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महाराष्ट्र में बदले समीकरण के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार के पास क्या हैं विकल्प

Anil Rai | News18Hindi
Updated: November 23, 2019, 1:28 PM IST
महाराष्ट्र में बदले समीकरण के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार के पास क्या हैं विकल्प
एनसीपी प्रमुख शरद पवार के साथ उनके भतीजे अजित पवार

महाराष्ट्र (Maharashtra) में बीजेपी (BJP) ने एनसीपी नेता अजित पवार (Ajit Pawar) के साथ मिलकर सरकार का गठन कर लिया है. इस पूरे घटनाक्रम की खास बात ये रही कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) को इसकी भनक तक नहीं लगी.

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  • Last Updated: November 23, 2019, 1:28 PM IST
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नई दिल्ली. महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में शनिवार की सुबह बड़ा उलटफेर हुआ. बीजेपी (BJP) ने एनसीपी (NCP) नेता अजित पवार (Ajit Pawar) के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार (Government of Maharashtra) का गठन कर लिया है. बताया जा रहा है कि एनसीपी नेता अजित पवार ने अपने 25 से 30 विधायकों के साथ मिलकर बीजेपी को समर्थन दे दिया है. हालांकि एनसीपी के वरिष्‍ठ नेता नवाब मलिक (Nawab Malik) ने आरोप लगाया है कि उन्होंने विधायकों के हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल किया है. अजित पवार की बगावत से नाराज शरद पवार (Sharad Pawar) ने उन्हें एनसीपी विधायक दल के नेता पद से हटा दिया है.

अजित पवार के एनसीपी से बगावत के बाद सबसे अहम सवाल ये है कि आखिर अब एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार क्या करेंगे क्योंकि तकनीकी तौर पर भले ही शरद परवार पार्टी के अध्यक्ष हों लेकिनअजित पवार भी विधायकों के चुने हुए नेता हैं और उन्हें ये पूरा अधिकार है कि वो एनसीपी के 54 विधायकों के बारे में कोई भी फैसला लें. जब तक उन्हें विधानमंडल के नेता पद से हटाया नहीं जाता, उनके फैसले को एनसीपी के विधायकों का फैसला माना जाएगा. शरद पवार अगर अजित को पार्टी से निकाल भी देते हों तो उनके विधानमंडल दल के नेता कि स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा और उनके आदेश को ही विधायकों के लिए व्हिप माना जाएगा. इसके साथ ही उसका उल्लंघन करना पार्टी के विधायकों के लिए मुश्किल होगा. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अजित पवार को रोकने के लिए शरद पवार क्या-क्या कदम उठा सकते हैं.

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विधानमंडल की बैठक में तय होगा एनसीपी का भविष्य

अजित पवार को बेदखल करने के लिए शरद पवार को सबसे पहले पार्टी के विधायकों की बैठक बुलानी पड़ेगी और उसमें अजित पवार को नेता पद से हटाते हुए नए नेता का चुनाव करना होगा. यहां अहम सवाल ये है कि विधायकों की बैठक में कितने विधायक आते हैं. यदि आधे से कम विधायक बैठक में आते हैं तो अजित पवार को हटाना मुश्किल होगा और वही विधायक दल के नेता बने रहेंगे और गेंद विधानसभा अध्यक्ष के पाले में जाएगी. क्योंकि विधानसभा का गठन नहीं हुआ है और विधानसभा अध्यक्ष नहीं हैं. ऐसे में राज्यपाल को ये तय करना है कि विधानसभा में किसे असली एनसीपी माने और किसे बागी.

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अगर ये दाव चला तो बच सकती है एनसीपी
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देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को रोकने के लिए शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस को अपने विधायकों को संभाल कर रखना होगा और बीजेपी को विश्वास मत हासिल करने से पहले विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के मौके पर अपनी ताकत दिखानी होगी. अगर ये तीनों दल मिलकर विधासभा अध्यक्ष के चुनाव में बीजेपी और अजित पवार के गठबंधन को मात दे देते हैं तो एनसीपी के नए चुने हुए नेता को विधानसभा में विधानमंडल दल के नेता के रूप में मान्यता मिल सकती है और ऐसे में पार्टी को बचाया जा सकता है और विश्वासमत में नई सरकार को शिकस्त भी दी जा सकती है.

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First published: November 23, 2019, 12:53 PM IST
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