वाले उम्मीदवारों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया है. शुरुआत भले ही असम (Assam) से की गई हो, लेकिन कांग्रेस के सूत्र कहते हैं कि अन्य राज्यों में भी यहीं प्रयोग दोहराया जा सकता है.

गौरतलब है कि 5 राज्यों में कांग्रेस को असम और केरल में सरकार बनने की संभावना दिख रही है. पार्टी सूत्र मानते हैं कि तमिलनाडु में भी गठबंधन की सरकार बन सकती है जिसे डीएमके लीड कर रही है. अंदरूनी खींचतान और G23 के नेताओं से मिल रही चुनौती के मद्देनजर कांग्रेस अपने अस्तित्व के लिए 5 में से कम से कम 2 राज्यों में सरकार बनाना जरूरी मानती है. यही वजह है की पार्टी को जहां जीत और सरकार बनने की उम्मीद दिख रही है वहां जीत सकने वाले विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश अभी से शुरू कर दी है.

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असम में टूट से बचाने के लिए कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को जयपुर के फेयर माउंट होटल में ठहरा दिया है. केरल में मजबूत संगठन के चलते कांग्रेस को ऐसा कोई डर नजर नहीं आ रहा है और कांग्रेस सूत्र कहते हैं की बीजेपी वहां सरकार बनाने की दौड़ में नहीं है इसलिए खतरा कम है. तमिलनाडु में भी केरल जैसे ही हालात हैं. पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल के लिए पार्टी ने अभी से विचार करना शुरू कर दिया है.
असम वाला प्रयोग पश्चिम बंगाल में भी दोहराना कांग्रेस के लिए इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बंगाल में जिस तरह से बीजेपी मजबूती से ममता से लड़ रही है अगर दोनों में से किसी को बहुमत ना मिला तो कांग्रेस के जीतने वाले प्रत्याशियों के टूट का खतरा बढ़ जाएगा.

कांग्रेस मीडिया विभाग के सचिव प्रणव झा कहते हैं '2018 के बाद बीजेपी ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की जोड़ी के प्रचार के बावजूद सिर्फ दो राज्यों में ही अपने दम पर सरकार बना पाई, बाकी सभी जगह जनमत का अपहरण करके, तोड़फोड़ करके बीजेपी ने न सिर्फ कांग्रेस की चुनी हुई सरकारों को गिराया है बल्कि तमाम विधायकों को अपने पाले में जबरदस्ती लाकर सरकार बनाई है.'





क्या पश्चिम बंगाल में भी असम जैसे प्रयोग किया जाएगा? के सवाल पर प्रणव झा कहते हैं कि हम परिस्थिति के मुताबिक रणनीति बनाते हैं और जरूरत पड़ी तो पश्चिम बंगाल के लिए भी ऐसी ही रणनीति बनाई जाएगी'. मतलब साफ है कि कई राज्यों में सरकार गवां चुकी कांग्रेस इस बार पहले से ही मुकम्मल तैयारी करना चाहती है ताकि इतिहास के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही पार्टी और ज्यादा कमजोर होकर अपना अस्तित्व ही न गंवा बैठे.
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