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#MeToo के बाद अब 'खूबसूरत' महिलाओं को नौकरियां नहीं देना चाहते पुरुष : रिपोर्ट

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Updated: September 16, 2019, 4:00 PM IST
#MeToo के बाद अब 'खूबसूरत' महिलाओं को नौकरियां नहीं देना चाहते पुरुष : रिपोर्ट
27 फीसदी पुरुषों ने कहा कि वह अब महिलाओं से मीटिंग करने से कतराते हैं. ( News18 इलस्ट्रेशन- मीर सुहेल)

#Metoo से जुड़े सर्वे में 27 फीसदी पुरुषों ने कहा कि वह अब महिलाओं से मीटिंग करने से कतराते हैं.

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  • Last Updated: September 16, 2019, 4:00 PM IST
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नई दिल्ली. पश्चिमी देशों में सात 2017 में #MeToo कैंपेन की शुरुआत के बाद से इसका असर साल 2018 में भारत में देखने को मिला. दुनिया भर में कई महिलाओं ने अपने साथ हुई शोषण और घटनाओं को उजागर किया. #Metoo के बाद सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. इस सर्वे में दावा किया गया है कि पुरुष अब आकर्षक महिलाओं को नौकरी देने से कतरा रहे हैं.

ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लीन एटवाटर की अगुवाई में किये गए सर्वे में यह बात साने आई है कि कम से कम 19 फीसदी पुरुषों ने कहा है कि वह नौकरी देने के लिए 'आकर्षक महिलाओं' को नौकरी नहीं देना चाहते. वहीं सर्वे में यह भी सामने आया है कि 21 फीसदी पुरुषों ने कहा कि वह उन पदों पर महिलाओं को नौकरी नहीं देना चाहते हैं जहां उनका सीधा वास्ता पुरुषों से हो.

27 फीसदी पुरुषों ने कहा कि वह अब महिलाओं से मीटिंग करने से कतराते हैं. साल 2018 के शुरुआत में शुरु हुए सर्वे में यह सामने आया है कि महिला और पुरुषों दोनों में अब सेक्सुअल हैरेशमेंट के बारे में जागरुकता बढ़ी है.

महिलाओं की तुलना में पुरुष ज्यादा जागरुक

सर्वेक्षण से पता चला कि महिलाओं की तुलना में पुरुष सेक्सुअल हैरेशमैंट माने जाने वाली हरकतों के प्रति जागरुक हैं.

हालांकि, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू में प्रकाशित नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार साल 2018 में एक सर्वे के हवाले से कहा गया कि 74 प्रतिशत महिलाओं का मानना ​​था कि महिलाएं बिना किसी हिचकिचाहट के यौन उत्पीड़न के खिलाफ रिपोर्ट करेंगी या बोलेंगी और 77 प्रतिशत पुरुषों को उम्मीद थी कि यह पुरुषों को उनकी ओर से अनुचित व्यवहार से अधिक सावधान करेगा.

जेंडर गैप के संबंध में परिणाम आशाजनक नहीं
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हालांकि कॉर्पोरेट क्षेत्र में जेंडर गैप के संबंध में परिणाम आशाजनक नहीं हैं. यह उद्योगों में काम करने वाली महिलाओं को प्रभावित कर सकता है और कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी के साथ-साथ जेंडर पे गैप को भी प्रभावित कर सकता है.

स्टडी में कहा गया है कि कम से कम एक संगठनात्मक स्तर पर, कर्मचारियों के प्रशिक्षण को सुनिश्चित करने के लिए न केवल यौन उत्पीड़न पर, बल्कि चरित्र निर्माण और जेंडर इक्वॉलिटि पर भी ध्यान केंद्रित करना होना चाहिए.

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First published: September 16, 2019, 3:44 PM IST
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