Opinion: पाकिस्तान ने एयरस्पेस खोलकर भारत से ज्यादा खुद को राहत दी है, जानिए कैसे?

भारत के लिए वायुमार्ग को प्रभावित करने से पाकिस्तान को भी जबर्दस्त नुकसान हुआ है. जानिए इस पाबंदी की पाकिस्तान ने क्या कीमत चुकाई है?

Santosh K Verma | News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 8:33 PM IST
Opinion: पाकिस्तान ने एयरस्पेस खोलकर भारत से ज्यादा खुद को राहत दी है, जानिए कैसे?
भारत के लिए वायुमार्ग को प्रभावित करने से पाकिस्तान को भी जबर्दस्त नुकसान हुआ है. जानिए इस पाबंदी की पाकिस्तान ने क्या कीमत चुकाई है?
Santosh K Verma
Santosh K Verma | News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 8:33 PM IST
पाकिस्तान के सिविल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (सीएए) ने मंगलवार को भारत के साथ गतिरोध के मद्देनजर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाते हुए पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र को तत्काल प्रभाव से नागरिक उड्डयन के लिए फिर से खोल दिया है. प्राधिकरण की वेबसाइट पर प्रकाशित “एयरमेन के लिए नोटिस” (NOTAMS) के अनुसार, “प्रकाशित एयर ट्रैफिक सर्विस मार्गों पर पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र सभी प्रकार के नागरिक यातायात के लिए खुला हुआ है.” चार महीने और 19 दिनों के बाद एक बार फिर भारत भी पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का उपयोग करने में सक्षम होगा.

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष फरवरी में पुलवामा में जैश ए मुहम्मद के आतंकियों ने केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल के काफिले पर आत्मघाती हमले किए, जिसमें 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए. इसके बाद भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए. हवाई क्षेत्र के उल्लंघन और हमलों से बौखलाए पाकिस्तान ने 26 फरवरी को अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा और अपने हवाई क्षेत्र को पूरी तरह से बंद कर दिया था. हालांकि मार्च में उसने आंशिक रूप से अपना हवाई क्षेत्र खोला. लेकिन इसे भारतीय उड़ानों के लिए प्रतिबंधित कर दिया.

भारत पर पड़ने वाले प्रभाव
पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि भारत की पश्चिमी देशों की उड़ान का मार्ग पाकिस्तान से होकर ही गुजरता है. इससे हटकर उड़ान भरने पर यात्रियों के लिए उड़ान के समय में वृद्धि और साथ ही साथ एयरलाइनों के लिए ईंधन की अतरिक्त लागत भी बढ़ती है. उत्तर भारत में हवाई अड्डों से पश्चिम की ओर जाने वाली उड़ानों को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित होने के कारण - गुजरात और महाराष्ट्र का चक्कर लगा कर फिर यूरोप, उत्तरी अमेरिका या पश्चिम एशिया के लिए मुड़ने के कारण अधिकांश उड़ानों की अवधि में वृद्धि हुई.

पाकिस्तान द्वारा लगाई इस रोक के कारण एयर इंडिया को अपनी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट में बदलाव करना पड़ा और कई सेवाओं को, जो भारत को यूरोपीय और अमेरिकी शहरों से जोड़ती हैं, निलंबित भी करना पड़ा. अब अधिक लम्बे वायु मार्ग का उपयोग करने का सीधा अर्थ है अधिक समय और ईंधन का अधिक उपयोग. (मई में एविएशन फ्यूल की कीमत 700 डॉलर प्रति किलोलीटर और जून में 668 डॉलर प्रति किलोलीटर के स्तर पर थीं)

उत्तर भारत के हवाई अड्डों जैसे दिल्ली, लखनऊ, अमृतसर आदि से जाने वाली उड़ानें अत्यधिक प्रभावित हुई हैं. पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण एयर इंडिया को 2 जुलाई तक विभिन्न मदों में 491 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा. वहीँ दूसरी ओर निजी एयरलाइंस स्पाइसजेट, इंडिगो और गो एयर को भी बड़ी मात्रा में नुकसान झेलना पड़ा. दिल्ली से शिकागो के लिए एयर इंडिया की उड़ानों को यूरोप में ईंधन भरने के लिए ठहरना पड़ा. यहां तक कि भारत की सबसे बड़ी घरेलू विमानन सेवा इंडिगो पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण दिल्ली से इस्तांबुल के लिए सीधी उड़ान शुरू करने में असमर्थ रही.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान. (फाइल फोटो)

