तेलंगाना: सीएम KCR की बेटी के खिलाफ इसलिए चुनाव मैदान में उतरे 180 किसान

निज़ामाबाद चुनाव क्षेत्र में कृषि समस्याओं के चलते मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी कविता के लिए बड़ी चुनौती पेश आ रही है. लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करवाने वाले किसान राष्ट्रीय स्तर पर विरोध ज़ाहिर कर रहे हैं.

News18Hindi
Updated: April 4, 2019, 4:57 PM IST
तेलंगाना: सीएम KCR की बेटी के खिलाफ इसलिए चुनाव मैदान में उतरे 180 किसान
नामांकन के लिए लगी किसानों की भीड़.
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Updated: April 4, 2019, 4:57 PM IST
(रमना कुमार पीवी)

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी और निज़ामाबाद की वर्तमान सांसद कलवाकुंतला कविता को इस चुनाव में बेहद अजीबो-ग़रीब स्थि​ति का सामना करना पड़ रहा है. उनके चुनाव क्षेत्र के किसानों ने उनके ख़िलाफ़ नामांकन कर राष्ट्रीय स्तर पर विरोध दर्ज कराया है. कविता के ख़िलाफ़ 180 से अधिक किसानों ने निज़ामाबाद से अपना नामांकन दर्ज किया है.



कविता के सामने बड़ी पार्टियों के उम्मीदवार तो इस क्षेत्र से उम्मीदवार हैं ही, लेकिन किसानों की नाराज़गी से अभूतपूर्व स्थिति बन गई है. किसान नाराज़ हैं क्योंकि उन्हें हल्दी और लाल ज्वार का समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है. विरोध दर्ज कराने के दो महीने बाद भी यही स्थिति बनी हुई है. निज़ामाबाद संसदीय क्षेत्र में अरमूर, बोधन, निज़ामाबाद शहरी, निज़ामाबाद ग्रामीण, बालकोंडा, कोरुतला और जगित्याल विधानसभा क्षेत्र आते हैं.

हाल में हुए विधानसभा चुनावों में इन सभी विधानसभा सीटों पर सत्ताधारी टीआरएस पार्टी को अच्छे मतों से जीत मिली थी. पार्टी नेतृत्व ने सोचा था कि संसदीय चुनाव में उसे इस सीट पर आसानी से जीत मिल जाएगी. लेकिन जिस तरह से उनके ख़िलाफ़ भारी संख्या में लोग नामांकन दाखिल कर रहे हैं, उससे टीआरएस उम्मीदवार की सिरदर्दी बढ़ गई है.

निज़ामाबाद के एक पत्रकार महेंद्र का कहना है, 'किसानों की समस्या तो है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह इतनी बड़ी है कि यहां सत्ताधारी पार्टी को हार का सामना करना पड़े.' बीते साल सरकार ने किसानों से 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हल्दी ख़रीदी थी. इस साल सरकार ने हल्दी की ख़रीदी यह कहते हुए रोक दी कि उसे इससे 100 करोड़ रुपये का घाटा हुआ.

सरकार के इस निर्णय के बाद बिचौलिए और व्यापारियों ने ख़रीदी शुरू कर दी तो वो किसानों को 1700 रुपये से भी कम की क़ीमत दे रहे हैं. सरकार उनसे 2300 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लाल ज्वार की ख़रीद कर रही है पर किसान इसके लिए 4500 रुपये की क़ीमत मांग रहे हैं.

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सांसद और केसीआर की बेटी के कविता.

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किसानों में असंतोष है कि उनको फ़सलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है और पिछले दो महीनों से वे आंदोलन कर रहे हैं. सरकार इस मसले को सुलझा नहीं पाई है. इस बीच, संसदीय चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई और किसानों ने अपना विरोध दर्ज कराने और देश का ध्यान खींचने के लिए भारी संख्या में नामांकन दर्ज करना शुरू कर दिया. अभी तक दायर किए गए 185 नामांकन में 178 नामांकन किसानों ने इस संसदीय क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से दायर किए हैं.

नामांकन दाख़िल करने वाले आरगुल गांव निवासी किसान प्रवीण ने न्यूज़ 18 को बताया, 'हम चुनाव लड़ेंगे और अपनी समस्याओं का समाधान करेंगे. हम किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं कर रहे हैं. हम अपने बीच से ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहते हैं जो हमारी समस्या सुलझाए. इस बारे में बातचीत चल रही है. हम शीघ्र ही इस मुद्दे पर निर्णय लेंगे. हमें तीन लाख से अधिक किसान परिवारों का समर्थन हासिल है.'

