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भारत को पहला स्‍वदेशी लड़ाकू विमान देने वाली तेजस की टीम अब बनाएगी पैसेंजर प्‍लेन

भारत को पहला स्‍वदेशी लड़ाकू विमान देने वाली तेजस की टीम अब बनाएगी पैसेंजर प्‍लेन

(सांकेतिक तस्वीर)

(सांकेतिक तस्वीर)

सबसे कम लागत में मंगल पर उपग्रह भेजकर कीर्तिमान रचने वाला भारत अब दुनिया की सबसे सस्ता पैसेंजर प्लेन बनाने की तैयारी में है.

    दीपा बालाकृष्णन

    सबसे कम लागत में मंगल पर उपग्रह भेजकर कीर्तिमान रचने वाला भारत अब दुनिया का सबसे सस्ता पैसेंजर प्लेन बनाने की तैयारी में है. भारत ग्लोबल रेट से 20 फीसदी कम लागत पर दुनिया के लिए पैसेंजर प्लेन बनाने की तैयारी में है.

    इस पर काम करने के लिए एक स्पेशल पर्पज व्हिकल(एसपीवी) सेट किया गया है. इसे अमलीजामा पहनाने के लिए लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट(एलसीए) तेजस के निर्माताओं ने पहल की है. इन्होंने ही देश को पहला स्वदेश निर्मित फाइटर जेट दिया है. इस कॉमर्शियल प्लेन में में 70 से 90 यात्री बैठ सकते हैं.

    नीति आयोग के सदस्य और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट ऑर्गेनाइजेशन(डीआरडीओ) के पूर्व महानिदेशक, वीके सारस्वत ने News18 को बताया कि भारत अगले पांच से सात वर्षों में अपने पहले बड़े घरेलू यात्री जेट के साथ आ सकता है. भारत 19-सीटर विमान, सरस पर लगभग 30 वर्षों से लगातार काम कर रहा है.

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    सारस्वत ने कहा, 'आज हमारे पास एक एसपीवी है और इसे स्वायत्त तरीके से विकसित किया गया है. हम चाहते हैं कि 70 से 90 यात्रियों की क्षमता वाले एक क्षेत्रीय परिवहन विमान को स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके विकसित किया जाए क्योंकि हमने एलसीए और अन्य के तहत विकसित किया है.
    इसके लिए मुझे लगता है कि अगले पांच से सात वर्षों में एक आरटीए विकसित किया जा सकता है. यदि हम इस स्तर पर निर्णय लेने की स्थिति में हैं.

    एसपीवी के पास डीआरडीओ, एचएएल और शैक्षणिक संस्थानों के स्टेक होल्डर्स होंगे. इसे एक हेट्रेजीनियल ग्रुप इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा. एलसीए परियोजना के जनक, डॉ. कोटा हरिनारायण, जिन्होंने पहले दो जेट्स के लिए 20 से अधिक वर्षों के लिए परियोजना का निर्देशन किया, वह भी टीम में हैं.

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    वैश्विक मंच पर विमान की कीमत को प्रतिस्पर्धी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. डॉ. हरिनारायण ने न्यूज 18 को बताया, 'मैं 100 फीसदी निश्चिंत हूं कि हम वैश्विक स्तर पर विमान की कीमत को पेश कर सकेंगे. हम इसे कम से कम 20 फीसदी सस्ता बना सकते हैं. यह अंतर एयरलाइन खरीदने के लिए एयरलाइन ऑपरेटर के लिए 20 फीसदी सस्ता साबित होगा.'

    सारस्वत ने कहा इस प्रोजेक्ट को गति देने के लिए सरकारी मदद की भी जरूरत है. सबसे महत्वपूर्ण बात एयरलाइनों का विश्वास जीतना है क्योंकि एयरलाइंस वाणिज्यिक संस्थाएं हैं. उन्हें न्यूनतम ऑपरेटिंग कॉस्ट पर ग्राहकों के लिए अधिकतम सुविधाएं चाहिए. इसलिए विमानों का दाम बेहद महत्वपूर्ण है. इसलिए हम ऐसे डिजाइन पर काम करेंगे तब इन बातों का ध्यान रखेंगे.

    बकौल सारस्‍वत, 'लेकिन हम स्वदेशी रूप से विकसित विमानों के लिए बाजार की पहुंच के मामले में सरकार से कुछ निश्चित आश्वासन चाहते हैं. कम से कम सरकारी स्वामित्व वाली एयरलाइनों को दूसरों के मुकाबले स्वदेशी विमान को प्राथमिकता दे.'

    उन्होंने यह भी कहा कि निजी एयरलाइंस के पास एक निश्चित स्तर की स्वीकृति होनी चाहिए.

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    Tags: Fighter jet, Fighter Plane, HAL, Make in india, Rafale, Tejas

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