आम्रपाली-यूनिटेक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, इन 23 लाख घर खरीदने वालों के लिए जगी आस

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का जिम्मा एनबीसीसी को सौंपा है.

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Updated: July 30, 2019, 5:44 AM IST
आम्रपाली-यूनिटेक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, इन 23 लाख घर खरीदने वालों के लिए जगी आस
आम्रपाली और यूनिटेक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 23 लाख घर खरीदने वालों के लिए उम्मीद जगी है (फाइल फोटो)
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Updated: July 30, 2019, 5:44 AM IST
पिछले कुछ दिनों से रियल स्टेट की बिक्री में पिछले कुछ सालो में 6 से 7% की दर से बढ़ोत्तरी होती रही है. माना जा रहा है ऐसे में बड़ी संख्या में न बिके हुए रियल स्टेट के खत्म होने में कम से कम 40 महीने का समय लगेगा. रियल स्टेट सेक्टर में बढ़ी कीमतों और मांग में आई कमी के चलते पूरे भारत में करीब 23 लाख घरों का निर्माण रुका हुआ है. रियल स्टेट कंसल्टेंसी लाएसेस फोरास के अनुसार, देशभर में ऐसे यूनिट 16,330 प्रोजेक्ट्स में फैले हुए हैं.

जानकारों ने इसके पीछे कोई एक वजह न होने की बात नहीं कही है. यह एक सिस्टमैटिक वजह है. यह सेक्टर दलदल में फंसा हुआ है और इसके फंसे होने का एक फैक्टर, दूसरे फैक्टर से जुड़ा हुआ है. ऐसे में एक में देरी होने से पूरी प्रक्रिया में देरी होती है.

राज्यों के कानून के अनुसार प्रोजेक्ट पास होने में लगता है वक्त
प्रोजेक्ट के पास होने में होने वाली देर एक और वजह है जिसके चलते समय से घरों के पूरा होने में देर हो रही है. जानकार बताते हैं कि किसी प्रोजेक्ट की अनुमति मिलने में ही करीब 6 महीने का वक्त लग जाता है. हालांकि भूमि राज्यों का विषय है ऐसे में राज्यों के अनुसार अनुमति मिलने के वक्त में भी बदलाव आता है.

लंबे वक्त से रियल स्टेट इंडस्ट्री में सिंगल विंडो क्लियरेंस की मांग रही है. लेकिन इस मांग पर अभी तक कोई खास प्रगति नहीं हो सकी है. ऐसे में अगर किसी भी वजह से किसी प्रोजेक्ट में देरी आती है तो यह अव्यवहारिक स्थिति में पहुंच जाता है. यहां पर सप्लाई बहुत ज्यादा है और ग्राहकों के पास बहुत सारे विकल्प उपलब्ध हैं."

लेट प्रोजेक्ट्स में से 80% दिल्ली और मुंबई में
इन कुल 16,330 प्रोजेक्ट्स में से 877 पिछले चार सालों से लेट हो रहे हैं. 4346 प्रोजेक्ट्स पिछले 1 से 2 सालों में लेट हुए हैं. ज्यादातर लेट हुए प्रोजेक्ट्स RERA कानून से पहले के हैं. इनमें से कई प्रोजेक्ट्स अब आर्थिक रूप से मुनाफे का सौदा भी नहीं रह गए हैं. इसके अलावा इन प्रोजेक्ट्स के पूरे होने में देरी की वजह है घटती मांग और पूंजी की कमी और बढ़ती ब्याजदर.
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2018 में आई रियल्टी कंसल्टेट एनारॉक की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में जितने प्रोजेक्ट्स लेट चल रहे हैं, उनमें से करीब 80% केवल मुंबई और दिल्ली में हैं.

दिल्ली-मुंबई में सबसे ज्यादा हैदराबाद में सबसे कम घर
मुंबई मेट्रोपॉलिटिन रीजन और दिल्ली नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) को मिलाकर कुल 3.6 लाख घरों का बनना रुका हुआ है. 2013 में या उससे पहले शुरू हुए 4.64 लाख करोड़ कीमत के 5.76 लाख करोड़ के घर हैं जो कि RERA कानून के बावजूद आज भी पूरे होने बाकी हैं.

इस रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे सबसे कम प्रोजेक्ट हैदराबाद में हैं. यहां पर देर से चल रहे प्रोजेक्ट्स में 5,500 करोड़ कीमत के 8,900 घरों शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक चेन्नई में ऐसे 10000 घर देरी से बन रहे हैं, जिनकी कीमत 6,500 करोड़ है.

सुप्रीम कोर्ट अधूरे प्रोजेक्ट्स को लेकर हुआ है गंभीर
यूनिटेक के घर खरीदारों को भी सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिलने वाली है. आम्रपाली के बाद अब यूनिटेक के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का जिम्मा भी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NBCC) को मिल सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने NBCC को प्रोजेक्ट सौंपने के संकेत दिए हैं. बता दें कि इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का जिम्मा एनबीसीसी को सौंपा है.

लेट हो रहे और प्रोजेक्ट्स भी NBCC को दिए जाने की बात चल रही है. NBCC का पूरा नाम नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन है. यह एक पीएसयू है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते देश भर में लंबित प्रोजेक्ट शिकंजा कसने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को (RERA) रेरा और अन्य कानून के तहत इन सभी बिल्डर्स पर सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के मंत्रालय और आला अधिकारियों को अपने यहां अधूरे प्रोजेक्ट्स की जानकारी देने का आदेश दिया था.

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First published: July 30, 2019, 5:44 AM IST
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