#AgendaGujarat: अल्पेश बोले- BJP का झंडा पकड़ने पर ही अच्‍छा काम होता है

अल्पेश ठाकोर ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा महिला उम्मीदवारों को चुनाव में उतारने की कोशिश रहेगी

News18.com
Updated: November 14, 2017, 9:18 PM IST
#AgendaGujarat: अल्पेश बोले- BJP का झंडा पकड़ने पर ही अच्‍छा काम होता है
[अल्पेश ने कहा कि मैं देख रहा हूं कैसे लोगों की जरूरतों और अधिकार की बात करने को जातिवाद का चोला पहनाकर देखा जा रहा है]
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Updated: November 14, 2017, 9:18 PM IST
अहमदाबाद में #AgendaGujarat कार्यक्रम में गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी समेत सभी प्रमुख पार्टियों के नेता ने राज्य के भविष्य को लेकर चर्चा की.

इस कार्यक्रम में कार्यक्रम में कांग्रेस नेता अल्पेश ठाकोर ने कहा कि उन्‍हें बड़े दुख से कहना पड़ रहा है कि अगर आपको कुछ अच्छा काम करवाना है तो आपको भाजपा का झंडा पकड़ना होगा.

अल्पेश ठाकोर से जब पूछा गया कि उन्हें ओबीसी नेता कहा जाए या कांग्रेस नेता, इसके जवाब में उन्होंने कहा, एक नेता का काम क्या है, हर तबके की आवाज को एक भाषा देना. भले ही मैं ओबीसी की बात करता हूं, भले ही मैं बेरोजगार की बात करता हूं, या मैं शराब पाबंदी की बात करता हूं, भले ही मैं शिक्षा की बात करता हूं, पर बात तो गुजरात की ही करता हूं न. तो क्या इन सब की मांग करने को जातिवाद का चोला पहनाना सही है?

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उन्होंने कहा, 'मैं देख रहा हूं कैसे 15 दिनों से लोगों की जरूरतों और अधिकार की बात करने को जातिवाद का चोला पहनाकर देखा जा रहा है.'

अल्पेश ठाकोर ने गिनी बेन के किस सीट से चुनाव लड़ने के मामले में दिए विवादित बयान के जवाब में कहा, गर्म खून है आवेश में कुछ बोल दिया.

अल्पेश ने कहा कि वे रतनपुर या वीरमगांव से चुनाव लड़ेंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो और उनके पिता दोनों इस साल चुनाव नहीं लड़ेंगे.



चुनाव में महिला आरक्षण की बात पर अल्पेश ठाकोर ने बताया, 'मैं नंबर तो नहीं बता सकता लेकिन ज्यादा से ज्यादा महिला उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाने की कांग्रेस पार्टी की कोशिश रहेगी.'

इस मौके पर कांग्रेस नेता सिद्धार्थ पटेल ने कहा कि जब भी कोई ऐसा मुद्दा आया है जिससे जनता को नुकसान हुआ है, गुजरात की कांग्रेस ने वो मुद्दे उठाए हैं. गुजरात कांग्रेस ने जनता के लिए आंदोलन किए हैं. पार्टी हमेशा गुजरात की जनता के साथ खड़ी रही है.

सिद्धार्थ पटेल ने आगे कहा कि गुजरात सरकार ने पिछले 2002 से 2015 तक बड़े उद्योगों को सब्सिडी दी, लेकिन छोटे उद्योगों को सहयोग नहीं दिया.

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