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केरल की एसएसयूएस बनी CAA के खिलाफ प्रस्‍ताव पारित करने वाली देश की पहली यूनिवर्सिटी

News18Hindi
Updated: January 23, 2020, 4:47 PM IST
केरल की एसएसयूएस बनी CAA के खिलाफ प्रस्‍ताव पारित करने वाली देश की पहली यूनिवर्सिटी
केरल की एसएसयूएस ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्‍ताव पारित किया.

केरल विधानसभा (Kerala Assembly) के बाद अब राज्‍य के कलादी में श्री शंकराचार्य यूनिवर्सिटी ऑफ संस्‍कृत (SSUS) ने भी नागरिकता संशोधन कानून 2019 (CAA 2019) के खिलाफ प्रस्‍ताव पारित किया है. यूनिवर्सिटी के 15 सदस्‍यीय सिंडिकेट ने प्रस्‍ताव सर्वसम्‍मति से पारित किया.

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  • Last Updated: January 23, 2020, 4:47 PM IST
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कोच्चि. नागरिकता संशोधन कानून 2019 (CAA 2019) के खिलाफ लोगों का गुस्‍सा थमने का नाम नहीं ले रहा है. केरल विधानसभा (Kerala Assembly) के बाद अब राज्‍य के कलादी में श्री शंकराचार्य यूनिवर्सिटी ऑफ संस्‍कृत (SSUS) ने भी सीएए 2019 के खिलाफ प्रस्‍ताव पारित कर दिया है. ऐसा करने वाली एसएसयूएस देश की पहली यूनिवर्सिटी बन गई है. यूनिवर्सिटी के 15 सदस्‍यीय सिंडिकेट ने प्रस्‍ताव को सर्वसम्‍मति से पारित किया. सिंडिकेट ने कानून का समर्थन करने वालों की ओर से स्‍टूडेंट्स और टीचर्स पर की गई हिंसा की कड़ी निंदा की.

प्रस्‍ताव में केंद्र की बीजेपी सरकार पर लगाए गए हैं कई आरोप
सीएए 2019 के खिलाफ सिंडिकेट में छात्र प्रतिनिधि केवी अभिजीत के प्रस्‍ताव पर किसी ने असहमति नहीं जताई. प्रस्‍ताव में आरोप लगाया गया है कि केंद्र में सत्‍तारूढ़ बीजेपी (BJP) अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है. देश भर में युवाओं पर हिंसा (Violence) की जा रही है. जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में फीस बढ़ोतरी (Fees Hike) के खिलाफ आवाज उठाना हो या छात्रों का सीएए के खिलाफ एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन (Protest) करना, हर बार उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई. वहीं, देश की अन्‍य यूनिवर्सिटी में भी ऐसा ही माहौल है.

एसएसयूएस ने देशभर की यूनिवर्सिटी से की खड़े होने की अपील

प्रस्‍ताव में कहा गया है कि बीजेपी सरकार (BJP Government) अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों का दमन करने के लिए पुलिस (Police) ही नहीं गुंडों (Goons) का सहारा भी ले रही है. डेक्‍कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने देश के सभी विश्‍वविद्यालयों और एकेडमिक कम्‍युनिटी से स्‍टूडेंट्स व टीचर्स पर की जा रही हिंसा के खिलाफ खड़े होने की अपील की है. एसएसयूएस की स्‍थापना 1994 में हुई थी. यूनिवर्सिटी को शोध और नई खोजों के लिए भी पहचाना जाता है. इसका नाम संत और दार्शनिक आदि शंकराचार्य के नाम पर रखा गया था.

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First published: January 23, 2020, 3:53 PM IST
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