Home /News /nation /

अहमदाबाद सीरियल ब्‍लास्‍ट: पुलिस कैसे पहुंची आतंकी नेटवर्क तक, जानें पूरा घटनाक्रम

अहमदाबाद सीरियल ब्‍लास्‍ट: पुलिस कैसे पहुंची आतंकी नेटवर्क तक, जानें पूरा घटनाक्रम

आईपीएस अभय चुडासमा. (फाइल फोटो)

आईपीएस अभय चुडासमा. (फाइल फोटो)

जख्मी लोगों को मदद पहुंचाने के मकसद से लोग सिविल अस्पताल पहुंचे ही रहे थे कि एक जबर्दस्त धमाका हुआ....सबके कान सन्न रह गए...सब तरफ खून ही खून....लाशें बिखरी पड़ी थीं....इस धमाके में 37 लोगों की जान गयी...अब तक साफ हो गया था कि यह आंतकी घटना (Terror Attack) है....

अधिक पढ़ें ...

26 जुलाई 2008 शाम का वक्त…घड़ी 07 बजने की ओर इशारा कर रही थी… अहमदाबाद (Ahemdabad) के सिविल अस्पताल में काफी भगदड़ थी…एक के बाद एक सायरन बजाती एम्‍बूलेंस जख्मी लोगों को लेकर पहुंच रही थी. टीवी चैनल्स पर बड़ी-बड़ी ब्रेकिंग न्यूज चल रही थी कि अहमदाबाद में एक के बाद एक बम धमाके हो रहे हैं….जख्मी लोगों को मदद पहुंचाने के मकसद से लोग सिविल अस्पताल पहुंचे ही रहे थे कि एक जबर्दस्त धमाका हुआ….सबके कान सन्न रह गए…सब तरफ खून ही खून….लाशें बिखरी पड़ी थीं….इस धमाके में 37 लोगों की जान गयी…अब तक साफ हो गया था कि यह आंतकी घटना (Terror Attack) है…. शाम साढ़े सात होते-होते पूरे अहमदाबाद में सिलसिलेवार 20 धमाके की पुष्टि हो चुकी थी….अब तक 56 लोग जान गंवा चुके थे और 243 लोग जख्मी हुए थे.

तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी इस घटना से बेहद आहत थे. जख्मियों का इलाज अच्छी तरह हो, इसको लेकर प्रशासन को जरूरी सूचनाएंं देते रहे. गृह राज्यमंत्री अमित शाह के साथ पुलिस कमिश्नर आफिस पहुंचे. दूसरी ओर डीजीपी पी. सी. पांडे और कमिश्नर ओ.पी. माथुर को घटना के पीछे रही ताकतों को पकड़ने के सीधे आदेश दिए और सरकार से जो भी जरूरत हो वो फौरन मुहैया कराने का भरोसा दिया. 27 जुलाई अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के डीसीपी अभय चुडासमा रात से ही अपनी टीम के साथ जांच में जुट गए थे. वैसे ही जुर्म की दुनिया को तोड़ने के लिए जरूरी नेटवर्क आईपीएस अभय चुडासमा के पास पहले से जबर्दस्त रहा है. उन्हें टीम में और अधिकारियों की जरूरत थी लिहाजा राज्य सरकार ने बाकी तेजतर्रार अफसर जी. एल. सिंघल, हिमांशु शुक्ला, राजेंद्र असारी, मयूर चावडा जो कि अलग-अलग जगहों पर तैनात थे; उन्हें क्राइम ब्रांच के साथ रातों रात अटेच किया गया. ज्‍वाइंट सीपी के तौर पर अभी के डीजीपी आशीष भाटिया थे.