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प्रतिबंध का अर्थ
अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के अनुसार, हवाई क्षेत्र प्रतिबंध के मुख्य रूप से दो उद्देश्य हैं : पहला, विमान और उसके यात्रियों की सुरक्षा और दूसरा, जमीन पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना. इसके अलावा आतंकवाद भी एक और महत्वपूर्ण कारण है जिसके कारण हवाई क्षेत्र बंद किया जा सकता है. 11 सितंबर, 2001 को हुए आतंकी हमलों के बाद अमेरिका ने अपने हवाई क्षेत्र को सभी उड़ानों के लिए बंद किया था.

हवाई क्षेत्र पर प्रतिबन्ध का निर्णय सम्बन्धित देश द्वारा लिया जाता है, इस हवाई क्षेत्र का नियंत्रण उस देश के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा किया जाता है और पायलट और एयरलाइंस को उस देश के निर्देशों का पालन करना होता है. भारत को पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में प्रतिबंधित करने का अर्थ यह था कि भारत से उड़ने वाली अथवा भारत को जाने वाली वाणिज्यिक उड़ानें न तो पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से गुजर सकती हैं और न यहां के किसी हवाई अड्डे पर उतर सकती हैं. इसका एक स्वत: परिणाम था कि पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का उपयोग करने वाली सभी उड़ानों को अपने मार्ग में बदलाव करना होगा.

हालांकि भारत ने पाकिस्तान से उसके वायुक्षेत्र को खोलने की मांग की थी. पाकिस्तान के उड्डयन सचिव शाहरुख नुसरत ने हाल ही में एविएशन पर एक सीनेट की स्टैंडिंग कमेटी को जानकारी दी थी कि भारत ने पाकिस्तान से संपर्क करके हवाई क्षेत्र खोलने के लिए कहा था. इसके जवाब में पाकिस्तान ने भारत को सीमा के पास स्थित एयरबेस से लड़ाकू विमानों के हटाने की शर्त रखी थी, जिसके बाद ही पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र को फिर से खोला जा सकता है.

air space
भारत के लिए पाकिस्तान ने एयर स्पेस का रास्ता खोल दिया है. यानी भारतीय विमान पाकिस्तान के ऊपर उड़ान भर सकेंगे.


पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर चोट
बहरहाल पाकिस्तान से गुजरने वाला यह महत्वपूर्ण विमानन गलियारा जो हवाई क्षेत्र के प्रतिबंधों के कारण हर दिन सैकड़ों वाणिज्यिक और कार्गो उड़ानों को प्रभावित कर रहा था, अब दोबारा पहले जैसी स्थिति में आ सकेगा. ऐसा नहीं है कि इस रोक का प्रभाव केवल भारत की वायुसेवा प्रदाता कम्पनियों को ही हो रहा था, बल्कि स्वयं पाकिस्तान भी इससे बुरी तरह से प्रभावित हुआ है.

