बागी विधायकों के पार्टी से निकाले जाने के बाद क्या अलग होंगे कांग्रेस-JDS?

दोनों पार्टियां की नजर उन उपचुनावों पर भी है जो 17 विधायकों के अयोग्य घोषित होने के बाद होने हैं.

News18Hindi
Updated: August 1, 2019, 7:40 AM IST
बागी विधायकों के पार्टी से निकाले जाने के बाद क्या अलग होंगे कांग्रेस-JDS?
दोनों पार्टियां की नजर उन उपचुनावों पर भी है जो 17 विधायकों के अयोग्य घोषित होने के बाद होने हैं.
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Updated: August 1, 2019, 7:40 AM IST
दीपा बालाकृष्णन

कांग्रेस और जनता दल-सेक्युलर (जेडी-एस) के बागी विधायकों को कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष द्वारा अयोग्य घोषित किए जाने के कुछ दिनों बाद, दोनों ने अपने सभी ‘बागी’ विधायकों  निष्कासित कर दिया.

जेडी (एस) ने बुधवार को के. गोपालैया, एच. विश्वनाथ और नारायण गौड़ा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निष्कासित करने की घोषणा की. कांग्रेस ने मंगलवार शाम एक बयान जारी कर कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने कर्नाटक इकाई के प्रस्ताव को मंजूरी दी जिसमें बागी विधायकों को निकालने का फैसला किया गया था.

14 बागी विधायकों में महेश कुमतल्ली, श्रीमंत पाटिल, रमेश झारखोली, प्रथ्सपौडा पाटिल, शिवराम हेब्बार, बीसी पाटिल, आनंद सिंह, के. सुधाकर, बीए बसवराज, एसटी सोमशेखर, मुनिरत्न, रोशन बेग, एमटीबी नागराज और आर शंकर शामिल हैं.

शंकर कांग्रेस पार्टी के सदस्य नहीं थे

हालांकि, शंकर कभी भी कांग्रेस पार्टी के सदस्य नहीं थे. उन्होंने कर्नाटक प्रज्ञवंतरा जनता पक्ष (KPJP) के टिकट पर पिछले साल रानीबेन्नूर सीट से विधानसभा चुनाव जीता था. वह पार्टी से अकेले विधायक थे और जून में ही उन्होंने कांग्रेस में विलय कर लिया था. इसके तुरंत बाद, उन्हें कैबिनेट में शामिल करते हुए नगरपालिका प्रशासन के लिए मंत्री बनाया गया.

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दो हफ्ते बाद, उन्होंने कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार का समर्थन वापस ले लिया, जिसकी अगुवाई एचडी कुमारस्वामी कर रहे थे. दोनों दलों ने घोषणा की है कि वे इन विश्वासघातियों को कभी भी अपने पाले में नहीं लेंगे. वे भी अब उन्हें निष्कासित करके कदम आगे बढ़ा चुके हैं.

इस पर पहले से ही एक सवालिया निशान...

कांग्रेस और जेडीएस की गठबंधन व्यवस्था जारी रहेगी या नहीं, इस पर पहले से ही एक सवालिया निशान है. हालांकि, दोनों दलों ने विधानसभा में खुद को एकजुट विपक्ष के रूप में पेश करने का फैसला किया है.

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स्थानीय निकाय चुनावों के साथ ही जिला या तालुक स्तरों पर, जेडी (एस) और कांग्रेस ने स्थानीय स्तर पर अलग-अलग लड़े जाने के लिए ,अपने दलों के पुनः गठन पर ध्यान देना करना शुरू कर दिया है.

JDS-कांग्रेस की रणनीति

मंगलवार को, JD (S) ने अपने नेताओं की बैठक आयोजित की, जो मई 2018 के विधानसभा चुनावों में छोटे अंतर से हार गए थे. उन्हें अपने वोट बैंक पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा क्योंकि 'चुनाव किसी भी समय आ सकते हैं.'

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने इस सप्ताह की शुरुआत में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ विचार-मंथन करने आए और पूछा कि क्या गठबंधन की व्यवस्था को जारी रखने की आवश्यकता है क्योंकि यह पार्टी के वोट बैंक को विभिन्न स्तरों रुक रहा है. लोकसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था.

दोनों पार्टियां की नजर उन उपचुनावों पर भी है जो 17 विधायकों के अयोग्य घोषित होने के बाद होने हैं.

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First published: August 1, 2019, 6:07 AM IST
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