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केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद से क्या कर रहे हैं बीजेपी कांग्रेस और दूसरे राजनीतिक दल

केंद्र में सरकार के गठन के बाद पार्टियों के कार्यक्रम में बीजेपी सबपर भारी पड़ती दीख रही है

केंद्र में सरकार के गठन के बाद पार्टियों के कार्यक्रम में बीजेपी सबपर भारी पड़ती दीख रही है

बीजेपी ने सत्ता हासिल करने के तुरंत बाद सदस्यता अभियान शुरू कर दिया तो कांग्रेस अध्यक्षविहीन हो गई, यूपी में एसपी बीएसपी गठबंधन भी टूटा

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लोकसभा चुनाव नतीजे और केंद्र में सरकार बने अभी डेढ़ महीने भी नही हुए, लेकिन शुरुआत से बीजेपी इलेक्शन मोड़ में आ गयी है. वहीं दूसरी तरफ विपक्ष हताश है. बीजेपी ने शुरू की सदस्यता अभियान. चुनाव परिणाम के बाद बीजेपी ने सबसे पहले सदस्यता अभियान की शुरआत की है. 6 जुलाई यानी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जन्मदिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अभियान की शुरुआत की. बीजेपी का लक्ष्य पार्टी के सदस्यों की संख्या को 11 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ करने का है. बीजेपी इस सदस्यता अभियान के जरिए अपने सदस्यों की संख्या में 9 करोड़ का इजाफा करना चाहती है. बात सिलसिलेवार करे तो 30 मई को नरेंद्र मोदी ने अपने कैबिनेट मंत्रियों के साथ शपथ ली. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्रालय का कामकाज सौप दिया था. एक तरह गृह मंत्रालय तो दूसरी तरह पार्टी के कामकाज. लेकिन अमित शाह उसके बाद भी हर दिन पार्टी मुख्यालय आकर पदाधिकारियों के साथ बैठक करते रहे.

जेपी नड्डा बने बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष

पार्टी के रोज़मर्रा के कामकाज को देखते हुए पार्टी ने बड़ा फैसला लिया और जेपी नड्डा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया. जेपी नड्डा कार्यकारी अध्यक्ष बनते ही, लगातार महासचिवो से बैठक करते रहे और साथ ही अब तक ओड़ीसा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्रा और तेलंगाना जैसे राज्यो के कोर ग्रुप की बैठक की और आने वाले विधानसभा चुनाव के तैयारियों पर कमान कसी. एक तरफ संगठन को मजबूर करने के लिए सदस्यता अभियान चलता रहा तो दूसरी तरफ राज्यो के साथ बैठक कर चुनाव की तैयारी की गई. लेकिन इन दौरान दूसरी पार्टियों से बीजेपी में आने का सिलसिला चलता रहा. जेपी नड्डा सभी मोर्चा के साथ बैठकें भी की.

टीडीपी के सांसद बीजेपी में शामिल

टीडीपी में बड़ी सेंध लगी और राज्यसभा के 6 में से 4 सांसद बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी में शामिल होने वाले राज्यसभा सांसद हैं, टीजी वेंकटेश, सीएम रमेश, वाईएस चौधरीऔर जीएम राव. बीजेपी में दूसरी पार्टी से शामिल होने का सिलसिला जारी है, त्रिणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेता अब तक बीजेपी में शामिल हो चुके है. लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल बीजेपी के लिए अहम राज्य साबित हुआ था. भाटपारा की घटना पर बीजेपी ने टीम भी भेजी .

चुनाव के बाद भी बीजेपी ने पश्चिम बंगाल को प्राथमिकता वाले राज्यो पर रखा. पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा पर पार्टी ने तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राज्य में भेजा और उनसे राज्य में घट रही हिंसा पर रिपोर्ट तलब की. प्रनिधिमंडल में एसएस अहलूवालिया, सत्यपाल सिंह और बीड़ी राम थे.
150 किलोमीटर की यात्रा करेंगे सांसद

आगामी विधानसभा चुनाव और संगठन की मजबूती के लिए 7 जुलाई को जेपी नड्डा ने बीजेपी के सभी मोर्चा के साथ बैठक की. ये कहा जा सकता है कि सरकार बने भले ही अभी 40-45  दिन ना बीते हो लेकिन बीजेपी ने 40 से ज्यादा बैठके की और पार्टी की मजबूत करने के लिए कई फैसले लिए है. बात यही खत्म नही होती है. पीएम का निर्देश सांसद, विधायक और कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में 150 किलोमीटर की पदयात्रा करें 9 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में संसदीय दल की बैठक हुई, प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों, विधायको और कार्यकर्ताओ को महात्मा गाँधी की 150वी जयंती के अपने क्षेत्र में 150 किलोमीटर की पदयात्रा का निर्देश दिया है.

हार के बाद विपक्ष हताश

मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस अब तक हार का ग़म पचा नही पा रही है. कांग्रेस में इस्तीफों का दौर चल रहा है. हार के बाद कांग्रेस में इस्तीफे के होड़ लग गया है. राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर इस्तीफा दे दिया है. एक के बाद एक छोटे बड़े नेताओ का इस्तीफे देने का दौर जारी है. आलम ये है कि हार के बाद आज पार्टी का अध्यक्ष कौन है ये तक पता नही है. इस्तीफे के अलाम ये है कि कांग्रेस के विधायक अपने ही सरकार के खिलाफ इस्तीफा दे रहे है, हालात ये है कि आज कंर्नाटक में कांग्रेस जेडीएस की सरकार खतरे में है.

कर्नाटक फिर गोवा

हद तो तब हो गयी जब कर्नाटक के बाद गोवा में कांग्रेस के सामने संकट मंडराता दिख रहा है. गोवा में कांग्रेस के 15 में से 10 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है. सभी 10 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए है. इस्तीफे के बाद आज ना केवल राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी किसकी अगुवाई में चल रही है इसका पता नही, बल्कि कई राज्यो में प्रदेश अध्यक्ष का अता पता नही बचा है. राहुल गांधी जमानत के लिए लगा रहे है चक्कर. संघ मानहानि केस में राहुल गांधी मुम्बई के एक कोर्ट पहुचे जमानत ली. वहीँ सुशील मोदी के एक मामले में राहुल गांधी को पटना के अदालत पहुचना पड़ा और जमानत लेना पड़ा.

हार के बाद महागठबंधन टूटा

हार के बाद उत्तर प्रदेश में बना महागठबंधन तार तार हो चुका है. सपा प्रमुख अखिलेसग यादव को बीएसपी प्रमुख मायावती ने ठेंगा दिखा दिया है. महागठबंधन अब इतिहास के पन्नो पर दर्ज हो चुका है. लोकसभा चुनाव के हार का ठीकरा मायावती ने सपा के मत्थे फोड़ दिया है. सपा और बसपा के रास्ते अलग हो गए है. उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव होने है और बीएसपी अकेले चुनाव लड़ेगी. तो अगर पार्टी के तौर पर देखा जाय तो कहा जा सकता है कि बीजेपी सत्ता पाकर भी संघर्ष में लगी है जबकि विपक्षी दल सत्ता गंवा कर भी आपस में ही संघर्ष करते दीख रहे हैं.

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