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    Corona: स्कूल तो खुले लेकिन ज़िम्मेदारी पूरी घर वालों की होगी, जारी हुआ यह लैटर

    वही छात्र स्कूल आ सकेंगे, जिनके अभिभावक लिखित सहमति देंगे. (फाइल फोटो)
    वही छात्र स्कूल आ सकेंगे, जिनके अभिभावक लिखित सहमति देंगे. (फाइल फोटो)

    कोरोना (Corona) महामारी के बीच केंद्र सरकार ने एक एसओपी जारी करते हुए स्कूल खोले (School Open) जाने की अनुमति दे दी है. लेकिन स्कूल खोलें या नहीं यह विकल्प भी स्कूल मैनेजरों को दिया गया है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 20, 2020, 12:46 PM IST
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    नई दिल्ली. क्लास 9 से 12वीं तक के स्कूल खोलने (School Open) की इजाज़त केंद्र सरकार (Central Government) ने दे दी है. कोरोना (Corona) के कारण हुए लॉकडाउन के 6 महीने से भी ज़्यादा वक्त के बाद बच्चों ने स्कूल जाना शुरू कर दिया है. 2-2 घंटे की कई पालियों में क्लास लगाई जा रही हैं. ऑनलाइन (Online) और ऑफलाइन दोनों ही क्लास चालू हैं. विकल्प बच्चों के मां-बाप के ऊपर छोड़ा गया है. इतना ही नहीं स्कूलों से एक लैटर बच्चों के घरों पर भेजा गया है. यह एक सहमति पत्र है. इस पत्र में स्कूल मैनेजरों ने बच्चों के मां-बाप से 5 बिंदुओं पर सहमति मांगी है. सहमति मिलने के बाद ही बच्चों को स्कूल (School) में एंट्री दी जाएगी.

    स्कूलों ने इन सवालों पर मां-बाप से मांगी है सहमति
    स्कूलों से मां-बाप के पास जो सहमति पत्र आया है उसमें 5 तरह के सवाल हैं. इन्हीं पर सहमति मांगी गई है. अगर मां-बाप सहमत हैं तो पत्र पर साइन कर स्कूल वापस भेज दें. अगर नहीं हैं तो बच्चे को स्कूल न भेजें.

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    -बच्चा हैंड सैनेटाइजर, पानी की बोतल और खाना घर से लेकर आएगा.



    -बच्चा बिना मास्क के घर नहीं आएगा.

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    स्कूल खोलने के साथ ही स्कूल मैनेजरों ने इस तरह के लैटर बच्चों के घर भेजे हैं.


    -स्कूल को इजाज़त होगी की वो बच्चे की थर्मल चेकअप कर सके.

    -बच्चे की हेल्थ की जानकारी मां-बाप गोपनीय नहीं रखेंगे.

    -आखिर में यह सहमति देनी होगी कि हम अपने बच्चे को भौतिक रूप से स्कूल भेजेंगे और उसकी हेल्थ की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से हमारी होगी.

    कुछ मैनेजर नहीं चाहते अभी स्कूल खुलें
    उत्तराखंड में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन भी कोरोना के दौरान रिस्क लेने को तैयार नहीं है. प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष देवेंद्र मान कहते हैं कि फिलहाल 3 महीने और स्कूल नहीं खोले जाने चाहिए. शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय को भी यह बात बताई जा चुकी है. उन्होंने भी विचार करने की बात कही है. बच्चों की जान से बढ़कर कुछ भी नहीं है. अब जबकि न स्कूल रिस्क लेने को तैयार हैं और न ही पेरेंट्स बच्चों को स्कूल भेजना चाह रहे हैं. ऐसे में बोर्ड परीक्षा के वक्त तक स्कूल खुले रहने पर आशंका के बादल छाए हुए हें.
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