मुखबिर से मिली पहली लीड 

टीम को वैसे लीड कर रहे थे अभय चुडासमा…सभी ने अपने अपने नेटवर्क खंंगालने शुरू किए. तभी अभय चुडासमा को अपने नेटवर्क से यह पता चला कि सिमी के कुछ लोग पिछले कुछ दिनों से एक्शन में दिख रहे थे. इस इनपुट पर काम शुरू किया गया. कुछ लोगों को पूछताछ के लिए लाया गया, लेकिन अबतक कुछ ठोस हाथ नहीं लगा था. सूरज कब निकलता और कब ढलता इसकी किसी को कुछ खबर नहीं थी. बस लक्ष्य एक ही था कि इस केस को क्रेक किया जाए. डीसीपी अभय चुडासमा के मोबाइल पर घंटी बजी. उनका सोर्स था. उसने कहा कि धमाकों में इस्तेमाल हुई लाल और सफ़ेद कार उसने भरूच में देखी थी. इस इनपुट ने चेहरे पर हल्की मुस्कान ला दी. डीसीपी चुडासमा ने फौरन आईपीएस जी.एल. सिंघल और डिप्टी एसपी मयूर चावडा को अपने साथ लिया और भरूच की ओर निकल गए. सोर्स ने जो जगह बताई थी वहां अफसर पहुंचे. इस मकान से पहली लीड मिली… उसी मकान में आतंकियों ने बम बनाए थे. मकान मालिक से पूछताछ करने पर एक नंबर मिला. इस नंबर ने पूरे नेटवर्क को खोल दिया.

अभय चुडासमा ने अधिकारियों की अलग अलग टीम बनाई 

भरूच से अहमदाबाद वापस लौटते समय तीनों अधिकारियों के दिमाग में नेटवर्क को जल्द से जल्द तोड़ने की जद्दोजहद चल रही थी. टीम को लीड कर रहे अभय चुडासमा ने सभी अधिकारियों की अलग अलग टीम बना दी. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच में 350 लोगों को टीमों में बांटा गया….अभय चुडासमा, आईपीएस हिमांशु शुक्ला टेक्निकल सर्वेलेंस में जुटे. चूंकि अगली लीड वहीं से मिलनी थी…. आईपीएस जी एल सिंघल को सबसे अहम पूछताछ का काम सौंपा गया. सिंघल के साथ डिप्टी एसपी मयूर चावडा भी थे…पूछताछ की लीड पर लोगों को उठाने का काम डिप्टी एसपी राजेंद्र असारी, मयूर चावडा और टीम के बाकी सदस्यों के कंधे पर था… डिप्टी एसपी राजेन्द्र असारी की टीम के पास सबूत इकठ्ठा करना, गवाहों को तैयार करने की ज़िम्मेदारी थीं; चूंकि पूछताछ के बाद सबूत इकठ्ठा करना बेहद जरूरी था जो केस को और मजबूती देता…

एक के बाद एक कड़ियां जुड़ती गयी

वैसे तो टीम में उषा राड़ा, वी आर टोलिया, जितेंद्र यादव,जे. डी पुरोहित, भरत पटेल, तरुण बारोट के अलावा कई अधिकारी और उनकी टीम थी. सभी एकजुट होकर मल्टी लेयर में काम कर रहे थे…
टेक्निकल सर्वेलांस पर कुछ और सुराग मिले… उन्हें एक के बाद एक उठाया गया. सबसे पहले ज़ाहिद शेख को उठाया गया…एक के बाद एक कड़ियां जुड़ती गयी. कड़ी सीधी लखनऊ तक पहुंची. 13 अगस्त को आईपीएस हिमांशु शुक्ला और डिप्टी एसपी मयूर चावडा लखनऊ पहुंच गए थे. चूंकि नाम सामने आया था मुफ़्ती अबू बशीर का. मामले में अबतक यह सबसे बड़ा कैच था जांच एजेंसियों के लिए. उसे लाने में देरी ना हो और बाकी आतंकियों को भागने का मौका ना मिले इस लिहाज से तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेशल फ्लाईट लखनऊ भेजी और मुफ़्ती अबू बशीर को लाया गया. मुख्यमंत्री मोदी को जांच की हर छोटी जानकारी गृह राज्यमंत्री अमित शाह द्वारा दी जा रही थी…

