शीला दीक्षित के निधन से विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के सामने नया 'संकट'

एक कांग्रेस नेता ने कहा, 'नेताओं की वर्तमान श्रेणी में कोई भी शीला दीक्षित की तरह लोकप्रिय और मास अपील वाला नहीं है.'

News18Hindi
Updated: July 21, 2019, 9:57 AM IST
शीला दीक्षित के निधन से विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के सामने नया 'संकट'
एक कांग्रेस नेता ने कहा, नेताओं की वर्तमान श्रेणी में कोई भी शीला दीक्षित की तरह लोकप्रिय और मास अपील वाला नहीं है.
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Updated: July 21, 2019, 9:57 AM IST
दिल्‍ली की पूर्व मुख्‍यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्‍यक्ष शीला दीक्षित का शनिवार दोपहर निधन हो गया. उनके निधन से पार्टी को बड़ी छति को हुई ही है, साथ ही एक नया संकट भी खड़ा हो गया है. दरअसल, दिल्‍ली विधानसभा चुनाव होने में कुछ ही महीने शेष बचे हैं. ऐसे में अब कांग्रेस के सामने एक ऐसे नेता की तलाश करने की चुनौती खड़ी हो गई है, जो पार्टी की जिम्‍मेदारी संभाल सके.

नए नेता को गुट-विरोधी दिल्ली इकाई को एकजुट करने की चुनौती से भी निपटना है, जिसका सामना पहले से ही दीक्षित और पीसी चाको सहित अन्य नेता कर रहे हैं.

हालांकि दीक्षित पर पार्टी नेतृत्व पर भरोसा था, लेकिन उनके विरोध का पता तब चला जब वह और कई कांग्रेस नेता 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करने के बारे में अलग-अलग सोच के थे.

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एक कांग्रेस नेता ने कहा- कोई भी उनके जैसा नहीं

एक कांग्रेस नेता ने कहा, 'नेताओं की वर्तमान श्रेणी में कोई भी दीक्षित की तरह लोकप्रीय और अपीली नहीं है. तीन कार्यकारी अध्यक्ष हारून यूसुफ, देवेंद्र यादव और राकेश लिलोठिया, वरिष्ठ नेताओं - जेपी अग्रवाल, एके वालिया और सुभाष चोपड़ा इसके लिए अपेक्षाकृत जूनियर हैं .' नेता ने कहा, 'दीक्षित के अचानक निधन से दिल्ली कांग्रेस बुरी तरह आहत है, जो इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है.'

साल 2013 के बाद से हर प्रमुख चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और तीसरे स्थान पर जाना पड़ा. पार्टी ने AAP को नापसंद करने और 2019 के लोकसभा चुनावों में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद कुछ उम्मीद दिखाई. पांच सीटों पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी.
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विधानसभा चुनाव की हो रही थी तैयारी

दीक्षित अगले साल जनवरी-फरवरी में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के लिए भी कमर कस रहीं थीं. अब पार्टी को चुनाव से पहले संगठन का नेतृत्व करने के लिए एक नए नेता खोजना करना होगा. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रमुख अजय माकन ने स्वास्थ्य आधार पर इस्तीफा दे दिया था. अरविंदर लवली, जिन्होंने पूर्व में DPCC प्रमुख के रूप में भी कार्य किया है, हाल ही में भाजपा से पार्टी में वापस आए हैं.

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First published: July 21, 2019, 2:59 AM IST
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