कश्मीर के 90% पत्थरबाज वॉट्सऐप ग्रुप्स बंद!

कश्मीर के 90% पत्थरबाज वॉट्सऐप ग्रुप्स बंद!
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कश्मीर में जारी हिंसा और देश के कई हिस्सों में कश्मीरी छात्रों के साथ हुई दुर्व्यवहार की घटनाओं पर चर्चा करने के लिए जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ़्ती सोमवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करने वाली हैं.

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  • Last Updated: April 24, 2017, 11:18 AM IST
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कश्मीर में जारी हिंसा और देश के कई हिस्सों में कश्मीरी छात्रों के साथ हुई दुर्व्यवहार की घटनाओं पर चर्चा करने के लिए जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ़्ती सोमवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करने वाली हैं. इसके बाद महबूबा राज्य कानून-व्यवस्था बहाल करने से संबंधित चर्चा के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मिलेंगी.

इससे पहले रविवार को नीति आयोग की बैठक के दौरान भी महबूबा ने सभी राज्यों के सीएम से उनके यहां पढ़ाई कर रहे कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी. इसके बाद मोदी ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए बैठक में ही सभी राज्य सरकारों से अपील की थी कि सभी सीएम अपने-अपने राज्यों में मौजूद जम्मू कश्मीर के छात्रों से संपर्क करें.

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क्या था मामला
आपको बता दें कि राजस्थान के मेवाड़ विश्वविद्यालय में कश्मीर के छह छात्रों की कुछ स्थानीय लोगों ने पिटाई कर दी थी. मेरठ में भी एक होर्डिंग लगाकर कश्मीरी छात्रों से उत्तरप्रदेश छोड़ने के लिए कहा गया था.

वॉट्सऐप ग्रुप पर मार
कश्मीर घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवा सस्पेंड होने के बाद से पूर्वनियोजित पत्थरबाजी की घटनाओं में भारी कमी देखेने को मिल रही है. बता दें कि घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए करीब 300 वॉट्सऐप ग्रुप चलाए जा रहे थे. इन्हीं ग्रुप्स के जरिए ये संदेश दिया जाता था कि पत्थरबाजी की घटना को कहां अंजाम दिया जाना है.

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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इन 300 वॉट्सऐप ग्रुप में से हर में करीब 250 सदस्य होते हैं. इन्हीं वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए मुठभेड़ की जगह पर पत्थरबाजों की भीड़ जुटाई जाती थी जो सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में बाधा पहुंचाने की कोशिश करती थी. नाम जाहिर न करने की शर्त पर अधिकारी ने बताया, 'हमने ऐसे वॉट्सऐप ग्रुप और ग्रुप ऐडमिनिस्ट्रेटर्स की पहचान की और उन्हें काउंसलिंग के लिए बुलाया था. हमें इस पहल का बहुत ही अच्छा नतीजा मिला है.'

अधिकारी के मुताबिक पिछले तीन हफ्तों में इनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादे ग्रुप बंद हो चुके हैं. अधिकारी ने बताया कि इंटरनेट सेवा को निलंबित करने की सरकार की नीति के सकारात्मक नतीजे मिल रहे हैं और इससे मुठभेड़ स्थलों पर पत्थरबाजी पर लगाम लगी है.
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अधिकारी ने बताया, 'इंटरनेट सेवा न होने से भीड़ को इकट्ठा करना तकरीबन नामुमकिन हो चुका है. इससे पहले, हम देखते थे कि 10 किलोमीटर दूर तक से युवक मुठभेड़ की जगह पर आ जाते थे और प्रदर्शनकारियों में शामिल होकर सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी करके आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में बाधा पहुंचाते थे.' उन्होंने आगे कहा, 'मोबाइल पर इंटरनेट न होने की वजह से ऐसा कल (शनिवार को) मुठभेड़ के दौरान या उसके बाद नहीं हुआ.'

(एजेंसी इनपुट भी)
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