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Agusta WestLand Deal: कमलनाथ के बेटे और भतीजे से कैसे जुड़े हैं रिश्वत बांटने के तार?

कमलनाथ (PTI)
कमलनाथ (PTI)

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर डील केस (Agusta WestLand Deal) में मुख्य आरोपी राजीव सक्सेना ने प्रवर्तन निदेशालय से पूछताछ में कई दावे किए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 18, 2020, 8:58 AM IST
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नई दिल्ली. अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर डील केस (Agusta WestLand Deal) में मुख्य आरोपी चार्टर्ड अकाउंट राजीव सक्सेना ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को उन संस्थाओं और निवेश के बारे में बताया है, जिनके जरिए कथित रूप से रिश्वत की राशि को इधर-उधर किया गया. खबर है कि सक्सेना ने ईडी को बताया कि इस मामले में डिफेंस डीलर सुषेण मोहन गुप्ता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के भतीजे रतुल पुरी शामिल थे.

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार ईडी के पास दर्ज 1000 से अधिक पन्नों के बयान में राजीव सक्सेना ने बताया है कि इस मामले में उनकी भूमिका सुषेण मोहन गुप्ता, रतुल पुरी और गौतम खेतान जैसे लोगों के लिए 'संरचनाओं के निर्माण और प्रबंधन तक सीमित थी.' हालांकि इटली और मॉरीशस के लेटर्स रोजेटरी के जरिए मिली जानकारी से पता चला है कि सक्सेना की चार कंपनियों ने कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल की कंपनी ग्लोबल सर्विसेज से 94 लाख डॉलर की पेमेंट ली थी. जून 2000 में  सक्सेना ने खुद इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज के 99.9% शेयर्स को अक्वायर कर लिया. बता दें मिशेल को साल 2018 में भारत में प्रत्यर्पित किया गया था और वह तब से जेल में हैं.

ग्लोबल सर्विसेज FZC से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से धन मिला
मॉरीशस से ईडी को मिले दस्तावेजों को लेकर सक्सेना ने दावा किया कि यह 'चतुर फर्जीवाड़ा' था. सक्सेना ने स्वीकार किया कि वह खुद इन निवेशों में साझेदार था, जिनके जरिए कथित तौर पर दी गई रिश्वत की धनराशि बांटी गई. सुषेण मोहन गुप्ता के मामले में सक्सेना ने ईडी को बताया कि उन्होंने दो कंपनियों, डीएम पावर और डीएम साउथ इंडिया हॉस्पिटैलिटी में निवेश किया है.
यह भी पढ़ें: अगस्ता डील के मुख्य आरोपी ने लिया कमलनाथ के बेटे, खुर्शीद और अहमद पटेल का नाम- रिपोर्ट



सक्सेना ने ईडी को बताया कि मेट्रिक्स ग्रुप लिमिटेड (सक्सेना की कंपनी) द्वारा भारत में ऑप्टिमा इंफ्रास्ट्रक्चर पाइवेट लिमिटेड में अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडी रिगल पावर लिमिटेड के माध्यम से किए गए निवेश के संबंध में मैं पुष्टि कर सकता हूं कि इंटरस्टेलर लिमिटेड और ग्लोबल सर्विसेज FZC से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से धन मिला. बकौल ईडी सक्सेना ने बताया कि इस निवेश में एक हिस्से का इंतजाम रतुल पुरी ने किया, लेकिन इसकी उन्हें जानकारी नहीं थी.

सक्सेना ने पूछताछ में बताया 'गुप्ता और पुरी भी इन निवेशों में शामिल थे'. उन्होंने कहा कि इन तीनों ने मोजर पावर के प्रॉजेक्ट्स के लिए सोलर पैनलों में बिजनेस समेत अन्य प्रस्तावों पर चर्चा की. वे मोजर पावर और सप्लायर्स के बीच 'मीडिएटर' का काम करने वाले थे.' सक्सेना ने ईडी को एक फ्लो चार्ट दिया जिसमें दिखाया गया था कि उनकी कंपनी मिडास मेटल्स इंट लिमिटेड ने मीडिएटर यूनिट के तौर पर काम किया.

