कश्मीर पर झूठे बयान के बाद इस जगह होगा ट्रंप का पीएम मोदी से पहला सामना

कश्मीर पर मध्यस्थता वाले बयान के बाद भारत ने आधिकारिक तौर पर इस बयान को झूठा बताया था. इतना ही नहीं संसद में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को सफाई भी देनी पड़ी थी.

News18Hindi
Updated: July 24, 2019, 6:27 PM IST
कश्मीर पर झूठे बयान के बाद इस जगह होगा ट्रंप का पीएम मोदी से पहला सामना
भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान पर अपना विरोध दर्ज कराया था
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Updated: July 24, 2019, 6:27 PM IST
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ इमरान की प्रधानमंत्री के तौर पर पहली विदेश यात्रा के दौरान बैठक की थी. इस बैठक के बाद ट्रंप ने कश्मीर को लेकर एक बयान दिया था. जिसके बाद भारतीय राजनीति में बवाल मच गया था. इस बयान में ट्रंप ने कश्मीर मसले पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की थी.

ऐसा उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की सिफारिश पर किया था. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया था कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी उनके साथ जी-20 बैठक के दौरान हुई मीटिंग में उन्हें कश्मीर पर मध्यस्थता करने की बात कही थी.

भारत ने ट्रंप के इस बयान को बताया था झूठ और जमकर किया था विरोध
इस बयान के बाद भारत ने आधिकारिक तौर पर इस बयान को झूठा बताया था. इतना ही नहीं संसद में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी सफाई दी थी कि भारत की ओर से अमेरिका से ऐसे कोई भी गुजारिश नहीं की गई है. भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बेतुके बयान पर कई तरीकों से अपना प्रतिरोध दर्ज कराया था.

इस बयान के बाद अगले महीने होगी ट्रंप और पीएम मोदी की पहली मुलाकात
भारत और अमेरिका के बीच हुई गहमा-गहमी के बाद अब भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच पहली बैठक होने वाली है. यह बैठक G7 ग्रुप की बैठक के दौरान होगी. इस ग्रुप की बैठक अगले महीने यानि 24 से 26 अगस्त को फ्रांस में होने वाली है. इस बैठक में पीएम मोदी भी शामिल होने वाले हैं. इस मीटिंग में शामिल होने के लिए भारत को विशेष अतिथि के तौर पर न्यौता दिया गया है.

क्यों मायने रखता है जी-7 देशों का समूह?
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जी7 देशों के समूह में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे प्रमुख देश शामिल हैं. IMF के अनुसार जी-7 देश दुनिया की सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं. और इन देशों के पास कुल दुनिया की कुल संपत्ति का 58% है. जो रकम में करीब 317 ट्रिलियन डॉलर है.

विश्व की सात सर्वाधिक औद्योगिक एवं विकसित महाशक्तियों के इस संगठन की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी. वैश्विक आर्थिक मंदी व बढ़ते तेल संकट की पृष्ठभूमि में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति बैलेरी जिस्कार्ड डी एस्टेइंग के आह्वान पर वर्ष 1975 में इस समूह का गठन औपचारिक तौर पर किया गया.

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First published: July 24, 2019, 6:14 PM IST
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