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कड़ाके की ठंड के बाद अब झुलसाएगी गर्मी, एक्सपर्ट्स बोले- मार्च से बढ़ेगा पारा

मौसम विभाग का डेटा बताता है कि दिल्ली का अधिकतम तापमान 2020, 2019, 2015, 2014 और 2013 में फरवरी में 30 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े तक नहीं पहुंचा. 

मौसम विभाग का डेटा बताता है कि दिल्ली का अधिकतम तापमान 2020, 2019, 2015, 2014 और 2013 में फरवरी में 30 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े तक नहीं पहुंचा. 

Weather Update: कुलदीप श्रीवास्तव कहते हैं 'आमतौर पर 6 पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) जनवरी और फरवरी और करीब 4-5 मार्च को उत्तरी मैदानों को प्रभावित करते हैं. हम जैसे ही गर्मी की ओर जाते हैं, तो उत्तर पश्चिमी हवाएं वसंत लेकर आती हैं. ऐसा इस साल नहीं हुआ.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 28, 2021, 6:39 AM IST
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summerनई दिल्ली. भारत (India) में गर्मी ने दस्तक दे दी है. देश के कई हिस्सों में लोग सालों में पहली बार इतने गर्म वसंत (Hot Spring) का सामना कर रहे हैं. बीते शनिवार को राजधानी दिल्ली (Delhi) में अधिकतम तापमान 31.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. जबकि, मुंबई (Mumbai) में यह आंकड़ा 34.6 और कोलकाता में 35.8 डिग्री सेल्सियस पर था. हाल ही में बढ़ी गर्मी के पीछे का कारण पश्चिमी विक्षोभ की गैर-मौजूदगी को माना जा रहा है. हालांकि, जानकार बताते हैं कि रविवार से लेकर अगले सप्ताह के मध्य तक राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन माहौल अभी और गर्म होगा. इससे पहले मौसम विज्ञानियों ने ला नीना के चलते लंबे समय तक सर्दियों का अनुमान लगाया था.

सोमवार से लेकर शनिवार तक दिल्ली का तापमान क्रमश: 28.9, 31.5, 32.5, 33.2, 33 और 31.7 डिग्री सेल्सियस रहा. उत्तरी मैदानों के कई शहरों में हालात ऐसे ही रहे. इस दौरान मुंबई में अधिकतम तापमान 33.9 से लेकर 36.1 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा. यह आंकड़े सामान्य से 5 औऱ 7 डिग्री ज्यादा है. अब सवाल उठता है ऐस क्यों? मौसम विभाग का डेटा बताता है कि दिल्ली का अधिकतम तापमान 2020, 2019, 2015, 2014 और 2013 में फरवरी में 30 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े तक नहीं पहुंचा.

साल 2018 में चार दिन, 2017 में तीन दिन और 2016 में पांच दिन ऐसे रहे, जब तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर गया था. आईएमडी के रीजनल वेदर फोरकास्टिंग सेंटर के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव कहते हैं 'आमतौर पर 6 पश्चिमी विक्षोभ जनवरी और फरवरी और करीब 4-5 मार्च को उत्तरी मैदानों को प्रभावित करते हैं. हम जैसे ही गर्मी की ओर जाते हैं, तो उत्तर पश्चिमी हवाएं वसंत लेकर आती हैं. ऐसा इस साल नहीं हुआ.'



उन्होंने बताया 'जनवरी और फरवरी में केवल एक ही पश्चिमी विक्षोभ ने उत्तर पश्चिमी मैदानों पर असर डाला.' श्रीवास्तव ने जानकारी दी 'बाकी दूसरे विक्षोभों ने पश्चिमी हिमालय के ऊपरी हिस्सों पर असर डाला. दक्षिण पश्चिमी हवाएं चल रहीं हैं.' उन्होंने बताया कि रविवार से तापमान में कुछ समय के लिए थोड़ी गिरावट होगी, लेकिन ये हालात वसंत की तरह नहीं होंगे. उन्होंने कहा 'आज हवा कि दिशा हल्की सी उत्तर-पश्चिम की तरफ होगी.' इससे तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होगी. उन्होंने बताया कि लेकिन अधिकतम तापमान सामान्य से पहले ही 5 से 6 डिग्री ऊपर चल रहा है. ऐसे में 2-3 डिग्री सेल्सियस तक पारा गिरने से वसंत की वापसी नहीं होगी. उन्होंने कहा '3 मार्च से अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा.'

आईएमडी के डायरेक्टर जनरल एम मोहापात्रा कहते हैं 'उत्तर पश्चिमी भारत में तापमान बढ़ने का एक बड़ा कारण दक्षिण-पश्चिमी हवाएं और मौसम तंत्र की कमी है, जो बारिश ला सकती हैं. शुक्रवार को हिमालय में बर्फबारी और बारिश हुई, तो फिलहार तापमान अस्थाई रूप से कम होगा, लेकिन तापमान में बढ़त जारी रहेगी.' उन्होंने कहा 'IMD की भाषा में समझें तो अब कोई वसंत नहीं है. सर्दियों से हम प्री-मानसून मौसम पर आ गए हैं.'
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