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  • भारत-पाक सीमा पर आतंक मचाने के बाद वापस राजस्थान की ओर बढ़ रहा टिड्डियों का झुंड

भारत-पाक सीमा पर आतंक मचाने के बाद वापस राजस्थान की ओर बढ़ रहा टिड्डियों का झुंड

अफ्रीकी देशों में बड़ी संख्या में टिड्डियों का प्रजनन हो रहा है. इन दलों के राजस्थान पहुंचने की आशंका है

अफ्रीकी देशों में बड़ी संख्या में टिड्डियों का प्रजनन हो रहा है. इन दलों के राजस्थान पहुंचने की आशंका है

प्रवासी कीट (Migratory Insect), जो रेगिस्तान में अंडे देते हैं और लाखों में पलायन करते हैं, उनके जून के अंत तक उत्तर-पश्चिम और उत्तर भारत (North India) के ऊपर उड़ान भरने की उम्मीद है.

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    (निखिल घनेकर)

    नई दिल्ली. मई में कई उत्तरी राज्यों में आखिरी बार देखे गए रेगिस्तानी टिड्डों (Desert Locust) के झुंडों ने एक बार फिर राजस्थान (Rajasthan) से हरियाणा (Haryana) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की ओर बढ़ना शुरू कर दिया है. शनिवार को, हरियाणा के गुरुग्राम (Gurugram), फरीदाबाद, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिलों में टिड्डों का एक बड़ा झुंड 1-3 किलोमीटर लंबी उड़ान भरते दिखाई दिया. प्रवासी कीट (Migratory Insect), जो रेगिस्तान में अंडे देते हैं और लाखों में पलायन करते हैं, उनके जून के अंत तक उत्तर-पश्चिम और उत्तर भारत (North India) के ऊपर उड़ान भरने की उम्मीद है.

    फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (Food and Agriculture Organization- FAO) के वरिष्ठ टिड्डी पूर्वानुमान अधिकारी कीथ क्रेसमैन ने कहा कि मई में भारत के सामान्य प्रवासन चक्र (waves of migration) से पहले ही टिड्डियां भारत आ गई थी. उन्होंने आगाह किया था कि जुलाई में इन टिड्डियों के प्रवास की और अधिक लहरें देखी जाएंगी क्योंकि पूर्वी अफ्रीका (East Africa) से आने वाले इन टिड्डी दलों के उत्तर की ओर बढ़ने और अरब सागर (Arab Sea) पार कर सिंध, राजस्थान और गुजरात पहुंचने की उम्मीद थी.

    राजस्थान में पिछले लगातार तीन हफ्तों से आ रही हैं टिड्डियां
    राजस्थान में इस साल दिसंबर और जनवरी में अच्छी बारिश होने के चलते रेगिस्तानी टिड्डों को अच्छी तरह से प्रजनन का अवसर मिला.

    टिड्डी चेतावनी संगठन के उप प्रमुख और प्लांट प्रोटेक्शन, क्वारंटाइन एंड स्टोरेज के डायरेक्टरेट केएल गुर्जर का कहना है “राजस्थान में, पिछले तीन हफ्तों से लगातार टिड्डियां आ रही हैं. उनमें से कई ईरान और पाकिस्तान से आ रही हैं. उन्हें मारना मुश्किल हो गया है क्योंकि वे लंबे समय तक एक ही स्थान पर नहीं रुक रही हैं.

    'यदि मानसून तक जीवित रहीं टिड्डियां तो मिलेगा प्रजनन का एक और मौका'
    LWO कार्यालय को चिंता थी कि यदि मानसून तक टिड्डियां जीवित रहती हैं, तो उन्हें प्रजनन का एक और मौका मिलेगा.

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    पिछले सप्ताह, FAO ने टिड्डियों पर एक स्थिति अपडेट जारी किया था और कहा था कि दक्षिणी ईरान और दक्षिण-पश्चिम पाकिस्तान में उनका प्रजनन समाप्त हो गया है और भारत-पाकिस्तान सीमा पर ग्रीष्मकालीन प्रजनन क्षेत्रों में चलाए जा रहे नियंत्रण अभियान और पलायन के चलते उनकी संख्या घट रही है. इसमें उन टिड्डियों को लेकर चेतावनी दी गई थी जो राजस्थान से पूर्व की ओर अन्य उत्तरी राज्यों में जाएंगे और मानसून की बारिश के साथ राजस्थान में अंडे देने के लिए वापस आ जाएंगे.

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