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कौन हैं संत बाबा राम सिंह, आखिरी नोट में उन्होंने किसान आंदोलन के लिए क्या लिखा

संत बाबा राम सिंह सिखों की नानकसर संप्रदाय से जुड़े हुए थे.
संत बाबा राम सिंह सिखों की नानकसर संप्रदाय से जुड़े हुए थे.

संत बाबा राम सिंह (Sant Baba Ram Singh) का डेरा करनाल (Karnal) जिले में निसंग के पास सिंगड़ा गांव में है. दुनियाभर में उन्हें सिंगड़ा वाले बाबा जी के नाम से ही जाना जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 17, 2020, 10:17 AM IST
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नई दिल्ली. नए ​कृषि कानून (Agricultural law) को लेकर किसानों और केंद्र सरकार के बीच​ विवाद जारी है. किसान आंदोलन (Kisan Andolan) के बीच संत बाबा राम सिंह (Sant Baba Ram Singh) की आत्महत्या की खबर ने हर किसी को सकते में डाल दिया है. संत बाबा राम सिंह का डेरा करनाल जिले में निसंग के पास सिंगड़ा गांव में है. दुनियाभर में उन्हें सिंगड़ा वाले बाबा जी के नाम से ही जाना जाता है. बाबा राम सिंह पंजाब और हरियाणा के अलावा विश्वभर में प्रवचन करने के लिए जाया करते थे.

संत बाबा राम सिंह सिखों की नानकसर संप्रदाय से जुड़े हुए थे. नानकसर संप्रदाय में संत बाबा राम सिंह का बहुत ऊंचा स्थान था. जब से किसान आंदोलन की शुरुआत हुई थी उस वक्त से ही बाबा राम सिंह किसान आंदोलन से जुड़ी हर छोटी बड़ी जानकारी हासिल कर रहे थे. उनके आसपास रहने वाले उनके शिष्यों के मुताबिक बाबा किसान आंदोलन को लेकर काफी दुखी रहते थे. यही कारण है कि उन्होंने खुद को गोली मार ली. उन्हें घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी मौत हो गई.

संत बाबा राम सिंह ने खुद को गोली मारने से पहले डायरी में एक नोट लिखा था. इस नोट में उन्होंने लिखा, 'मैंने किसानों का दुख देखा है. अपने हक के लिए उन्हें सड़क पर इस तरह से देखकर मैं काफी दुखी हूं. सरकार किसानों को न्याय नहीं दे रही है, जो कि जुल्म है. जो जुल्म करता है वह पापी है और जो जुल्म सहता है वह भी पाप का भागी है.'
संत बाबा राम सिंह ने लिखा, 'किसी ने किसानों के हक के लिए तो किसी ने किसानों पर हो रहे जुल्म के लिए कुछ न कुछ किया है. किसी ने पुरस्कार वापस कर सरकार को अपना गुस्सा दिखाया है. सरकार के इस जुल्म के बीच सेवादार आत्मदाह करता है. यह जुल्म के खिलाफ एक आवाज है. यह किसानों के हक के लिए आवाज है वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरुजी की फतेह.'



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अकाली दल हरियाणा के प्रदेश प्रवक्ता कंवलजीत सिंह अजराना ने बताया कि गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर उनके निवास स्थान निसंग के पास सिंगड़ा गांव के डेरे में दर्शनों के लिए रखा जाएगा.
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