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देश के 765 इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट कॉलेजों पर लगा ताला, खत्म हुईं 4.24 लाख सीटें

देश के 765 इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट कॉलेजों पर लगा ताला, खत्म हुईं 4.24 लाख सीटें

साल 2018 में भी 545 कॉलेजों पर ताला लगा था जिसके चलते 3.30 लाख सीटें अलग-अलग कोर्स में कम हो गईं थी. 237 कॉलेजों पर एआईसीटीई ने ताला लगाया है. वहीं 226 कॉलेज वालों ने खुद से कॉलेज पर ताला लगाया है.

साल 2018 में भी 545 कॉलेजों पर ताला लगा था जिसके चलते 3.30 लाख सीटें अलग-अलग कोर्स में कम हो गईं थी. 237 कॉलेजों पर एआईसीटीई ने ताला लगाया है. वहीं 226 कॉलेज वालों ने खुद से कॉलेज पर ताला लगाया है.

साल 2018 में भी 545 कॉलेजों पर ताला लगा था जिसके चलते 3.30 लाख सीटें अलग-अलग कोर्स में कम हो गईं थी. 237 कॉलेजों पर एआईसीटीई ने ताला लगाया है. वहीं 226 कॉलेज वालों ने खुद से कॉलेज पर ताला लगाया है.

    अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) अब इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी और आर्किटेक्चर जैसे कोर्सेज में सिर्फ 32 लाख, 9 हजार सीट पर ही दाखिला लेगा. बता दें कि देश के 765 इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट कॉलेजों पर ताला लगने के बाद 4.24 लाख सीटें कम हो गई हैं.

    देश के 237 कॉलेजों पर एआईसीटीई ने ताला लगाया है. परिषद का कहना है कि ये कॉलेज नियमों को पूरा करते हुए पढ़ाई नहीं करा रहे थे. वहीं 226 कॉलेज ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने कॉलेजों में पढ़ाई जारी रखने से मना कर दिया है.

    इन कॉलेजों का कहना है कि निर्धारित सीट पर भी उन्हें छात्र नहीं मिल रहे हैं. जिसके चलते कॉलेज के खर्चे तक नहीं निकल पा रहे हैं. ये वो कॉलेज हैं जो 2019 से अब अपने यहां कोई दाखिला नहीं लेंगे.

    जिन कॉलेजों पर परिषद ने ताला लगाया है और जिन्हों खुद से अपने कॉलेज बंद किए हैं उनकी पूरी सूची परिषद की बेवसाइट पर देखी जा सकती है. परिषद से जुड़े जानकार बताते हैं कि इन कॉलेजों के बंद होने से देशभर में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी और आर्किटेक्चर आदि कोर्स की 4.24 लाख सीटें कम हो गई हैं.

    लेकिन दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष की पढ़ाई ये कॉलेज पहले की तरह से कराते रहेंगे. गौरतलब है कि साल 2018 में 545 कॉलेजों पर ताला लगा था जिसके चलते 3.30 लाख सीटें अलग-अलग कोर्स में कम हो गईं थी.

    डॉ. बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. संजीव कुमार का इस बारे में कहना है, “कॉलेजों पर ताला लगने और सीट कम होने की सबसे बड़ी वजह ये है कि हमारे यहां चल रहे कोर्स अपडेटड नहीं हैं. जिसके चलते इन्हें पढ़ने वाले छात्रों को अच्छी नौकरियां नहीं मिल पाती हैं. इसलिए छात्रों का आना कम हो गया है. हालांकि अब एआईसीटीई ने कदम उठाते हुए कुछ नए कोर्स शामिल किए हैं और पुराने कोर्स को अपडेट किया है. लेकिन ये कदम बहुत दूरी से उठाया गया है.”

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    Tags: Aicte, Engineering colleges, Engineering courses, Job and career

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