किसान नेताओं और केंद्र के बीच बेनतीजा रही 7 घंटे चली बैठक, कृषि मंत्री बोले- तुरंत हल निकलना मुश्किल

केंद्र और किसान नेताओं के बीच वार्ता बेनतीजा
केंद्र और किसान नेताओं के बीच वार्ता बेनतीजा

Agriculture Laws: केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने यहां विज्ञान भवन में किसानों के अलग-अलग संघों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. सात घंटे तक चली बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के रुख को सुना और पंजाब में रेल सेवा को बहाल करने के लिए समाधान पर पहुंचने की कोशिश की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 9:25 PM IST
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नई दिल्ली. कृषि कानूनों (Agriculture Laws) का विरोध कर रहे किसान नेताओं एवं संगठनों और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) एवं पीयूष गोयल (Piyush Goyal) के बीच शुक्रवार को कई घंटे चली बैठक बेनतीजा रही. इस दौरान किसानों ने कृषि कानून वापस लिए जाने के साथ कई मांगें भी रखीं. बैठक के बाद नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा क‍ि यह स्‍पष्‍ट हो गया है कि किसान नेताओं की मांगें और सरकार की स्थिति के बीच अभी सामंजस्‍य बैठाना मुश्किल है. इस मुद्दे को अभी तुरंत हल नहीं किया जा सकता है. मैंने उनसे इस तरह की चर्चा का अनुरोध किया था और मैं आभारी हूं कि वे आए.

बेनतीजा रही 7 घंटे चली बैठक
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने यहां विज्ञान भवन में किसानों के अलग-अलग संघों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. सात घंटे तक चली बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के रुख को सुना और पंजाब में रेल सेवा को बहाल करने के लिए समाधान पर पहुंचने की कोशिश की. पंजाब में फिलहाल रेल सेवा बाधित है. भारतीय किसान मंच के प्रमुख जत्थेदार बूटा सिंह शादीपुर ने बैठक के बाद पीटीआई-भाषा से कहा, 'बैठक बेनतीजा रही और हमारा पक्ष सुनने के बाद मंत्रियों ने कहा कि वे मुद्दे का समाधान करने के लिए जल्द दुबारा मिलेंगे.'





उन्होंने कहा कि किसान संघ पंजाब में मालगाड़ियों की बहाली चाहते हैं जो नाकेबंदी की वजह से बंद हैं. पंजाब में तीन नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों के आंदोलन की वजह से रेल सेवा बंद है. बहरहाल, केंद्र सरकार नाकेबंदी को खत्म करना तथा यात्री और मालगाड़ी सेवा शुरू करना चाहती है. किसान संघ 18 नवंबर को चंडीगढ़ में बैठक करेंगे जिसमें मुद्दे पर आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी. सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्ष नए कृषि कानूनों पर अपने-अपने रुख पर अड़े रहे. उन्होंने कहा कि मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों ने किसान नेताओं को यह समझाने की कोशिश की कि ये कानून क्यों अहम हैं और कृषि क्षेत्र के लिए कितने लाभकारी हैं.

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बहरहाल, किसान अपने इस रुख पर अड़े रहे कि इन अधिनियमों को रद्द किया जाना चाहिए और इनकी जगह अन्य नए कानून लाए जाने चाहिए जिनमें पक्षकारों के साथ ज्यादा मशविरा किया जाए. किसानों ने एमएसपी की गारंटी की भी मांग की. सरकारी सूत्रों ने कहा कि खरीद स्तर पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई लेकिन किसी सहमति पर नहीं पहुंचा जा सका क्योंकि किसान संघ अपने रुख पर अड़े रहे.
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