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फारूक अब्दुल्ला के बाद कश्मीर के करीब 350 नेताओं पर लग सकता है PSA

News18Hindi
Updated: September 17, 2019, 11:40 PM IST
फारूक अब्दुल्ला के बाद कश्मीर के करीब 350 नेताओं पर लग सकता है PSA
जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) को लेकर केंद्र सरकार काफी सख्त रुख अख्तियार किए हुए है. अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद से ही सरकार राज्य की सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क है इसलिए किसी को भी राज्य की सुरक्षा में कोई भी व्यवधान की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती.

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) को लेकर केंद्र सरकार काफी सख्त रुख अख्तियार किए हुए है. अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद से ही सरकार राज्य की सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क है इसलिए किसी को भी राज्य की सुरक्षा में कोई भी व्यवधान की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती.

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  • Last Updated: September 17, 2019, 11:40 PM IST
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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) को लेकर केंद्र सरकार काफी सख्त रुख अख्तियार किए हुए है. अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद से ही सरकार राज्य की सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क है इसलिए किसी को भी राज्य की सुरक्षा में कोई भी व्यवधान की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती. सूत्रों की मानें तो गृह मंत्रालय (Home Ministry) की ओर से राज्य प्रशासन को साफ निर्देश दिए गए हैं कि कश्मीर की कानून व्यवस्था में उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए. खबर है कि प्रशासन को निर्देश हैं कि राज्य की सुरक्षा में बाधा बनने वाले और लोगों को किसी भी तरह से भड़काने का प्रयास करने वालों के खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट (Public Safety Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया जाए.

सूत्रों के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों में ये एक्ट कई बड़े और रसूखदार लोगों पर लगाया जा सकता है. खबरों की मानें तो आगामी दिनों में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, अलगाववादी नेताओं समेत कथित सामाजिक सदस्यों को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक जल्द ही 350 से ज्यादा लोग पीएसए के दायरे में आ सकते हैं.

फारूक अब्दुल्ला पीएसए के तहत ही गिरफ्तार
इससे पहले सोमवार को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद रह चुके फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) को पीएसए के तहत हिरासत में ले लिया गया है. इससे पहले तक फारूक करीब एक महीने से नजरबंद थे. पीएसए एक्ट लगने के बाद अब फारूक अब्दुल्ला जहां भी रहेंगे वह अस्थाई जेल होगी.

आपको बता दें सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम या पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत प्रावधान है कि इसमें बिना कोई मुकदमा चलाए किसी भी शख्स को दो साल तक के लिए हिरासत में लिया जा सकता है. अब खबर है कि यही पीएसए राज्य के कई सारे लोगों पर लगाया जा सकता है.

आपको बता दें ये एक्ट जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला (Sheikh Abdullah) ने ही 1978 में लागू किया गया था. इस कानून को राज्य में लकड़ी की तस्करी से निपटने के लिये लागू किया गया था. अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि कठोर जन सुरक्षा कानून जम्मू-कश्मीर में लकड़ी की तस्करी को रोकने के लिये लागू किया गया था क्योंकि उस समय ऐसे अपराध में शामिल लोग मामूली हिरासत के बाद आसानी से छूट जाते थे.

लकड़ी तस्करों के लिए लाया गया था कानून
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शेख अब्दुल्ला लकड़ी तस्करों के खिलाफ अधिनियम को एक निवारक के रूप में लाए थे जिसके तहत बिना किसी मुकदमे के दो साल तक जेल की सजा देने का प्रावधान किया गया. अधिकारियों ने कहा कि 1990 के दशक की शुरुआत में जब राज्य में उग्रवाद भड़का तो यह अधिनियम पुलिस और सुरक्षा बलों के काम आया.

1990 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद (Mufti Mohammad Saeed) ने राज्य में विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम को लागू किया तो बड़े पैमाने पर पीएसए का इस्तेमाल पर लोगों को पकड़ने के लिये किया गया.

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First published: September 17, 2019, 11:40 PM IST
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