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    बंगाल का पांडाल: डॉक्टर के भेष में कोरोनारूपी महिषासुर से लड़तीं मां दुर्गा

    पश्चिम बंगाल के एक पांडाल में देवी दुर्गा की प्रतिमा. (तस्वीर शशि थरूर की ट्वीटर वॉल से साभार)
    पश्चिम बंगाल के एक पांडाल में देवी दुर्गा की प्रतिमा. (तस्वीर शशि थरूर की ट्वीटर वॉल से साभार)

    कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने इस पांडाल की दुर्गा मूर्ति की तस्वीर शेयर करते हुए इसे क्रिएटिविटी का बेहतरीन नमूना बताया है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 19, 2020, 10:46 PM IST
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    कोलकाता. कोलकाता के एक पांडाल में देवी दुर्गा (Goddess Durga) को डॉक्टर के रूप में प्रदर्शित किया गया है जो कोरोना (Corona Virus) से लड़ रही है. देवी दुर्गा के इस प्रतीकात्मक स्वरूप में कोरोना वायरस को महिषासुर (Mahishashur) के रूप में प्रदर्शित किया गया है. साथ ही देवी दुर्गा के अस्त्र के तौर पर एक इंजेक्शन को प्रदर्शित किया गया है. इसे कलाकार ने प्रतीकात्मक तौर पर वैक्सीन का रूप दिया है.

    कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने इस पांडाल की दुर्गा मूर्ति की तस्वीर शेयर करते हुए इसे क्रिएटिविटी का बेहतरीन नमूना बताया है. शशि थरूर ने अलावा भी ट्विटर पर कई नामी लोगों ने क्रिएटिविटी के लिए कलाकार की प्रशंसा की है.


    इससे पहले खबर आई थी कि दक्षिणी कोलकाता के बेहाला इलाके में एक दुर्गा पूजा कमेटी ने इस बार अपने पांडाल में मां दुर्गा की जगह एक अप्रवासी मजदूर महिला की मूर्ति लगाने का फैसला किया है. इस महिला के हाथों में छोटा बच्चा भी है. पूजा कमेटी के संचालकों का कहना है कि उन्होंने कोरोना वायरस के दौरान अप्रवासी मजदूर महिलाओं के दुख को प्रदर्शित करने के लिए यह मूर्ति लगाने का फैसला किया है. ये मूर्ति न सिर्फ उनके दुख को प्रदर्शित करती है बल्कि साहस को भी सलाम करती है.



    गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल (West Bengal) में दुर्गा पूजा (Durga Puja 2020) सिर्फ एक सामान्य त्योहार नहीं है बल्कि वहां की संस्कृति का हिस्सा भी है. यही वजह है कि पश्चिम बंगाल के मूर्ति कलाकार सिर्फ अपने राज्य में ही नहीं बल्कि बिहार, यूपी, झारखंड और ओडिशा में मूर्तियां बनाते मिल जाएंगे. बिहार, झाखंड और पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के पांडाल भी कई बार सामाजिक संदेशों वाले स्वरूप में बनाए जाते हैं.
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