मायावती के बचाव में उतरे अखिलेश, बोले- क्‍या PM के प्रचार पर रोक लगा सकता है EC?

अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, 'मायावती जी के खिलाफ चुनाव आयोग ने कार्रवाई की है. क्‍या सेना के नाम पर वोट मांगने को लेकर प्रधानमंत्री पर भी ऐसी कार्रवाई की जाएगी?'

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Updated: April 15, 2019, 7:47 PM IST
मायावती के बचाव में उतरे अखिलेश, बोले- क्‍या PM के प्रचार पर रोक लगा सकता है EC?
अखिलेश यादव और मायावती (फाइल फोटो)
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Updated: April 15, 2019, 7:47 PM IST
चुनाव आयोग ने विवादित बयान के मामले में 48 घंटे के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती के चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने मायावती का बचाव किया है. अखिलेश यादव ने ट्वीट करके चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया है. अखिलेश ने आयोग से सवाल किया, 'क्‍या वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेना के नाम पर वोट मांगने से रोक पाएंगे? क्‍या वे प्रधानमंत्री के खिलाफ भी ऐसी कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं?

अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, 'मायावती जी के खिलाफ चुनाव आयोग ने कार्रवाई की है. क्‍या सेना के नाम पर वोट मांगने को लेकर प्रधानमंत्री पर भी ऐसी कार्रवाई की जाएगी?'

समाजवादी पार्टी के अध्‍यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को रिमार्क किया जिसमें उन्‍होंने फर्स्ट टाइम वोटर्स से कहा था कि पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों और एयर स्‍ट्राइक को ध्‍यान में रखकर वोट देने का निर्णय लेना चाहिए.

महाराष्‍ट्र की रैली में पीएम मोदी ने कहा था, 'मैं अपने फर्स्ट टाइम वोटर्स से पूछना चाहता हूं कि क्‍या आपका पहला वोट उन जवानों के नाम पर हो सकता है, जिन्‍होंने बालाकोट में एयर स्‍ट्राइक किए? क्‍या आपका वोट उनके नाम पर हो सकता है, जो पुलवामा हमले में शहीद हो गए.'

विवादित बयान के मामले में चुनाव आयोग ने 72 घंटे के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रचार पर रोक लगा दी है. आयोग ने 48 घंटे के लिए मायावती के प्रचार पर भी रोक लगाई है. आयोग का यह आदेश कल सुबह (मंगलवार) 6 बजे से लागू होगा. आयोग ने यह आदेश योगी आदित्यनाथ और मायावती के चुनाव प्रचार के दौरान विवादित बयान को लेकर दिया है. बता दें इस मामले पर सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई है.

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शीर्ष अदालत ने चुनाव प्रचार के दौरान नफरत भरे भाषण देने और धार्मिक आधार पर वोट मांगने वाले नेताओं पर कार्रवाई न करने को लेकर चुनाव आयोग की सीमित शक्तियों को लेकर नाराजगी जताई है. कोर्ट ने आयोग से मंगलवार सुबह 10:30 बजे तक जवाब मांगा है.
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'आप ऐसे मामलों को नजरअंदाज नहीं कर सकते. आपने ऐसे बयानों पर कुछ नहीं किया. आपको इन बयानों पर जरूर कार्रवाई करनी चाहिए.'

वहीं चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि चुनाव आचार संहिता तोड़ने को लेकर वह नोटिस और एडवाइजरी जारी कर रहा है. वह न तो किसी को अयोग्य करार दे सकता है और न ही किसी पार्टी को डिरजिस्टर (अपंजीकृत) कर सकता है?

इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग अपनी ताकत जानता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह चुनावी अभियान में हेट स्पीच और सांप्रदायिक बयानबाजी करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग के अधिकारों की जांच करेगा. चीफ जस्टिस ने कहा कि वे इस मामले की कल सुबह 10:30 बजे सुनवाई करेंगे और मंगलवार को चुनाव आयोग का कोई प्रतिनिधि मौजूद रहे.

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कुछ दिनों पहले यूपी के मुख्यमंत्री को उनकी 'अली-बजरंग बली' की टिप्पणी के लिए चुनाव आयोग द्वारा एक और नोटिस जारी किया गया था. आदित्यनाथ ने एक रैली में कहा था, 'अगर आप (विपक्ष) को अली पर भरोसा है, तो हमें बजरंगबली पर भरोसा है.'

इस नोटिस के जवाब में सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि उन्होंने यह बयान देवबंद में बसपा प्रमुख मायावती की मुस्लिम मतदाताओं से अपील के जवाब में दिया था. मायावती का बयान स्पष्ट रूप से सांप्रदायिक था जिसे चुनाव आयोग ने भी नोट किया था.

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