अकाली दल के अलग होने से हुए नुकसान को यूं अवसर में बदल सकती है बीजेपी

पीएम मोदी के साथ प्रकाश सिंहल बादल (PTI)
पीएम मोदी के साथ प्रकाश सिंहल बादल (PTI)

बीजेपी और उसके सबसे पुराने साथियों में शामिल शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच अटूट रिश्ता आखिर टूट गया. इसकी वजह बना किसानों का मुद्दा (Agriculture Bill 2020). अकाली दल का अलग होना भाजपा के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि उसके सबसे विश्वस्त सहयोगियों में शामिल दो प्रमुख दल शिवसेना और अकाली दल अलग हो चुके हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 28, 2020, 9:00 AM IST
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नई दिल्ली/चंड़ीगढ़. किसान बिल (Agriculture Bill 2020) को लेकर नाराज चल रही शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने बीजेपी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ अपना 24 साल पुराना नाता तोड़ लिया है. शिरोमणि अकाली दल के इस फैसले के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के लिए पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में अपनी छवि को मैनेज करना सबसे बड़ी चुनौती होगी. अकाली दल के अलग होने के बाद अगर बीजेपी कृषि प्रधान राज्यों में प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांग पर गौर करके बातचीत से हालात को सुधार लेती है, तो अकाली दल के अलग होने से पड़ने वाले असर को बीजेपी काफी हद तक कंट्रोल कर सकती है.

शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के बीच उस समय नाराजगी खुलकर सामने आ गई थी, जब किसान बिल (Farms Bill 2020) के विरोध में अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने पहले ही केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के बीच रिश्ते काफी सौहार्दपूर्ण थे. दोनों पार्टियों ने मिलकर तीन बार पंजाब में सरकार बनाई. हर बार पांच-पांच साल के कार्यकाल को पूरा किया. पंजाब में SAD-BJP का गठबंधन 1997 में ही हो गया था और करीब 22 साल पहले अकाली दल एनडीए का हिस्सा बना.













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