अपना शहर चुनें

States

कृषि कानूनों का विरोध कर रहे पंजाब के किसानों से 3 दिसंबर को बातचीत करेगी केंद्र सरकार

कृषि मंत्री ने किसानों को तीन दिसंबर को बातचीत के लिए बुलाया है. (फाइल फोटो)
कृषि मंत्री ने किसानों को तीन दिसंबर को बातचीत के लिए बुलाया है. (फाइल फोटो)

Agriculture Laws: केंद्र सरकार द्वारा संसद के मानसून सत्र में पारित किए गए कृषि कानूनों को लेकर किसान लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस संबंध में किसानों से बातचीत के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. पहले दौर की बैठक बेनतीजा रहने के बाद सरकार ने 3 दिसंबर को दूसरे दौर की बातचीत के लिए किसानों को बुलाया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 24, 2020, 10:33 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने कृषि कानूनों (Agriculture Laws) का विरोध कर रहे पंजाब (Punjab) के किसानों को तीन दिसंबर को दूसरे दौर की बातचीत के लिए बुलाया है. केंद्र और किसानों के बीच इससे पहले 13 नवंबर को पहले दौर की बातचीत हुई थी. पंजाब की किसान यूनियनों (Farmer Unions) द्वारा नए कृषि कानूनों का विरोध किया जा रहा है. केंद्र ने अब यूनियनों को मंत्रिस्तरीय बातचीत के लिए आमंत्रित किया है.

इससे पहले पंजाब के किसान नेताओं ने सोमवार को अपने ‘रेल रोको’ आंदोलन को वापस लेने की घोषणा करते हुए एक और मंत्रिस्तरीय बैठक की शर्त रखी थी. इसके बाद किसानों ने अपने करीब दो माह के रेल रोको आंदोलन को वापस लेते हुए सिर्फ मालगाड़ियों के लिए रास्ता खोल दिया है. खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हमने करीब 30 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को तीन दिसंबर को सुबह 11 बजे विज्ञान भवन में दूसरे दौर की बातचीत के लिए बुलाया है.’’

ये भी पढ़ें- दिल्ली में Covid-19 की तीसरी लहर के पीछे प्रदूषण बड़ा कारण: CM केजरीवाल




बेनतीजा रही थी पिछले दौर की बैठक
सचिव ने बताया कि किसान संगठनों को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की ओर से बातचीत में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है. इस बैठक में केंद्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल के भी शामिल होने की उम्मीद है. पंजाब सरकार के खाद्य एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को भी बातचीत में शामिल होने को कहा गया है. इस बारे में पहले दौर की वार्ता 13 नवंबर को हुई थी. यह बैठक बेनतीजा रही थी क्योंकि दोनों ही पक्ष अपने रुख से हटने को तैयार नहीं थे.

पंजाब के किसान नए कृषि कानूनों को हटाने और उनके स्थान पर नए कानून लाने की मांग कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि नए कानून सभी अंशधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लाए जाने चाहिए. इसके अलावा किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मोर्चे पर भी गारंटी चाहते हैं. उनको आशंका है कि इन कानूनों से एमएसपी समाप्त हो सकता है. हालांकि, केंद्र ने इस आशंका को खारिज किया है.

ये भी पढ़ें- 27 नवंबर से शुरू होगा देश का पहला फेस टेक ट्रैकर, अपराधियों की पहचान होगी आसान

दिल्ली चलो मार्च के लिए तैयार किसान
इन्हीं कानूनों के विरोध में किसान 'दिल्ली चलो' मार्च के तहत राष्ट्रीय राजधानी को जोड़ने वाले पांच राजमार्गों से होते हुए 26 नवंबर को दिल्ली पहुंचेंगे. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति, राष्ट्रीय किसान महासंघ और भारतीय किसान संघ के विभिन्न धड़ों ने तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से साथ मिलकर संयुक्त किसान मोर्चा बनाया है.



इस मोर्चे को 500 से अधिक किसान संगठनों का समर्थन हासिल है. मोर्चे के कामकाज में समन्वय बनाए रखने के लिए सात सदस्यीय समिति का भी गठन किया गया है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज