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JNU के पूर्व अध्यक्ष का दावा- पुलिस ने धरना दे रहे दृष्टिहीन छात्र को बूट से रौंदा, AIIMS में भर्ती

News18Hindi
Updated: November 19, 2019, 1:01 PM IST
JNU के पूर्व अध्यक्ष का दावा- पुलिस ने धरना दे रहे दृष्टिहीन छात्र को बूट से रौंदा, AIIMS में भर्ती
क्रांतिकारी गायक और JNUSU के पार्षद शशिभूषण समद एम्स में भर्ती हैं.

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी ने बताया कि धरना प्रदर्शन कर रहे दृष्टिहीन क्रांतिकारी गायक और JNUSU (जेएनयू स्टूडेंट यूनियन) के पार्षद शशिभूषण समद को बुरी तरह से पीटा गया है. समद का गाया एक गीत 'दस्तूर' पिछले दिनों काफी वायरल हुआ था.

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  • Last Updated: November 19, 2019, 1:01 PM IST
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नई दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में फीस बढ़ाने के खिलाफ छात्रों ने सोमवार को जमकर प्रदर्शन किया. इस दौरान छात्रों की दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के साथ तीखी झड़प भी हुई. दिन भर चले बवाल के बाद दिल्ली पुलिस ने बताया कि जेएनयू धरना प्रदर्शन में कम से कम 30 पुलिसकर्मी और 15 छात्र घायल हो गए. इस बीच जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी ने एक छात्र की बेरहमी से पिटाई का दावा किया है. साई बालाजी का दावा है कि पुलिस ने दृष्टिहीन छात्र शशिभूषण समद को बूट से रौंदने की कोशिश की. इससे उन्हें काफी चोटें आई हैं. एम्स ट्रॉमा सेंटर में एडमिट हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.

एन साई बालाजी ने बताया कि धरना प्रदर्शन कर रहे दृष्टिहीन क्रांतिकारी गायक और JNUSU (जेएनयू स्टूडेंट यूनियन) के पार्षद शशिभूषण समद को बुरी तरह से पीटा गया है. वे एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी हालत नाजुक बनी हुई है.

जेएनयू मामले पर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी ट्वीट किया. उन्होंने लिखा- 'युवाओं और छात्रों से इतनी नफरत क्यों? ये हैं शशिभूषण पांडेय. जेएनयू का एक दृष्टिहीन छात्र. दिल्ली पुलिस ने किस बर्बरता से इन्हें पीटा है आप खुद देखिए.



कौन हैं शशिभूषण समद?
शशिभूषण समद जेएनयू से स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज से मॉडर्न हिस्ट्री में एमए कर रहे हैं. वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के निवासी हैं. उन्हें बचपन में ग्लूकोमा की बीमारी थी, जिसकी वजह से उन्हें अपनी दृष्टि खोनी पड़ी. बनारस के एक ट्रस्टी स्कूल में पढाई करने के बाद उन्होंने बीएचयू से पढाई की. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए जेएनयू आ गए.

छात्र संघ चुनावों में बनाया इतिहास

शशिभूषण समद ने इस साल 17 सितंबर को जेएनयू छात्रसंघ चुनावों में इतिहास बनाया है. शशिभूषण ने JNSU के काउंसलर पद पर चुनाव जीता. उन्होंने 1479 वोट में से कुल 714 वोट हासिल किए. समद जेएनयू के पहले ऐसे विजुअली इम्पेयर्ड (दृष्टिहीन) छात्र हैं, जिन्होंने कोई चुनाव जीता है.

एक वायरल वीडियो ने दिलायी लोकप्रियता
जिस रोज़ जेएनयू चुनाव 2019 खत्म हुआ, उस दिन शशिभूषण समद ने एक नज़्म पढ़ी थी. नज़्म का नाम था ‘दस्तूर’. ये एक पाकिस्तानी इंकलाबी शायर हबीब ज़ालिब की नज़्म है. नज़्म गाते ही, समद सोशल मीडिया पर छा गए. उनका ये वीडियो खूब वायरल हुआ था.



जेएनयू छात्रों ने क्यों किया प्रदर्शन?
दरअसल, जेएनयू के छात्र हॉस्टल फीस में भारी इजाफे के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्र संघ की ओर से जारी पर्चे में कहा गया है कि फरवरी 2019 के सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक सेकेंड्री और हायर से 94,036 करोड़ रुपयों का इस्तेमाल नहीं किया गया. सीएजी रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि 7298 करोड़ रुपये रिसर्च और विकास कार्यों में खर्च होने थे जो नहीं हुए.

छात्रों का दावा है कि इसमें शुल्क वृद्धि, ड्रेस कोड और कर्फ्यू के समय को लेकर प्रावधान हैं. नियमावली बुधवार को कार्यकारी परिषद की बैठक में चर्चा के लिए रखी जा सकती है और अगर मंजूरी मिली तो उसे लागू कर दिया जाएगा.

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सोमवार को जेएनयू छात्रों ने संसद मार्ग तक मार्च निकाला.


कला एवं सौंदर्यशास्त्र विद्यालय के सदस्य अमित राज ने कहा कि छात्रों को 2,500 रुपये छात्रावास शुल्क देना होता है. वृद्धि के बाद उन्हें 4,200 रुपये का भुगतान करना होगा क्योंकि इसमें 1,700 रुपये का सेवाशुल्क भी जोड़ दिया है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा बिजली, सफाई और पानी का शुल्क भी जोड़ा जाएगा.

क्या है फीस का ड्राफ्ट?
प्रदर्शनकारी छात्र मसौदा छात्र नियमावली को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जिसमें 1,700 रुपये का सेवा शुल्क का प्रावधान है. साथ ही छात्रावास सिक्योरिटी के लिये ली जाने वाली राशि को 5,500 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये कर दिया गया है. हालांकि इसे बाद में वापस कर दिया जाता है.

सांसदों से क्या है मांग?
छात्र संघ ने देश के सांसदों से सवाल किया है कि बढ़ी हुई फीस पर वे साथ देंगे. क्या सभी के लिए वे पब्लिक फंडेड एजुकेशन की मांग करेंगे. क्या वे पब्लिक फंडेड एजुकेशन पर हो रहे प्रहार को रोकेंगे? छात्र संघ का कहना है कि छात्र आगे बढ़कर मांग करें साथ ही नीति निर्माताओं को इस बात का जवाब देने दें कि शिक्षा अधिकार है, विशेषाधिकार नहीं.

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First published: November 19, 2019, 11:53 AM IST
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