मजबूत सेना: इंडियन एयर फ़ोर्स को अपाचे-राफेल मिलने के बाद, नेवी को मिली ये सबमरीन

भारतीय नौसेना (Indian Navy) के पास फ़िलहाल 16 सबमरीन(Submarine) है. जिनमें 2 न्यूक्लियर सबमरीन आईएनएस चक्रा और आईएनएस अरिहंत हैं.

Sandeep Bol | News18Hindi
Updated: September 6, 2019, 4:23 PM IST
मजबूत सेना: इंडियन एयर फ़ोर्स को अपाचे-राफेल मिलने के बाद, नेवी को मिली ये सबमरीन
इस सबमरीन के शामिल होने के बाद खासा ताकतवर हो जाएगी भारतीय नौसेना. (सांकेतिक तस्वीर)
Sandeep Bol
Sandeep Bol | News18Hindi
Updated: September 6, 2019, 4:23 PM IST
भारतीय सेना (Indian Army) इस वक्त अपने आधुनिकरण कई दौर से गुजर रही है. थल सेना में नए रायफल से लेकर आर्टेलरी तोपें ली जा रही है तो भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) में चिनूक अपाचे और रफाल जैसे एयरक्राफ़्ट शामिल हो रहे है. नेवी में भी आधुनिकीकरण ज़ोरों पर है.

नेवी की सबमरीन (Submarine) पावर को और बढ़ाने के प्रोजेक्ट 75 के तहत एक और सबमरीन भारतीय नौसेना (Indian Navy)  में शामिल हो रही है. कलवरी क्लास की सबमरीन इस महीने की 28 तारीख़ को भारतीय नौसेना में आधिकारिक तौर पर शामिल हो जाएगी. इस अटैक सबमरीन का नाम है आईएनएस खंडेरी. कलवरी क्लास की ये डीज़ल इलैक्ट्रिक अटैक सबमरीन के आने से नौसेना की ताक़त में ख़ासा इज़ाफ़ा होगा.

फ़िलहाल 16 सबमरीनों में  2 न्यूक्लियर सबमरीन हैं
स्कॉर्पीन क्लास या कहें कलवरी क्लास सबमरीन फ़्रांस की डीसीएनएस की मदद से मजगांव डॉक में तैयार हो रही है. भारती नौसेना में कुल 6 सबमरीन शामिल होनी है. इन 6 में से एक आईएनएस कलवरी साल 2017 में नौसेना में शामिल हो चुकी है और दूसरी इसी महीने मुंबई में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह नेवी को समर्पित करेंगे.

सी सीरीज़ की तीसरी सबमरीन आईएनएस करंज परिक्षण के लिए पहले ही समुद्र में जा चुकी है. 4 और डीज़ल इलैक्ट्रिक अटैक कलवरी क्लास सबमरीन भारतीय नौ सेना में 2022-2023 तक शामिल होने की उम्मीद है. भारतीय नौसेना के पास फ़िलहाल 16 सबमरीन है. जिनमें 2 न्यूक्लियर सबमरीन आईएनएस चक्रा और आईएनएस अरिहंत हैं.

सबमरीन की ख़ासियत
कलवरी क्लास की सबमरीन में हथियार लॉन्चिंग ट्यूब लगी है और ये सबमरीन बोर्ड में हथियार भी लेकर जा सकती है जिन्हें समुद्र के अंदर फिर से लोड किया जा सकता है. इस सबमरीन 6 x 533 मिमी टॉर्पेडो ट्यूबों से लैस है जिसमे 18 एंटी शिप मिसाइल लोड की जा सकती है.
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चूंकि डीज़ल इलेक्ट्रिक सबमरीन को बैटरी चार्ज के लिए हर दो दिन में सतह के पास आना जरूरी होता है और महज 4-5 घंटे में अपनी बैटरी को चार्ज कर के से सबमरीन फिर से गहरे समुद्र में गोता लगा देती है. खास बात तो ये है की समुद्र में 30 मीटर की गहराई तक पहुंचने के बाद इसका पता लगा पाना मुश्किल हो जाता है और अधिकतम 350 मीटर तक ये गोता लगा सकती है हालांकि रमाणु इंधन से चलने वाली आईएनएस अरिहंत और आईएनएस चक्रा लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकती है.

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First published: September 6, 2019, 3:20 PM IST
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