पाकिस्तान की प्रतिदिन लगभग 400 उड़ानें इससे प्रभावित हुईं और परिणामस्वरूप उसे लगभग 100 मिलियन डॉलर अथवा 688 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. फरवरी से लेकर जून के बीच पाकिस्तानी और विदेशी विमानन सेवाओं द्वारा किए गए व्यापक अध्ययन से पता चला है कि इस प्रतिबन्ध से उड़ान के समय में भी वृद्धि हुई क्योंकि अंतरराष्ट्रीय विमानन सेवाओं को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र को बायपास करना पड़ा.
इसके साथ ही साथ यात्रा का रूट बदलने और दूरी बढ़ने के कारण ईंधन खर्च में वृद्धि, परिचालन लागत और रखरखाव लागत के साथ-साथ एयरक्रूज के लिए प्रति घंटे और अधिक शुल्क भी प्रदाय करना पड़ा. इसके अलावा पाकिस्तान से आने वाले या यहां से उड़ान भरने वाले विमानों से होने वाले रूट नेविगेशन और हवाई अड्डा शुल्क, टर्मिनल नेविगेशन, लैंडिंग और विमानों की पार्किंग जैसी आमदनी के साधन इन उड़ानों के रद्द होने के कारण प्राप्त नहीं हो सके. इससे सिविल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के राजस्व में सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. पाकिस्तान की निरंतर घाटे में चल रही सरकारी विमान सेवा पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस को भी इस सबसे भारी नुकसान उठाना पड़ा है. पूर्व की ओर के गंतव्यों जैसे कुआलालंपुर, बैंकॉक और दिल्ली के लिए उड़ानों के निलंबन के कारण इसको मिलने वाले राजस्व में भारी गिरावट आई है. इससे दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया की ओर होने वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात बुरी तरह बाधित हो गया था. थाई एयरवेज, एमिरेट्स, कतर एयरवेज, एतिहाद, गल्फएयर, श्रीलंकन एयरलाइंस, एयर कनाडा, सिंगापुर एयरलाइंस और ब्रिटिश एयरवेज को अपनी उड़ानों के समय को पुनर्निर्धारित अथवा रद्द ही करना पड़ा.

प्रतिबन्ध समाप्ति के कारण
इस प्रतिबन्ध को हटाने के पीछे, पाकिस्तान की खुद की खस्ता हालत और समेकित अंतरराष्ट्रीय दबाव का बहुत बड़ा योगदान है जो आगे चलकर उसके विमानन क्षेत्र को और भी अधिक नुकसान पहुंचा सकता था, जो खुद ही बुरी अवस्था से गुजर रहा है. इसके साथ ही साथ इस प्रतिबन्ध की समाप्ति में अमेरिकी दबाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता. विशेष रूप से ऐसे समय में जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. साथ ही, अमेरिका के फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) ने राजनीतिक तनाव और संभावित सैन्य गतिविधियों को बढ़ने की संभावनाओं के चलते ईरान के क्षेत्र में विमान परिचालन से दूर रहने की हिदायत भी जारी कर दी थी. पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद हो जाने के कारण भारत इस क्षेत्र का इस्तेमाल कर रहा था, जो कुछ हद तक अमेरिका के लिए असुविधाजनक भी था. उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन समिट में भाग लेने के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल किया था.

उल्लेखनीय है कि विमानन उद्योग अपनी लगातार बढ़ती परिचालन लागतों के कारण दबाव में रहा है और इस तरह के अतरिक्त भार उसे और भी अधिक दबाव में लाते हैं. भारत अब अपनी कुछ रूट्स पर सेवाओं को दोबारा उपलब्ध कराने में सक्षम हो सकेगा खासकर मध्य पूर्व एशिया के देशों को. उदाहरण के लिए मात्र एयर इंडिया ही तेल अवीव और दिल्ली के बीच सेवा उपलब्ध कराने वाली वाली महत्वपूर्ण सेवा है. अल एल इजरायल की हवाई यातायात सेवा कंपनी है जो भारत और इजरायल के बीच सेवा प्रदान करती है. परन्तु उसे मध्य पूर्व के अनेक देशों के हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी गई है जिसके कारण उसकी सेवा एयर इंडिया की तुलना में समय और धन की दृष्टि से महंगी पड़ती है.

ऐसे अनेकों क्षेत्र हैं जहां एयर इंडिया ने विशिष्टीकरण हासिल किया है और अब वह दोबारा इस दिशा में आगे बढ़ सकेगी. इस प्रतिबन्ध की समाप्ति के बाद विमान उपयोग में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर चालक दल की आवश्यकता में 25 प्रतिशत तक की कमी आएगी. यह निर्णय न केवल भारतीय विमानन उद्योग के लिए लाभदायक है बल्कि इसका सबसे अधिक लाभ स्वयं पाकिस्तान को ही होगा, जिसके लिए इस क्षेत्र से गुजरने वाली उड़ानों को विविध सेवाएं और सुविधाएं प्रदान करने से भारी आमदनी होती रही है.

(लेखक पाकिस्तान संबंधी विषयों के विशेषज्ञ हैं. प्रस्तुत लेख में लेखक के विचार, उनके व्यक्तिगत विचार हैं )
First published: July 17, 2019, 8:01 PM IST
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