सबसे बड़े आतंकी नेटवर्क को पकड़ने में अहमदाबाद पुलिस को सफलता मिली

संदिग्धों से पूछताछ में कड़ियां जोड़ने का काम आईपीएस जी एल सिंघल और उनकी टीम कर रही थी… एक के बाद एक नाम खुलते गए….अहमदाबाद, भरूच, भुज, सूरत, यूपी तक तार जुड़ रहे थे. आरोपियों के नाम सामने आ रहे थे. जैसे नाम और भूमिका सामने आ रही थी टीमें लोकेशन के लिए रवाना हो रही थी….जिस दिन मुफ़्ती अबू को लाया गया उसी दिन अलग अलग टीमों ने भी अलग अलग जगहों से 10 आरोपियों को पकड़ा यानि एक ही दिन में 13 आरोपी पकड़े गए. सभी से अलग-अलग पूछताछ हो रही थी. टेक्निकल सर्वेलेंस पहले से था. फिर क्या था ? अधिकारियों की टीम ने 15 अगस्त तक 30 आरोपियों को पकड़ लिया था. यानि जांच शुरू होने के महज 19 दिन में देश के सबसे बड़े आतंकी नेटवर्क को पकड़ने में अहमदाबाद पुलिस को सफलता मिली… यही आरोपी अहमदाबाद धमाकों से पहले बेंगलोर, हैदराबाद, वाराणसी, जयपुर में धमाके कर चुके थे. जिन राज्यों में धमाके हुए वहां की पुलिस अभी सुराग ढूंढने में लगी थी तब तक अहमदाबाद पुलिस ने आतंकियों को पकड़ लिया था. सिमी का नया रूप लिए इंडियन मुजाहिदीन की ऐसी कमर तोड़ी की आजतक यह नेटवर्क खड़ा नहीं हो सका..

आतंकी नेटवर्क कितने राज्यो में फैला, इन आंकड़ोंं से पता चलेगा

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने अहमदाबाद से 13, वडोदरा से 05, भरूच से 01, भुज से 01, सूरत से 02, महाराष्ट्र से 11, मध्य प्रदेश से 12, कर्नाटक से 10, उत्तरप्रदेश से 09, केरला से 05, आंध्र प्रदेश से 03, राजस्थान से 03, झारखंड से 02 और बिहार 01 ऐसे 78 आरोपी पकड़े थे. जब 30 आरोपी एक साथ आए उसके बाद सिमी के लोगों की भूमिका भी सामने आई…दरअसल अहमदाबाद धमाकों की साजिश दिसंबर 2007 में ही रची गयी थी उसके बाद वाघामोन और पावागढ़ के जंगलों में आतंकियों की ट्रेनिंग भी हुई. उस ट्रेनिंग में हिस्सा लेने वाले कई आतंकी मध्यप्रदेश पुलिस के हाथ धमाको से पहले ही पकड़े गए थे…जिनकी भूमिका सामने आने के बाद उन्हे ट्रांसफर वारंट से गिरफ्तार किया गया.

रियाज़ भटकल, इकबाल भटकल और आमिर रजा समेत 13 वांटेड 

शुरुआती गिरफ्तारियां हुई इसमें से सभी आतंकियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है. यही दर्शाता है कि जांच के मेरिट कितने हैं. आरोपियों की पूछताछ में बाटला हाउस तक जानकारी निकली थी…इसी आतंकी ग्रुप के बाकी सदस्य दिल्‍ली में कुछ करने वाले हैं. इसकी जानकारी केंद्र सरकार को दी गयी थी लेकिन अफसोस इसे रोका नहीं गया और 13 सितंबर 2008 को 5 सीरियल धमाकों में 25 से ज्यादा लोगोंं की मौतें हुई थीं…उसके बाद बाटला हाउस मुठभेड़ भी हुई थी…. आज इसी मॉड्यूल के 13 लोग वांटेड है जिस में सबसे बड़े चेहरों में रियाज़ भटकल, इकबाल भटकल और आमिर रजा है जो पाकिस्तान भागने में कामयाब हुए है.

Tags: Ahemdabad, Gujarat Police, Terror Attack

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर