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म्यांमार में भारी हिंसा, 19 पुलिसवाले भागकर भारत पहुंचे, शरण की मांग

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट.

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट.

Myanmar Coup: म्यांमार में सेना ने 1 फरवरी को तख्तापलट किया और देश की शीर्ष नेता आंग सान सू ची समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया था.

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नई दिल्ली. म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद तेजी से बिगड़ते हालात के बीच वहां के करीब 19 पुलिस अधिकारियों ने सीमा पार कर भारत में प्रवेश किया और अब वे यहां शरण देने की मांग कर रहे हैं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी. ये सभी लोग म्यांमार की सीमा से लगने वाले उत्तर-पूर्वी राज्य मिजोरम के दो जिलों चम्पाई और शेरचिप के जरिए भारत में घुसे. अधिकारी ने कहा कि सभी लोग निचले रैंक वाले पुलिस ऑफिसर हैं और जब ये भारत की सीमा में आए, तो इनके पास कोई हथियार नहीं था. अधिकारी ने खुफिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा कि हमें उस पार से और लोगों के आने की उम्मीद है.


पुलिस अधिकारी ने बताया कि सीमा पार से आए पुलिसकर्मियों ने कहा कि उन्होंने म्यांमार की सेना के कुछ आदेशों को मानने से इनकार कर दिया था जिसके बाद वे उनका पीछा कर रहे थे और फिर उन्हें अपना देश छोड़कर भागना पड़ा. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि सेना ने उन्हें क्या आदेश दिए थे जिसे उन्होंने मानने से इनकार कर दिया था. अधिकारी ने कहा कि जब म्यांमार से आए पुलिसकर्मियों को भारतीय क्षेत्र में पकड़ा गया, तो वे सामान्य कपड़े पहने हुए थे और बिना हथियार के थे.


सीमा पार से आए एक पुलिस अधिकारी जिसने अपना नाम लालनुनजिरा बताया, ने कहा कि उनमें से तीन पुलिसकर्मियों ने 3 मार्च की दोपहर को लुंगकावाला गांव के नजदीक भारतीय सीमा में प्रवेश किया. यह गांव म्यांमार की सीमा से 13 किलोमीटर (8 मील) दूर है. भारत 1643 किलोमीटर (1020 मील) की लंबी सीमा म्यांमार के साथ साझा करता है. म्यांमार से आए हजारों शरणार्थियों के लिए भारत घर बना हुआ है. ये वे लोग हैं जो म्यांमार के विभिन्न राज्यों में अलग-थलग पड़े हुए थे और बेहतर जिंदगी की तलाश में थे.


म्यांमार में तख्तापलट के खिलाफ 3 मार्च को प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कम से कम 33 लोगों की मौत हो गई. इसके अलावे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने कहा कि 28 फरवरी को सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कम से कम 18 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी. तख्तापलट के बाद से जारी प्रदर्शनों में अभी तक कुल 50 लोग मारे गए हैं और कई लोग घायल भी हुए हैं. म्यांमार में एक फरवरी को तख्तापलट के बाद से प्रदर्शनकारी लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. लोग, आंग सान सू ची समेत अन्य नेताओं को रिहा किए जाने की मांग कर रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि म्यांमार में सेना ने 1 फरवरी को तख्तापलट किया और देश की शीर्ष नेता आंग सान सू ची समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया था. सेना के स्वामित्व वाले टेलीविजन चैनल ‘मयावाडी टीवी’ पर 1 फरवरी की सुबह यह घोषणा की गई कि सेना ने एक साल के लिए देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है.


सेना ने कहा है कि सरकार पिछले साल हुए चुनाव में धांधली के आरोपों की जांच करने में नाकाम रही, जिस वजह से सेना को दखल देना पड़ा. इस चुनाव में सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी की जबर्दस्त जीत हुई थी. हालांकि, चुनाव आयोग ने किसी भी धांधली से इनकार किया है.

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