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नेत्रहीन होने के बावजूद इन बेस्ट फ्रेंड्स ने टॉप की यूनिवर्सिटी, अब UPSC की तैयारी में जुटे

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Updated: December 1, 2019, 12:00 AM IST
नेत्रहीन होने के बावजूद इन बेस्ट फ्रेंड्स ने टॉप की यूनिवर्सिटी, अब UPSC की तैयारी में जुटे
गजराज, प्रदीप कुमार और नित्यानंद (बाएं से दाएं)

ये तीनों ही युवा मूडबिद्री (Mudbidri) के अल्वा कॉलेज के छात्र थे. तीनों ही मंगलौर यूनिवर्सिटी (Mangalore University) से देख सकने वाले छात्रों के साथ अपनी बैचलर डिग्री (Bachelor degree) की पढ़ाई कर रहे थे.

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  • Last Updated: December 1, 2019, 12:00 AM IST
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(स्टेसी परेरा)

बंगलुरू. मंगलौर यूनिवर्सिटी (Mangalore University) से स्टूडेंट्स की इस तिकड़ी के लिए बैचलर ऑफ सोशल वर्क (Bachelor of Social Work) की परीक्षा में पहली तीन रैंक हासिल कर लेना कोई आसान काम नहीं था. तीन नेत्रहीन दोस्तों नित्यानंद, गुरुराज और प्रदीप तीनों स्कूल के दिनों से साथ पढ़ते आ रहे हैं और फिलहाल वे इस दोस्ती को खत्म करने के मूड में भी नहीं हैं. अब वे सम्मानित यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) परीक्षा की तैयारी में लगे हुए हैं.

हालांकि कई परीक्षाओं (Results) के नतीजे तो जुलाई में ही आ गए थे लेकिन 2018-19 में इन तीन लड़कों को अपना नाम नतीजों में टॉपर्स (Toppers) के तौर पर देखकर आश्चर्य हुआ.

'फैकल्टी ने लगातार दिलाया उत्साह'

ये तीनों ही युवा मूडबिद्री (Moodbidri) के अल्वा कॉलेज के छात्र थे. तीनों ही मंगलौर यूनिवर्सिटी से देख सकने वाले छात्रों के साथ ही अपनी बैचलर डिग्री की पढ़ाई कर रहे थे.

नित्यानंद अपने कॉलेज को लगातार प्रेरणा देने के लिए धन्यवाद कहते हैं और बताते हैं, हमारी फैकल्टी ने हमें लगातार बहुत ज्यादा उत्साह दिलाया. उन्होंने हमारी स्क्रीन पढ़ने वाले सॉफ्टवेयर (Screen-Reading Software) के जरिए मदद की और हमारी पढ़ाई को आसान बनाया.

गणित, विज्ञान में रुचि रखते थे गजराज
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गजराज जो कि एक सुपारी की खेती करने वाले पिता के बेटे हैं और बेल्थानगढ़ी से आते हैं. वे कहते हैं कि वे हमेशा ही गणित (Maths) और विज्ञान में रुचि रखते थे लेकिन सातवीं कक्षा के बाद बहुत कम ही नेत्रहीन विद्यालय इन विषयों को पढ़ाते हैं.

उन्होंने कहा, नेत्रहीन होने के चलते, हम कई बार प्रोत्साहित होते हैं कि हम समाजविज्ञान (Social Science) को विषय के तौर पर चुनें. लेकिन जब हम सिविल सर्विसेज की परीक्षाओं के लिए पढ़ते हैं तो हमें हर बात जाननी होती है. तो हमारा फील्डवर्क भी जो हमने बैचलर ऑफ सोशल वर्क के दौरान किया हमारे काम आएगा.

ये तीनों ही वर्तमान में कम्प्यूटर के प्रयोग की ट्रेनिंग ले रहे हैं. साथ ही ये कई हल्की-फुल्की स्किल भी डॉ रेड्डी फाउंडेशन से सीख रहे हैं. तीनों ही गरीब परिवारों से आते हैं और इन छात्रों का संघर्ष कई लोगों के लिए प्रेरणा बना है. तीनों ही मैसूर के एक IAS कोचिंग इंस्टीट्यूट में फिलहाल पढ़ाई कर रहे हैं.

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First published: December 1, 2019, 12:00 AM IST
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