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AIIMS के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया की चेतावनी- कोरोना के नए वैरिएंट से दोबारा हो सकता है संक्रमण

दिल्ली एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया
दिल्ली एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया

Coronavirsu: कोरोना से अब तक 1 लाख 56 हजार 385 लोगों की जान जा चुकी है. वहीं, अब तक 1 करोड़ 6 लाख 99 हजार 410 लोग इस वायरस को मात दे चुके हैं. अभी 1 लाख 50 हजार 55 एक्टिव मरीज हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 22, 2021, 12:02 PM IST
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नई दिल्ली. दुनिया भर में कोरोना वायरस (Coronavirsu) के नए वैरिएंट से कोहराम मचा हुआ है. भारत में भी कोरोना की एक और लहर आ गई है. चिंता की बाद ये है कि कोविड-19 के नए स्ट्रेन के मामले भी देश के कई इलाकों में दिख रहे हैं. ऐसे में देश के सबसे बड़े हॉस्पिटल AIIMS के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि कोरोना का नया वैरिएंट ऐसे लोगों को भी दोबारा संक्रमित कर सकता है जिन्हें पहले कोरोना हुआ था.

एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए गुलेरिया ने कहा कि जिन लोगों में पहले से कोरोना की एंटीबॉडीज़ है उन्हें भी कोरोना के नए वैरिएंट से खतरा है. उन्होंने कहा, 'भारत में एक बार फिर से बड़े पैमाने पर कोरोना के टेस्ट की जरूरत है. इनकी संख्या बढ़ानी होगी. वैक्सीन ही एकमात्र हथियार है जिससे लोग कोरोना से बच सकते हैं.'

हर्ड इम्युनिटी पर क्या बोले गुलेरिया
डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि हर्ड इम्युनिटी को लेकर लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी. चिंता करने वाली बात ये है कि हर्ड इम्युनिटी पूरी तरह पाना संभव नहीं है. इसे भारत जैसे देश में सोचना मुश्किल है. डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि भारत में कोरोना वायरस के प्रति हर्ड इम्‍युनिटी बनने की बात एक मिथक सी लगती है. इसके पीछे वजह है कि इसके लिए देश की 80 फीसदी आबादी में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी डेवलेप होनी चाहिए.



नए वैरिएंट से खतरा
बता दें कि हैदराबाद स्थित वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मोलिक्युलर बॉयोलॉजी (CCMB) के वैज्ञानिकों ने अपने एक अध्ययन में कहा है कि कोरोना वायरस का नया वैरिएंट देश के कुछ राज्यों में तेजी से फैल रहा है. सीसीएमबी के वैज्ञानिकों ने कहा है कि दुनिया भर में मिले कोरोना वायरस के वैरिएंट्स का भारत में कम प्रभाव देखने को मिला है, लेकिन इसके पीछे एक वजह ये भी हो सकती है कि पर्याप्त संख्या में वायरस की सीक्वेंसिंग नहीं हुई है.
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