Section 377 पर फैसले के बाद Google ने लगाया रेनबो फ्लैग, Facebook ने बदली डीपी

रेनबो फ्लैग को लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) समुदाय के गौरव और सामाजिक आंदोलनों से जोड़कर देखा जाता है.

News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 7:46 AM IST
Section 377 पर फैसले के बाद Google ने लगाया रेनबो फ्लैग, Facebook ने बदली डीपी
प्रतीकात्मक तस्वीर
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Updated: September 7, 2018, 7:46 AM IST
गूगल इंडिया ने आपसी सहमति से बनाए जाने वाले समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. गूगल इंडिया ने अपने होमपेज पर रेनबो फ्लैग लगाया है. विभिन्न मौकों पर डूडल लगाने वाली प्रसिद्ध सर्च इंजन ने अपने वेबपेज के सर्चबार के नीचे सात रंगों का झंडा लगाया.

माउस का कर्सर झंडे पर ले जाने पर एक पॉपअप संदेश आता है 'सेलिब्रेटिंग इक्वल राइट्स.' इसी तरह, फेसबुक ने भी अपनी डीपी बदल ली है और उसकी जगह कई रंगों का आइकन लगाया है.

गौरतलब है कि रेनबो फ्लैग को लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) समुदाय के गौरव और सामाजिक आंदोलनों से जोड़कर देखा जाता है.

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बता दें सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने गुरुवार को एकमत से 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के Section 377 के उस हिस्से को निरस्त कर दिया, जिसके तहत परस्पर सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंध बनाना अपराध था. अदालत ने कहा कि यह प्रावधान संविधान में द्वारा दिए गए समता (बराबरी) के अधिकार का उल्लंघन करता है.

Google Home Page का स्क्रीन शॉट


चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान बेंच ने परस्पर सहमति से स्थापित अप्राकृतिक यौन संबंधों को अपराध के दायरे में रखने वाले, Section 377 के हिस्से को तर्कहीन, सरासर मनमाना और बचाव नहीं करने योग्य करार दिया है.
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यौन प्राथमिकता बाइलोजिकल और प्राकृतिक है. अंतरंगता और निजता किसी की निजी च्वाइस है. इसमें राज्य को दख़ल नहीं देना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह का भेदभाव मौलिक अधिकारों का हनन है. धारा 377 संविधान के समानता के अधिकार आर्टिकल 14 का हनन करती है.

हालांकि, कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि Section 377 में प्रदत्त, पशुओं और बच्चों से संबंधित अप्राकृतिक यौन संबंध स्थापित करने को अपराध की श्रेणी में रखने वाले प्रावधान पहले जैसे ही रहेंगे.

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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