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अमेरिका-तालिबान शांतिवार्ता बंद होने के बाद भारत की अपील, अफगानिस्तान के लिए आवाज उठाए UN

भाषा
Updated: November 28, 2019, 8:17 PM IST
अमेरिका-तालिबान शांतिवार्ता बंद होने के बाद भारत की अपील, अफगानिस्तान के लिए आवाज उठाए UN
भारत ने यूएन से अपील की है कि वह अफगानिस्तान के लिए आवाज उठाए (सांकेतिक फोटो, Reuters)

अफगानिस्तान (Afghanistan) ने इस साल आजादी (Independence) के 100 साल पूरे किए, जो शांति प्रयासों से संबंधित घटनाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया (Democratic Process) के एकीकरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है.

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संयुक्त राष्ट्र. भारत (India) ने इस बात पर जोर दिया है कि अफगानिस्तान (Afghanistan) में निर्वाचित प्रतिनिधियों (Elected Representatives) को देश का भविष्य तय करने की दिशा में अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए. साथ ही भारत ने कहा कि वह सुझाव देने में विश्वास नहीं करता. भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका-तालिबान शांति प्रक्रिया (US-Taliban Peace Process) बंद पड़ी है.

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव विदिषा मैत्रा ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय (International), क्षेत्रीय एवं घरेलू स्तरों पर औपचारिक शांति प्रक्रिया की दिशा में की गई विभिन्न पहलों द्वारा सृजित अवसरों का स्वागत करता है.

'अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर करने चाहिए प्रयास'
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव विदिषा मैत्रा ने अफगानिस्तान (Afghanistan) में स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा, 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन प्रयासों के समर्थन में एकजुट होना चाहिए लेकिन हम सुझाव देने में यकीन नहीं करते. किसी भी देश में, उसका भविष्य निर्धारित करने में वहां के लोगों और निर्वाचित प्रतिनिधियों की आवाज मुखर होनी चाहिए- यह अफगानिस्तान के साथ भारत के संबंधों में उसके मार्गदर्शक सिद्धांतों में से एक रहा है.'

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान ने इस साल आजादी के 100 साल पूरे किए, जो शांति प्रयासों से संबंधित घटनाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया (Democratic Process) के एकीकरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है.

अफगानिस्तान की उपलब्धियों को संरक्षित करने की जरूरत
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव विदिषा मैत्रा ने ध्यान दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का विचाराधीन मसौदा प्रस्ताव अफगान नीत, अफगान स्वामित्व और अफगान नियंत्रित शांति प्रक्रिया के महत्व पर जोर डालता है. साथ ही वह पिछले दो दशक की उपलब्धियों खासकर अनेकत्व, नागरिक स्वतंत्रता, महिला अधिकार (Women Rights) और बच्चों की शिक्षा आदि के क्षेत्र में हासिल लाभ को संरक्षित रखने के महत्व को दोहराता है.
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उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि एकमात्र टिकाऊ समाधान उसके पास होगा जिसके पास राजनीतिक जनादेश है, जिससे स्थिरता सुनिश्चित होगी, और सबसे अहम है कि आतंकवादियों (Terrorists) एवं उनके प्रतिनिधियों के लिए बिना शासन वाले स्थान न छोड़े जो वो बर्बाद नहीं कर सके.

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First published: November 28, 2019, 8:17 PM IST
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