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आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जेटली ने दिया नया कानून बनाने का इशारा

वित्त मंत्री अरुण जेटली और कानून व विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद

वित्त मंत्री अरुण जेटली और कानून व विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद

आधार कार्ड पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अरुण जेटली ने आश्वासन दिया कि सरकार का इरादा इस फैसले को पूरी तरह से लागू करने का है, लेकिन जहां भी गुंजाइश है, वहां अपने विकल्पों का पता लगाएंगे.

  • News18Hindi
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    वित्त मंत्री अरुण जेटली और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आधार कार्ड पर आए फैसले के बाद प्राइवेट सेक्टर को आधार से जोड़ने के लिए नया कानून बनाने की तरफ इशारा किया है. जेटली ने आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘ऐतिहासिक’ करार देते हुए बुधवार को कहा कि सरकारी योजनाओं को वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाने से सरकार को सालाना 90,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है. उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसले के बाद कांग्रेस को मुंह छिपाना पड़ रहा है.

    सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को शाश्वत नहीं माना जा सकता है, यह कहते हुए जेटली ने कहा कि उन्होंने पूरा फैसला नहीं पढ़ा, पर इस बारे में उनकी यह समझ है कि सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी आधार के अभाव में 12 अंकों वाली विशिष्ट पहचान संख्या के मोबाइल फोन कंपनियों जैसी निजी इकाइयों के उपयोग पर रोक लगाई है.

    जेटली ने आश्वासन दिया कि सरकार का इरादा इस फैसले को पूरी तरह से लागू करने का है, लेकिन जहां भी गुंजाइश है, वहां अपने विकल्पों का पता लगाएंगे.

    वित्त मंत्री ने कहा, ‘आधार कानून की धारा 57 (जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार दिया) कहता है कि विशेष अधिकार के तहत अन्य इकाइयों को आधार के उपयोग की अनुमति दी जा सकती है. मैं आपको फैसले के बारे में अपनी जानकारी दे सकता हूं. जब तक इसे कानून से समर्थन नहीं मिलता है, यह स्वीकार्य नहीं है. फैसले से यही समझ आता है.’

    प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि आधार संवैधानिक रूप से वैध है. हालांकि पीठ ने बैंक खातों को आधार से जोड़ने, मोबाइल फोन कनेक्शन और स्कूल में एडमिशन के लिये विशिष्ट पहचान संख्या की अनिवार्यता खत्म कर दी है.

    सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में आयकर रिटर्न और स्थायी खाता संख्या (पैन) से आधार जोड़ने के प्रावधान को बरकरार रखा है. फैसले के बाद आधार को बैंक खातों और मोबाइल फोन से जोड़ने की आवश्यकता के बारे में पूछे जाने पर जेटली ने कहा यह फैसले को बिना पढ़े पूछा गया प्रश्न है.

    जेटली ने कहा, ‘पहले फैसले को पढ़ने दीजिए. दो-तीन क्षेत्र प्रतिबंधित हैं. क्या वे पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हैं या उन्हें इसके लिए कानूनी समर्थन की जरूरत है इस बारे में अभी कुछ नहीं पता. इसीलिए मैं सामान्य रूप से यही कहूंगा कि इन निजी इकाइयों के मामले में कानूनी समर्थन की जरूरत है. यह मेरी समझ है. मैंने अभी विस्तार से फैसले को नहीं देखा है.’

    उनके सहयोगी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अदालत ने यह कहा है कि सभी नागरिकों को आधार देना कानूनी रूप से सही है और इससे निगरानी संभव नहीं है.

    जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेस में कहा, ‘यह ऐतिहासिक निर्णय है. शीर्ष अदालत ने तकनीक की महत्ता को बरकरार रख साफ कर दिया है कि इसके आलोचकों का विरोध सही नहीं है.’

    कांग्रेस के इस आरोप पर कि आधार के निजी उपयोग को हटाना सरकार के चेहरे पर तमाचा है, वित्त मंत्री ने कहा, ‘विपक्षी पार्टी जब सत्ता में थी तब उसने बिना किसी कानून या नियाम के इसे शुरू कर दिया था.'

    जेटली ने कहा, ‘निश्चित रूप से कांग्रेस को मुंह छिपाना पड़ रहा है. वो आधार लेकर आए लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि उन्हें करना क्या था.'

     

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