प्रवीण ने कहा, 'चुनाव आयोग ने चुनाव चिह्न के बारे में अभी मामला स्पष्ट नहीं किया है. मुझे लूडो चुनाव चिह्न मिला है. मुझे नहीं पता यह क्या है. हमने चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपकर चुनाव को स्थगित करने को कहा है क्योंकि हमारे पास चुनाव प्रचार के लिए समय नहीं है.' सांसद कविता ने निज़ामाबाद में हल्दी बोर्ड की स्थापना का प्रयास किया था पर ऐसा नहीं हो सका. इस बीच, उन्होंने पतंजलि समूह के बाबा रामदेव से बात की और उनसे किसानों से हल्दी ख़रीदने को कहा, लेकिन वह भी नहीं हो पाया.

मुख्यमंत्री केसीआर ने किसानों को हल्दी और ज्वार का उचित मूल्य नहीं मिल पाने के लिए अभी हाल में निज़ामाबाद में अपनी एक चुनावी सभा में प्रधानमंत्री को ज़िम्मेदार ठहराया था. इस मुद्दे पर कविता का कहना है कि 'किसानों ने जो नामांकन किया है वह हमारे ख़िलाफ़ नहीं है बल्कि राष्ट्रीय पार्टियों के ख़िलाफ़ है. वो इसलिए यह विरोध कर रहे हैं ताकि इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना सकें. हमें इसका स्थायी समाधान निकालना होगा और इसी वजह से इतने ज़्यादा नामांकन हुए हैं.'

इस क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के प्रवक्ता मधु यशकी ने कहा, 'मुख्यमंत्री ख़ुद को किसानों का मददगार और ‘रैतू बंधु’ बताते हैं. क्या किसानों के साथ पेश आने का यही तरीक़ा है? निज़ामाबाद की जनता सत्ताधारी पार्टी को इस चुनाव में सबक़ सिखाएगी. हम सत्ता में आने के बाद उनके साथ न्याय करेंगे.'

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तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव.


टीआरएस के राज्यसभा सांसद और राज्य कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डी श्रीनिवास के बेटे धर्मपुरी अरविंद बीजेपी के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. श्रीनिवास सांसद हैं  और टीआरएस पार्टी की गतिविधियों से ख़ुद को अलग रखे हुए हैं. अरविंद का कहना है, 'बीजेपी इस चुनाव में एक बार फिर केंद्र में सरकार बनाएगी. मैं अपने चुनाव क्षेत्र में हल्दी बोर्ड की स्थापना कराऊंगा. यह चुनाव सिर्फ़ कांग्रेस और बीजेपी के बीच है और टीआरएस इस चुनाव में कहीं नहीं है.'

हल्दी बोर्ड के साथ-साथ टीआरएस के शीर्ष नेतृत्व ने 2014 के चुनाव में मेडक, मेटपल्ली और बोधन में मौजूद निज़ाम चीनी मिलों के अधिग्रहण का वादा किया था. इन फैक्ट्रियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी 51 प्रतिशत है. लेकिन वर्ष 2015 में कंपनी को पूरी तरह बंद कर दिया गया, क्योंकि क़ानूनी मामलों और प्रबंधन के मुद्दों की वजह से कंपनी दिवालिया हो गई. एनएसएफ के कर्मचारी इन बातों से नाराज़ हैं.

बोधन स्थित चीनी मिल में मज़दूर संघ के महासचिव नगुला रवि शंकर गौड़ ने कहा, 'हमसे रोज़गार छिन गया. हमारे लोग इस उद्योग में गॉर्ड्स, निर्माण मज़दूर के रूप में बहुत ही कम मज़दूरी पर काम कर रहे थे. यहां तक कि हम लोगों को हमारी बक़ाया राशि का पिछले चार माह से भुगतान भी नहीं किया गया है.' निज़ामाबाद के लोगों का कहना है कि इस शहर में विकास के काफ़ी अवसर हैं पर विकास हो नहीं रहा है.

निज़ामाबाद के निवासी नवीन ने कहा, 'निज़ामाबाद शहर में कोई बदलाव नहीं आया है. तेलंगाना के सभी शहर तेज़ गति से आगे बढ़ रहे हैं. लोग चाहते हैं कि सड़कें चौड़ी हों. नई सड़कें बनें. लोगों की आशा के अनुरूप विकास नहीं हुआ है.' किसानों, मज़दूरों और लोगों के इन मुद्दों के चलते इस सीट पर कड़े मुकाबले के समीकरण बन गए हैं.

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