लाइव टीवी

अयोध्या विवादः मध्यस्थता पैनल के फैसले से नहीं बनी बात तो क्या है रास्ता, जानिए सबकुछ

एहतेशाम खान | News18Hindi
Updated: March 8, 2019, 3:31 PM IST
अयोध्या विवादः मध्यस्थता पैनल के फैसले से नहीं बनी बात तो क्या है रास्ता, जानिए सबकुछ
पैनलिस्ट को कैसे चुनता है कोर्टः मध्यस्‍थता का चयन एक न्यायिक प्रकिया है. कोर्ट आम तौर पर ऐसे अनुवभी और कुशल लोगों की एक सूची रखता है्, जो बड़े विवादों की गहरी समझ रखते हों. मसलन- कश्मीर विवाद, अयोध्या विवाद. आवश्यकता पड़ने पर कोर्ट अपनी उसी लिस्ट से कुछ लोगों को यह खास जिम्मेदारी एक निश्‍चित अवधि के लिए देती है.

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्‍या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए मध्‍यस्‍थता के आदेश दे दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्‍या मामले को सुलझाने के लिए पैनल गठित करने के आदेश दिए हैं.

  • Share this:
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्‍या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए मध्‍यस्‍थता के आदेश दे दिए हैं. इसके लिए तीन सदस्‍यीय पैनल का गठन कर दिया गया है. अब ये भी जानना जरूरी है कि आखिर मध्‍यस्‍थता पैनल इस मसले पर काम कैसे करेगा. सबसे पहले पैनल के सदस्‍य अपना कार्यभार फैजाबाद में संभालेंगे. सभी पैनल के सदस्‍यों को राज्‍य सरकार की ओर से ऑफिस और दूसरी सुविधाएं उपलब्‍ध कराई जाएंगी.

पैनल इस मामले में शामिल सभी पक्षकारों को अपनी राय देने के लिए आमंत्रित करेगा. सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष से आठ और हिंदू पक्ष से आठ पक्षकार शामिल होंगे. इसके अलावा रामलला विराजमान भी एक पक्षकार हैं. इस पूरे मामले में राज्य सरकार एक रिसीवर कि भूमिका में मौजूद रहेगी. सभी पक्षकार अपनी-अपनी राय पैनल को देंगे. बताया जा रहा है कि पहले इस मामले में अलग-अलग बात की जाएगी. फिर पैनल सभी पक्षकारों को या कुछ पक्षकारों को साथ बैठकर बात करेगा.

इसे भी पढ़ें :- जानिए कौन हैं श्री श्री रविशंकर, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने बनाया राम मंदिर का मध्यस्थ

कई राउंड की बातचीत के बाद एक या एक से ज़्यादा फॉर्मूला बनाया जाएगा. ऐसा फॉर्मूला जो सभी या ज़्यादातर पक्षों को स्वीकार्य हो. ये भी हो सकता है कि इस दौरान पैनल के सामने कोई फॉर्मूला ही न बन पाए. पैनल की ओर से जो भी नतीजा निकाला जाएगा उसकी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी जाएगी. अगर सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि किसी एक फार्मूले पर ज़्यादातर पक्षकार सहमत हैं तो उस पर कोर्ट अपनी मुहर लगा देगा. कोर्ट की मुहर लगने के बाद वह सभी को मान्य होगा. अगर कोई सहमत न हो तो पुनर्विचार याचिका के ज़रिए कोर्ट के फैसले को चुनौती दे सकता है. सुप्रीम कोर्ट मध्‍यस्‍थता को खत्म करके इस मामले में दाखिल अन्‍य याचिकाओं की सुनवाई करेगा.

इसे भी पढ़ें :- फैजाबाद में होगी मध्‍यस्‍थता की बैठक, ये हैं सुप्रीम कोर्ट आदेश की पांच बड़ी बातें

बता दें सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन सहित 67 एकड़ जमीन पर यथास्थिति बनाने को कहा था. लेकिन, केंद्र के इस स्टैंड के बाद अयोध्या में विवादित स्थल का मामला सिर्फ 0.313 एकड़ भूमि तक ही अटक कर रह गया है. दरअसल, 1993 में केंद्र सरकार ने अयोध्या अधिग्रहण एक्ट के तहत विवादित स्थल समेत आस-पास की करीब 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था. सुप्रीम कोर्ट ने इसी पर यथास्थिति बनाए रखने की बात कही थी.

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास,सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 8, 2019, 2:26 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...