कुल निवेश के लिए 50 मिलियन डॉलर का अनुमान
सक्सेना ने पुरी की कंपनी ऑप्टिमा इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में इन्वेस्टमेंट 'स्ट्रक्चर' की बात स्वीकार की. यह कंपनी हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट में निवेश कर रही थी. सक्सेना ने कहा, 'रतुल पुरी ने मॉरीशस में एक स्पेशल परपज व्हीकल सेटअप करने का प्रस्ताव दिया. जिसके बाद रिगेल पॉवर लिमिटेड नाम की एक कंपनी इस्टैबलिश हुई  जो उसकी  कंपनी ऑप्टिमा इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने के लिए हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में निवेश करने का रास्ता था. पुरी ने बताया कि कुल निवेश के लिए 50 मिलियन डॉलर का अनुमान लगाया गया था, जिसमें से हमें 5 मिलियन डॉलर में रखा गया था. पुरी ने कहा था कि वे 50 मिलियन डॉलर से प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टमेंट पर जोर देंगे. इसके लिए वह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ चर्चा  कर रहे थे. दो से छह साल  के समय के भीतरमोजर पावर और मिडास मेटल्स के बीच व्यापार सौदों का कुल मूल्य  240 मिलियन डॉलर के आसपास होगा.'

उन्होंने कहा कि डील के लिए हमारी फीस दस लाख डॉलर के करीब था, लेकिन बाद में मोजर पावर को उम्मीद से कम इन्वेस्टमेंट मिला और चीन में हम सप्लायर्स के पेमेंट नहीं कर पाए. सक्सेना ने बताया कि 'यह डिफाल्ट हमारी वजह से नहीं था ऐसे में मोजर बेयर ने पेमेंट्स लिए मिडास मेटल्स को फंडिंग के लिए तैयार हुआ. यह पेमेंट्स मोजर पॉवर की फाइनेंस टीम ने ऑर्गनाइज कराए थे. हमें बताया गया था कि ये फंड्स अलग कंपनियों के खातों के जरिए मिलेंगे. संभव है कि हवाला ऑपरेटर्स के जरिए ऐसा किया गया हो. रिगेल में इन्वेस्टमेंट डाइवर्ट करने की वजह से अब तक हमारे पर 21 मिलियन डॉलर की अनकवर्ड लाइबिलिटी है.'

व्यवसाय के लिए कोई बड़ी छूट प्राप्त हुई थी?
ईडी के अधिकारियों के सवालों के जवाब में कि क्या मोजर पावर या ऑप्टिमा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के साथ उनके व्यवसाय के लिए कोई बड़ी छूट प्राप्त हुई थी, सक्सेना ने कहा कि 'समय-समय पर' उन्हें प्रिस्टिन रिवर नाम की ऑफशोर कंपनी से पैसा मिला. सक्सेना ने दावा किया कि इसका प्रबंधन कमलनाथ के बेटे बकुल नाथ करते थे. ईडी को दिए गए रतुल पुरी के 62 पेज के खातों में 2014 में  कुल 20 मिलियन डॉलर की पेमेंट हुई. ये पेमेंट्स नितिन भटनागर नाम पर प्रिस्टिन रिवर में ट्रांसफर किए गए.

2020 की शुरुआत में ईडी ने भटनागर से भी पूछताछ की थी. राजीव ने बताया कि रतुल पुरी ने उनसे मुलाकात कराई थी. सक्सेना के अनुसार, उस समय भटनागर दुबई में बैंक जे सफा सरसीन के प्रबंध निदेशक थे लेकिन बाद में अपनी खुद की रियल एस्टेट कंपनी इस्टैबलिश की. इससे पहले नितिन भटनागर बैंक ऑफ सिंगापुर के साथ प्रिस्टिन रिवर इनवेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिलेशनशिप मैनेजर थे.'

अपने क्लाइंट्स के लिए फंड्स रोटेशन के बारे में और जानकारी देते हुए सक्सेना ने कहा कि 2011 और 2012 के बीच, लगभग 18 मिलियन डॉलर का भुगतान प्रिस्टिन रिवर को किया गया था. लेकिन लगभग 18 मिलियन डॉलर का अमाउंट उन्हें फिर से वेरा डेवलपमेंट और मैकल इन्वेस्टमेंट्स के माध्यम से पेमेंट कर दी गई.



उन्होंने ED को यह भी बताया कि सिंगापुर के मॉनेट्री अथॉरिटी ने प्रिस्टिन रीवर को भुगतान के लिए फंड्स के बारे 'सवाल' उठाए थे. पूछताछ के दौरान, सक्सेना ने कहा कि पिछले साल ईडी द्वारा दस्तावेज दिखाए जाने के बाद उन्हें पता चला कि प्रिस्टिन रिवर के पीछे 'ट्रस्ट स्ट्रक्चर' था. एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार नितिन भटनागर ने कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड मामले या किसी भी आरोपी के साथ उनका कोई लेना-देना नहीं है.'
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