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लंबे बाल-दाढ़ी और कुर्ता... बंगाल चुनाव में PM मोदी में BJP क्यों खोज रही रवींद्रनाथ टैगोर की छवि?

बंगाल चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का अंदाज भी बदला हुआ है.  (PTI)
बंगाल चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का अंदाज भी बदला हुआ है. (PTI)

पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections 2021) के मद्देनजर वहां की सियासत गर्माई हुई है. बंगाल जीतने के लिए बीजेपी ने एड़ी से चोटी तक का पूरा जोर लगा रखा है. चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का अंदाज भी बदला हुआ है. लंबी दाढ़ी हो या फिर कुर्ता, या चाहे किसी बैठक में बैकग्राउंड में दिखने वाली कोई तस्वीर ही क्यों ना हो, सबमें बंगाली टच जरूर नजर आता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 19, 2021, 2:37 PM IST
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(पल्लवी घोष)

कल्पना बहुत मायने रखती है. खासकर तब जब आप राजनीति की बात करते हैं. जब राजनीति पश्चिम बंगाल से जुड़ी हो, तो कल्पना और मजबूत हो जाती है. इसमें कोई शक नहीं है कि हर बंगाली के दिल में कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore) के लिए सॉफ्ट और स्पेशल कॉर्नर होता है. शायद ऐसा कोई बंगाली परिवार न होगा, जहां टैगोर की किताबें या रवींद्र संगीत के कलेक्शन न हों. आज के युवा बेशक मॉर्डन म्यूजिक और हिप-हॉप पसंद करते हों, मगर शाम को रवींद्र संगीत सुनने-सुनाने का अपना अलग ही मज़ा है, जिसकी तुलना दूसरे संगीत से नहीं हो सकती.

टैगोर की कविताओं पर काम कर चुके कवि सुदीप सेन कहते हैं, 'बंगाल के लिए टैगोर की प्रासंगिकता सर्वोपरि है. पुरानी पीढ़ी के लिए और विदेशों में बंगाली प्रवासी के लिए यह वैसा ही है, जैसा समाज अपने समग्र अर्थों में- शिक्षित, निष्पक्ष, समतावादी, भुखमरी से मुक्त और दूरंदेशी होना चाहता है. युवा पीढ़ी के लिए टैगोर एक अतीत की वास्तविकता के तौर पर हैं. वैसे इस धारणा को तत्काल अपडेट करने की जरूरत है. ऐसा इसलिए, क्योंकि टैगोर जिस चीज के लिए खड़े थे उसकी प्रासंगिकता नहीं बदली है. यह उनकी दृष्टि को नई पीढ़ी के लिए एक ऐसी भाषा में आगे ले जाने का तरीका है, जिसमें वे आसानी से समझ पाएं.'



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लिहाजा इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए लुक को लेकर बांग्लाभाषी ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं. चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का अंदाज भी बदला हुआ है. लंबी दाढ़ी हो या फिर कुर्ता, या चाहे किसी बैठक में बैकग्राउंड में दिखने वाली कोई तस्वीर ही क्यों ना हो, सबमें बंगाली टच जरूर नजर आता है. ऐसे में राजनीतिक गलियारों में भी पीएम मोदी का ये अंदाज सुर्खियां बटोर रहा है. मोदी के नए लुक को विपक्षी और बंगाल की सीएम ममता बनर्जी टैगोर से प्रेरित बता चुकी हैं. ममता तो इस लुक के लिए कड़ी आपत्ति भी जाहिर कर चुकी हैं.

हाल ही में पीएम मोदी की लोक कल्याण मार्ग (पीएम आवास) की एक तस्वीर वायरल हुई थी, जहां उन्हें मोर के साथ देखा गया था. ये तस्वीर शान्ति निकेतन की याद दिलाता है, जहां कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर घर की सीढ़ियों पर बैठकर पक्षियों के साथ समय बिताया करते थे.


कोरोना महामारी को फैलने से लगाए गए शुरुआती लॉकडाउन में ही पीएम मोदी का लुक बदला था. उन्होंने कई दिनों से बाल नहीं कटवाए थे और दाढ़ी बढ़ा ली थी. पहले लगा कि शायद लॉकडाउन में लोगों को घरों में रहने की अपील करने के लिए पीएम खुद गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं. लेकिन, जैसे-जैसे समय बीतता गया, पीएम मोदी का लुक कुछ हद तक कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर से प्रेरित होता गया.

बेशक विरोधियों ने इसका विरोध किया. ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस बार-बार प्रधानमंत्री, बीजेपी को 'बाहरी' बता चुकी है. ऐसे बहारी जो सिर्फ चुनावी लाभ के लिए बंगाल से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बीजेपी ने इसे सिरे से खारिज किया है. पार्टी के सांसद स्वपन दासगुप्ता कहते हैं, 'टैगोर सभी बंगालियों और सभी भारतीयों के हैं, चाहे उनकी वोटिंग की प्राथमिकता कुछ भी हो. कविगुरु किसी भी पार्टी की निजी संपत्ति नहीं हो सकते.'


जब पीएम मोदी ने पिछले साल विश्वभारती शताब्दी समारोह को बांग्ला भाषा में संबोधित किया, तो उन्होंने अपने खिलाफ 'बाहरी' शब्द का भी जवाब दिया. उन्होंने टैगोर के गुजरात कनेक्शन के बारे में बताया. पीएम ने बताया कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर भारतीय सिविल सेवा में थे. उनकी पोस्टिंग अहमदाबाद में थी. ऐसे में रवींद्रनाथ टैगोर अक्सर गुजरात आते थे और लंबे समय तक अहमदाबाद में रहे थे. बता दें कि सत्येंद्रनाथ टैगोर भारतीय सिविल सेवा में भर्ती होने वाले पहले भारतीय थे. वे इसके साथ ही लेखक, संगीतकार, भाषाविद और समाजसुधारक भी थे.

प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वभारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में बोलते हुए देश में महिलाओं के उल्टे पल्लू की साड़ी पहनने की शुरुआत को लेकर रोचक जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई और देश के पहले ICS अफसर सत्येंद्रनाथ टैगोर की पत्नी ज्ञानंदिनी देवी ने बाएं कंधे पर महिलाओं को साड़ी का पल्लू बांधना सिखाया.

पीएम ने ये भी बताया कि इस अवधि में टैगोर ने दो लोकप्रिय कविताएं लिखीं. उन्होंने गुजरात में खुदातो पासन (क्षुधिता पासन) का एक भाग लिखा. यही नहीं, गुजरात की बेटी श्रीमति हुथीसिंह का विवाह टैगोर परिवार में हुआ था.


बीजेपी के अमित मालवीय ने कहा, 'भारत की आजादी के लिए राष्ट्रीय आंदोलन के साथ पूरे देश में सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक जागरूकता की लहर थी. टैगोर भारत की स्वतंत्रता संग्राम के पीछे वैचारिक भावना थे. आज बंगाल को एक और नवजागरण की जरूरत है. बंगाल को व्यापक भ्रष्टाचार, तुष्टीकरण और भाई-भतीजावाद से छुटकारा पाने की जरूरत है. यहां के लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बंगाल के खोए हुए गौरव को दोबारा पाने और सोनार बांग्ला (विकसित बंगाल) का निर्माण करने का मन बना लिया है.'

बीजेपी का ये भी कहना है कि रवींद्रनाथ टैगोर को सिर्फ उनकी कविताओं के लिए नहीं, बल्कि उनके क्रांतिकारी विचारों के लिए जाना जाता है. सार्वभौमिकता और आत्मनिर्भरता उनके विचारों में थे, जो पीएम मोदी ने अपनी नीतियों और राजनीति में समाहित किया है. ये आत्मनिर्भर भारत जैसा ही है. बंगाल में बीजेपी टैगोर की शिक्षाओं और उनकी नीतियों का उपयोग करना चाहती है. इसे चुनावी सभा में लोगों के सामने रखा जाएगा.


सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी बंगाल विधानसभा चुनाव को मद्देनजर अपने कैंपेनिंग में रवींद्रनाथ टैगोर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं. सोनार बांग्ला के लिए बीजेपी भी एक पिच बना रही है. हालांकि, इस बीच पीएम मोदी का 'टैगोर लुक' एक टॉकिंग पॉइंट बन गया है. इससे पीएम और बीजेपी की तरफ से बंगाल के लोगों को ये जताने की कोशिश की जा रही है कि कविगुरु टैगोर सबके हैं. आखिरकार कोई भी बंगाली कभी भी टैगोर की प्रासंगिकता को नजरअंदाज नहीं कर सकता. ये प्रधानमंत्री मोदी को बखूबी पता है.
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