मिशन शक्ति पर सवाल उठाने वाले पाकिस्तान और NASA को ISRO का करारा जवाब

नासा के बाद पाकिस्तान ने भी ASAT परीक्षण को लेकर भारत पर निशाना साधा. इसका ISRO ने करारा जवाब दिया.

News18Hindi
Updated: April 3, 2019, 2:13 PM IST
मिशन शक्ति पर सवाल उठाने वाले पाकिस्तान और NASA को ISRO का करारा जवाब
मीर सुहेल का इलस्ट्रेशन (News18)
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Updated: April 3, 2019, 2:13 PM IST
पाकिस्तान ने मंगलवार को भारत के मिशन शक्ति (ASAT) परीक्षण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे अंतरिक्ष में मलबा बढ़ गया है, जिसके अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से टकराने की आशंका है. पाकिस्तान के सरकारी प्रवक्ता के कार्यालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "यह ASAT परीक्षण न केवल अंतरिक्ष मलबे के संदर्भ में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष समुदाय के लिए भी गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए.'

पाकिस्तान की ओर से यह प्रेस विज्ञप्ति अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के बयान के बाद आई. नासा ने मंगलवार को चिंता जाहिर करते हुए कहा कि भारत द्वारा किए गए एंटी सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण की वजह से अंतरिक्ष में मलबे के करीब 400 टुकड़े इकट्ठे हो गए हैं, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के लिए जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.



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नासा की तरफ से यह बात उनके प्रमुख जिम ब्रिडेनस्टाइन ने कही. सोमवार को नासा के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत द्वारा पांच दिन पहले किए गए टेस्ट का जिक्र किया. ब्रिडेनस्टाइन ने कहा कि सारे टुकड़े इतने बड़े नहीं हैं जिन्हें ट्रैक किया जा सके.

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जिम ने कहा, 'हमारी उस पर नजर है और हम बड़े टुकड़ों को ट्रैक कर रहे हैं. हम लोग 10 सेंटीमीटर (6 इंच) से बड़े टुकड़ों की बात कर रहे हैं. ऐसे अब तक 60 टुकड़े मिले हैं.' उन्होंने कहा कि करीब 24 टुकड़े इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के ऊपर चले गए हैं.

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हालांकि भारत ने इन बयानों पर सकारात्मक रूप से अपनी बात रखी है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इसरो के अध्यक्ष के वरिष्ठ सलाहकार तपन मिश्रा ने मंगलवार को बताया कि भारतीय वैज्ञानिक ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे भारत को शर्मसार होना पड़े. अगले छह महीनों में ' मिशन शक्ति' के प्रयोग से बना मलबा खत्म हो जाएगा.

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तपन मिश्रा ने कहा कि चीन की ओर से साल 2007 में किये गये परीक्षण का मलबा आज तक स्पेस में मौजूद है. उन्होंने कहा कि भारत जानबूझकर ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा जिससे अंतरराष्ट्रीय नुकसान हो.

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